पूर्णिया के जिलापदाधिकारी ने बाढ़ से पूर्व लिया कटावस्थलों का जायज़ा और बचावकार्यों को पूरा करने का दिया निर्देश

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  • लेकिन क्षेत्र के आहत विधायक अख्तरूल ईमान ने जताई चिंता कि बचाव के ठोस उपाय के लिए सरकार ने कभी नहीं बनाई कोई योजना
  • सरकार को भेजा त्राहिमाम सन्देश
  • कहा – कनकई की धारा बदलने से उनके अमौर विधानसभा क्षेत्र के 12 पंचायतों व कई सड़कों सहित कई पुलों पर खतरे की बढ़ी आशंका
  • विधायक के अनुसार , किशनगंज से अररिया तक के 80 किलोमीटर के क्षेत्रफल में 11 नदियां प्रत्येक वर्ष मचाती है तबाही
  • फिलबक्त जनता कर रही है श्रमदान से बचने का उपाय
जिलाधिकारी-पूर्णिया
फोटो – पूर्णिया जिलापदाधिकारी के द्वारा किए गए निरीक्षण कार्य

सीमांचल/अमौर/वैसा/पूर्णिया ( अशोक / विशाल ) ।

पिछले दिनों वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पूर्णिया प्रमंडल के आयुक्त की अध्यक्षता में चारो जिले अररिया , कटिहार , किशनगंज और पूर्णिया के जिलाधिकारियों , आरक्षी अधीक्षकों , सहित अपर समाहर्ता , कार्यपालक अभियंता बाढ़ नियंत्रण , सिंचाई , आरडब्लूडी , पीएचईडी व अन्य पदाधिकारियों की समीक्षा बैठक सम्भावित बाढ़ नियंत्रण को लेकर की गई थी तो उसके बाद प्रमंडल के प्रत्येक जिले में बाढ़ नियंत्रण को लेकर पदाधिकारियों की सक्रियता बढ़ गई।

चारो जिले के जिलापदाधिकारी अपने अपने जिलों में सम्भावित बाढ़ पर नियंत्रण के लिए तैयार हो गये और जगह जगह बांधों और कटावस्थलों के निरीक्षण में लगते हुए सम्बद्ध विभागों को बाढ़ से पहले सुरक्षात्मक कार्य करने के लिए अत्यावश्यक दिशा निर्देश जारी करने लगे हैं।

अभी अभी पूर्णिया के जिलापदाधिकारी ने प्रत्येक वर्ष की बाढ़ से तबाही झेलने वाले पूर्णिया जिले के बायसी अनुमण्डल के बैसा प्रखंड स्थित बांधों का निरीक्षण  चंदवार पंचायत , पिपलतोड़ा गांव और काशीबाड़ी गांव में किया और सम्बद्ध विभाग को बाढ़ और कटावलीला से बचाव का कार्य समयपूर्व करने के लिए अत्यावश्यक दिशा निर्देश दिया।

पूर्णिया के जिलापदाधिकारी के द्वारा किए गए इस निरीक्षण कार्य और वचाव कार्य के मद्देनजर दिये गए अत्यावश्यक दिशा निर्देश की सराहना करते हुए अमौर विधानसभा क्षेत्र के विधायक अख्तरूल ईमान ने कहा है कि यह ठीक है कि सम्भावित बाढ़ की त्रासदियों से बचाने की दिशा में पूर्णिया के जिलापदाधिकारी ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का और बांधों का निरीक्षण कर सम्बद्ध विभागों को समयपूर्व सुरक्षात्मक कार्य करने का निर्देश दिया है लेकिन ,

उससे पहले इस सच्चाई का उजागर होना जरूरी है कि पूरे सीमांचल-पूर्णिया प्रमंडल में प्रत्येक वर्ष की बाढ़ की विनाशलीला सबसे ज्यादा पूर्णिया जिले के इसी बायसी अनुमण्डल के दो विधानसभा क्षेत्रों अमौर और बायसी में ही होती है।

एमआइएम पार्टी के अमौर विधायक अख्तरूल ईमान ने कहा कि उनके अमौर विधानसभा क्षेत्र और बायसी विधानसभा क्षेत्र में प्रत्येक वर्ष बाढ़ की जो विनाशलीला उत्पन्न होती है , उसमें महानन्दा नदी से ज़्यादा तबाही कनकई नदी मचाती है।

उन्होंने कहा कि पूर्णिया जिले के अमौर – बैसा में 69 जगहों पर कटावलीला होती हैं। हरिया से लेकर मंगलपुर , तालबाड़ी , सिमलबाड़ी , लंगड़ा टोली , खाड़ी जैसे गांवों को तो प्रत्येक वर्ष विस्थापन का दंश झेलना पड़ता है।

लेकिन , पूर्णिया जिले के बायसी अनुमण्डल के बाढ़ प्रभावित दोनो विधानसभा क्षेत्रों बायसी और अमौर को बाढ़ की त्रासदी से बचाने के लिए बिहार की अबतक की किसी भी सरकार ने कोई ठोस योजना कभी नहीं बनाया।

उन्होंने बताया कि पीपलतोड़ा , मिरचान टोला , पोखरिया , मछुआटोली , काशीबाड़ी के लिए सरकार ने फिलबक्त 5 योजनाओं को स्वीकृत किया है।

पिछले 19 मई को विभागीय मंत्री और पूर्णिया प्रमंडल के आयुक्त के साथ जनप्रतिनिधियों व विभागीय अधिकारियों की हाई लेबल मीटिंग हुई थी और अग्रिम बचावकार्यों को मई महीने की ही 31 तारीख तक पूरा करने का सख्त आदेश जारी किया गया था।

लेकिन , यहां पर यह सवाल खड़े होते हैं कि मनरेगा से उन योजनाओं को कैसे अंजाम दिलाया जा सकता है।

विधायक को ही एक मनरेगा अधिकारी ने बताया है कि हमें बाढ़ के लिए किये जाने वाले किसी भी काम का कोई आइडिया ही नहीं है और हम तभी काम कर सकते हैं जब हमें जल संसाधन और निस्सरण विभाग का टेक्निकल सपोर्ट मिलेंगे।

अमौर के एमआइएम विधायक अख्तरूल ईमान के अनुसार , अभी बाढ़ से पहले ही विनाशकारी कनकई नदी की धारा अमौर विधानसभा क्षेत्र के लंगड़ाटोली में परिवर्तित हो कर धात में मिल रही है , जिससे बाढ़ के समय कनकई के नये तांडव की आशंका बलबती होने लगे हैं।

अख्तरुल इमान
फोटो – विधायक अख्तरूल ईमान ने जताई चिंता

उन्होंने बताया कि नये रूट पर चल पड़ी कनकई नदी की परिवर्तित धारा ने तेजी से कटावलीला प्रारंभ कर दिया है जिससे भयाकुल हुई स्थानीय जनता ने बचाव के मद्देनजर निजी खर्च और श्रमदान से अमौर के अधान्ग और गेरैया में बचावकार्य शुरू कर दिया है । और , अगर , नये रूट से कनकई का उफान बढ़ेगा तो ज्ञानडोभ , लालटोली , हरिपुर सहित कई अन्य गांवों के साथ साथ कई सड़कों और कई पुलों को भी विनाशकारी कनकई नदी लील जाएगी ।

विधायक के अनुसार , मुस्लिम बहुल बायसी अनुमण्डल की लगातार हो रही सरकारी उपेक्षा से दोनो विधानसभा क्षेत्र की जनता संत्रस्त रहती आ रही है।

उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि ये दोनों विधानसभा क्षेत्र पूर्णिया जिले के मानचित्र से बाहर के क्षेत्र ठहरा दिये गए हैं।

विधायक अख्तरूल ईमान के अनुसार , सीमांचल में सबसे अधिक सैलाब का क्षेत्र यही है।

किशनगंज से अररिया तक के 80 किलोमीटर के क्षेत्र में जितनी भी नदियां हैं वे सभी विनाशकारी हैं। जिनमें , डोंक , महानन्दा , मैची , छोटी कनकई , बूढ़ी कनकई , कनकई के तीनों अलग अलग स्वरूप सहित अलग से रतुआ , बकड़ा , दास , परमान और पनार जैसी भी नदियां हैं।

विधायक अख्तरूल ईमान के अनुसार , इस बार की संभावित बाढ़ का खतरा अमौर विधानसभा क्षेत्र के 12 पंचायतों पर मंडरा रहा है और दो पुलों के अस्तित्व के मिटने का भी खतरा नजर आ रहा है।

उन्होंने कहा कि खतरे सिर पर आकर मंडराने लगे हैं तो सरकारी अफसरों के दौरे प्रारंभ हो गए हैं।                   

एमआइएम विधायक अख्तरूल ईमान ने कटाक्ष किया कि जल संसाधन और निस्सरण विभाग के अधिकारियों के दौरे ” अंधेरे में चमकते हुए जुगनू की तरह नजर आ रहे हैं क्योंकि लोग समझने लगे कि चिराग जल रहा है।

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