पूर्णिया जिले के बायसी में घटित दलित उत्पीड़न की घटना

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वास्तविकता से परे की वर्तमान राजनीतिक चलन को तूल देने पर आमादा बायसी से बाहर के नेतागण कर रहे हैं दिग्भ्रमित कराने वाली राजनीति, लोकल बायसी के राजनीतिक दलों के नेताओं की बरकरार है चुप्पी

मीडिया भी है मौन :: कभी राजद विधायक के कार्यकाल में घटी थी ऐसी घटना और इस बार एमआइएम के सीटिंग विधायक के कार्यकाल में हुई उक्त घटना की जबरदस्त पुनरावृत्ति

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फोटो – बायसी में दलित टोला पर हुए हमले में आरोपी और पीड़ित दोनो ही हैं स्थानीय,

बायसी/ पूर्णिया (अशोक कुमार)।

विगत 24 अप्रैल की घटना के बाद 19 मई को पूर्णिया जिले के बायसी अनुमण्डल मुख्यालय के खपड़ा ग्राम पंचायत के मझुआ गांव में उसी घटना की वीभत्स पुनरावृत्ति हुई , जिस घटना के तहत एकाध दलित परिवार के घर मे एक समुदाय विशेष के पड़ोसियों के द्वारा गत माह की 24 तारीख को अगलगी और मारपीट की घटना घटी थीं और उसके एक महीने के बाद फिर उसी तरह की घटना की पुनरावृत्ति गत 19 मई को की गई तो उसमें दलितों के 13 घरों को अग्नि की भेंट चढ़ा दिये गए और इस बार की घटना के दौरान दलितों के टोले के सारे पुरूषों के साथ साथ दलित महिलाओं की भी जमकर पिटाई की गई।

आरोप लगाया गया है कि उक्त घटना के बीच ही एक सेवानिवृत्त चौकीदार की भी मौंत पिटाई से हो गई और एक बालक भी उक्त कांड के समय से ही लापता कर दिया गया है। दूसरे दिन अखबारों की सुर्खियां बनी उक्त घटना की जानकारी मिलते ही जिले की राजनीति सरगर्म हो गई और बयानबाजी के दौर शुरू हो गए।

लेकिन , ताज्जुब की बात यह देखने को मिली कि उक्त घटना को लेकर लोकल बायसी के राजनीतिक महकमे से न तो किसी भाजपा नेता ने कोई बबाल मचाया और न ही राजद या लोजपा या दलित सेना के किसी लोकल नेताओं ने उक्त घटना के विरोध में कोई चूं चां की।

घटना के विरोध में जिन भाजपाई , राजद , दलित सेना और लोजपाई नेताओं ने मुंह खोले , वे सभी या तो पूर्णिया जिला मुख्यालय के हैं या पड़ोसी जिले किशनगंज के। सर्वविदित है कि बायसी अनुमण्डल का पूरा क्षेत्र किशनगंज संसदीय क्षेत्र में पड़ता है । और किशनगंज के नेताओं की प्रतिक्रिया का कारण वही है।

अब यहां दूसरा सवाल यह पैदा होता है कि उक्त कांड को लेकर कांड में संलिप्त अपराधियों की जगह एक खास राजनीतिक दल को ही कांड का जिम्मेवार बताने की कोशिशें क्यों जारी हो गई हैं और अगर उक्त कांड में उक्त राजनीतिक दल के संरक्षक गुंडों के ही हाथ हैं तो उस बात का स्पष्ट खुलासा बायसी क्षेत्र के ही दूसरे राजनीतिक दल के नेताओं यथा पूर्व राजद विधायक अथवा पूर्व के विधानसभा चुनाव में जदयू के बायसी सीट से उम्मीदवार रहे नेता और भाजपा के नेतागण क्यों नहीं कर रहे हैं।

उल्टे इस कांड को राजनीतिक पेचीदगियों में झोंकने के लिए उक्त कांड की आड़ में “बांग्लादेशी घुसपैठियों या कथित रोहिंगियों” की चर्चाएं  भी शुरू कर दी गई हैं।

मतलब स्पष्ट है कि दो अलग अलग विधानसभा क्षेत्रों को अपने आगोश में समेटे बायसी अनुमण्डल क्षेत्र लगभग 75 प्रतिशत मुसलमानों से भरा पूर्णिया जिले का ऐसा इलाका है , जहां के बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी को नाराज करने की तनिक भी हिम्मत किसी भी राजनीतिक दल को नहीं है और यही कारण है कि बायसी में घटित दलित उत्पीड़न के मामले को बायसी के बजाये बायसी से बाहर के नेताओं के द्वारा उछाले जा रहे हैं।

बायसी के पत्रकार जगत के बीच भी जबरदस्त खामोशी व्याप्त है। और , वर्तमान राजनीतिक चलन के अनुरूप दूर से बायसी को मोहरा बनाकर तरह तरह के राजनैतिक बयानबाजी किये जा रहे हैं।

अभी बायसी में एमआइएम के सीटिंग विधायक हैं तो दूरस्थ इलाकों से आ रहे अखबारी बयानों में सावित करने के प्रयास किए जा रहे हैं कि घटना करने वालों ने एमआइएम के विधायक की सह पर उक्त घटना को अंजाम दिये।

लेकिन , बायसी के प्रशासनिक रिकॉर्ड में दर्ज है कि जब बायसी में राजद वाले पूर्व विधायक हाजी अब्दुस सुब्हान काबिज़ थे तो तब भी अभी से लगभग चार साढ़े चार साल पहले भी इसी तरह की घटना वहीं पर उन्हीं के साथ घटी थी जो अभी घटी है।

उस समय लम्बे समय तक घटनास्थल पर पुलिस के कैम्प लगाये गए थे , क्योंकि , उन दलितों और उन दलितों के ही पड़ोसी अल्पसंख्यकों के बीच रह रह कर झगड़े ठन जाते थे।

बहरहाल , अब सीधा साधा असली सवाल है कि आखिर वहां पर बारम्बार ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति क्यों हो रही है ?

विश्वस्त सूत्रों के अनुसार , घटनास्थल पर बसे हुए दलित समाज किसी किसान या जमींदार की जमीन पर नहीं बल्कि विशुद्ध बिहार सरकार की सड़क वाली जमीन पर वर्षों से बसे हुए हैं। जहां ये दलित बसे हुए हैं उसके पीछे किसानों की कृषि भूमि और वसोवास की जमीनें हैं। उन जमीनों की उस समय कोई अहमियत नहीं थी तो पीछे वाले पड़ोसी इन दलितों को नजरन्दाज करते रहे थे।

कालांतर में उन दलितों को 3—-3 डिसमिल जमीन सरकार ने बसोबास के लिये प्रदान किये और उन्हें इंदिरा आवास भी दे दिये । लेकिन , वे दलित सड़क की सरकारी जमीन से टसकने का नाम नहीं लिये और जमे रहे थे कि इसी बीच सड़क किनारे की ज़मीनों के भाव बढ़ने शुरू हो गए और दलितों के पीछे वाले पड़ोसियों में सड़क किनारे स्थित अपनी ज़मीनें बेचकर माल उगाही की ललक जगने लगी तो वर्षों से पड़ोसी बनकर सुखदुख के साथी बने रहे दलितों और अल्पसंख्यकों के बीच खटास उत्पन्न होने लगे और कालांतर में खूनी संघर्ष के कारण बन गए।

बायसी के तमाम जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक महकमों को इस वास्तविक तथ्यों का पता है और इस विवाद में पड़कर कोई जनप्रतिनिधीगण अपने मुस्लिम वोटबैंक को अपने हथेली से फिसलने नहीं देना चाहते हैं अतः सबके सब इस घटना को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं।

भले ही दूरस्थ राजनीतिक हित साधने के लिए बायसी से बाहर के राजनैतिक नेतागण किसी भी तरह के प्रोपगंडे की राजनीति लाख कर लें।

“बायसी में दलित टोला पर हुए हमले में आरोपी और पीड़ित दोनो ही हैं स्थानीय, पूर्णिया के डीएम ने सोशल मीडिया पर बाहरी लोगों की संलिप्तता को लेकर परोसी गई खबरों को बताया भ्रामक, एक बच्चे की गुमशुदगी की खबर भी निकली झूठी, डीएम के अनुसार , घटित घटना के आलोक में 20 मई को बायसी थाना में अनुसूचित जाति अत्याचार अधिनियम के तहत दर्ज किये गए हैं तीन प्राथमिकी, हत्या मामले के दो नामजदों को किया गया है गिरफ्तार और मजिस्ट्रेट की देखरेख में तैनात किए गए हैं पुलिस कैम्प, डीएम के अनुसार , प्रावधानों के अंतर्गत सभी प्रकार की सहायता राशि व अनुग्रह राशि का किश्तों में शुरू किया गया है भुगतान, मृत सेवानिवृत्त चौकीदार के लिए भी स्वीकृत किये गए हैं मुआबजे की राशि”

पूर्णिया के जिलापदाधिकारी ने सोशल मीडिया पर चलाये जाने वाले उक्त खबर को भ्रामक बताया है , जिसमें बायसी की घटना में बाहरी तत्वों की संलिप्तता बतायी गयी है।

पूर्णिया के जिलापदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि उक्त घटना में पीड़ित और आरोपी दोनो ही स्थानीय ही हैं और मामले में विधि संगत कार्रवाई की जा रही है।

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फोटो – बायसी दलित उत्पीड़न पर पूर्णिया जिलाधिकारी का बयान

पूर्णिया जिले के बायसी थाना क्षेत्र के अनुसूचित जाति टोला , ग्राम नियामतपुर मझुआ , पंचायत खपड़ा अंचल बायसी में विगत 19 मई को घटित आगजनी की घटना को लेकर समाहरणालय पूर्णिया से जारी जिलापदाधिकारी की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार , उक्त घटना के आलोक में बायसी थाना में अनुसूचित जाति अत्याचार अधिनियम के तहत तीन प्राथमिकी दर्ज किये गए हैं , जिसमे से हत्याकांड के दो नामजद आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और घटनास्थल पर सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर मजिस्ट्रेट की देखरेख में पुलिस कैम्प की स्थापना की गई है।

पूर्णिया डीएम की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार , उक्त घटना में मृत सेवानिवृत्त चौकीदार नेवालाल राय के आश्रित को 8.25 लाख का आधा अर्थात 4 लाख 12 हजार 500 रूपये बतौर मुआबजा प्रथम किश्त के रूप में भुगतान के लिए स्वीकृति प्रदान कर दी गयी है तथा चार्जशीट दाखिल होने के बाद शेष राशि भी प्रदान कर दी जाएगी।

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पूर्णिया डीएम की प्रेस विज्ञप्ति

जिलापदाधिकारी के अनुसार , घटना के सभी 13 पीड़ित परिवारों को सूखा राशन , पॉलीथिन की आपूर्ति करते हुए अनुग्रह अनुदान राशि के रूप में प्रत्येक परिवार की दर से 8900 रूपया और मुआबजे की 2 लाख राशि का 25 प्रतिशत प्रथम किश्त के रूप में 50 हजार रूपया प्रति व्यक्ति की दर से उपलब्ध करा दिया गया है।

पूर्णिया डीएम के अनुसार , पीड़ितों को दोनो समय का भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है और सरकारी योजनांतर्गत सभी पीड़ितों के बीच मुफ्त खाद्यान्न सामग्री का वितरण किया गया है। उन्होंने बताया कि सभी योग्य लाभुक पेंशन योजना से आच्छादित हैं तथा जिन्हें आवास योजना का लाभ नहीं मिला है उन्हें आवास योजना से लाभान्वित कराने की कार्रवाई शुरू की गई है।

उन्होंने बताया कि सभी पीड़ितों के स्वास्थ्य जांच और इलाज के लिए घटनास्थल पर मेडिकल कैम्प भी लगाया गया है।

जिलापदाधिकारी पूर्णिया की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार , बिहार महादलित विकास योजना के अंतर्गत पूर्व में प्रति परिवार 3 डिसमिल जमीन की दर से 46 परिवार को जमीन उपलब्ध कराया जा चुका था ।जिसमें से घटना से प्रभावित परिवार में से 7 परिवार उक्त वास भूमि के लाभान्वित हैं और शेष 6 परिवार को वास हेतु जमीन उपलब्ध कराने की कार्रवाई भी प्रारंभ कर दी गई है।

जिलापदाधिकारी के अनुसार , घटना में एक बच्चे की गुमशुदगी की फैलायी गयी खबर भी झूठी और बेबुनियाद निकली है।

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