कोरोना काल में सरकारी अव्यवस्था पर एमआइएम की चुप्पी

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पूर्व कांग्रेस विधायक जलील मस्तान(अमौर) और युवा राजद के प्रदेश महासचिव शाहनवाज (बायसी) ने साधा निशाना

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फोटो – अब्दुल जलील मस्तान : अमौर के पूर्व कांग्रेस विधायक एवं शाहनवाज : बायसी के राजद नेता

सीमांचल ( अशोक कुमार ) ।

पूर्णिया जिले के अमौर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व कांग्रेस विधायक अब्दुल ज़लील मस्तान और बायसी विधानसभा क्षेत्र के राजद नेता शाहनवाज ने सीमांचल के एमआइएम विधायकों की लापरवाही पूर्ण कार्यशैली पर ऐतराज जताया है और कई सवालें खड़े कर दिये हैं।

अपने अपने क्षेत्रों में चर्चित रहने वाले महागठबंधन के इन दोनों नेताओं ने कहा है कि एनडीए गठबंधन की भाजपा वाली केंद्रीय सरकार के सीएए एनआरसी कानून का डर दिखाकर मुस्लिम बहुल सीमांचल पूर्णिया प्रमंडल के पूर्णिया , किशनगंज , अररिया जिलों से एमआइएम के पांच विधायकों ने बीते विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ दल जदयू सहित राजद और कांग्रेस को भी हराकर जीत हासिल की तो सीमांचल की जनता को लगा था कि उनके क्षेत्र के लोगों के साथ अबतक विभिन्न राजनीतिक दलों के द्वारा मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति के तहत  ठगी की राजनीति जो की जाती रही थीं , उसका बदला चुकाने में एमआइएम जैसी राजनीतिक दल का साथ उपयोगी साबित होगा।

लेकिन , एमआइएम की जीत के साथ ही सीमांचल की जनता इस मामले में अब स्वयं को ठगा सा महसूस करने लगीं है।

क्योंकि , जनता को चुनावी राजनीति के क्षेत्र में जो सब्ज़ बाग एमआइएम के निर्वाचित पांचों विधायकों के सिरमौर विधायक सह विधानसभा में पार्टी के नेता और पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष ज़नाब अख्तरूल ईमान ने घूम घूम कर चुनाव के दौरान दिखाया था वह सब अभी तक हवा हवाई ही साबित हुआ है और इस कोरोना काल में विपक्ष की भूमिका से बेखबर होकर विल्कुल चुप्पी साधे रहने से उनकी भावी राजनीति पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं ।

कांग्रेस के पूर्व “अमौर विधायक अब्दुल जलील मस्तान” और राजद के सबल युवा राजद संगठन के प्रदेश महासचिव “शाहनवाज” ने आश्चर्य व्यक्त किया है कि एमआइएम के ये प्रदेश नेता न तो कोरोना की जंग में जारी सरकारी अव्यवस्था पर कुछ बोल रहे हैं और न ही सरकार से उन पैसों का हिसाब मांगने की हिम्मत दिखा रहे हैं जो पैसे सीमांचल के सांसदों और विधायकों की फण्ड से कोरोना से जनता के बचाव का उपाय करने के लिए पीएम केअर के नाम पर वसूल लिये गये थे।

उन्होंने कहा कि आज कल इंटरनेट के जमाने की सोशल मीडिया का युग है और रह रह कर हरेक तरह की खबरों से जनता अवगत हो रही है।

इस कारण सीमांचल की जनता पूरी तरह से इस बात से अवगत है कि उनके जनप्रतिनिधियों की कोष से भारी भरकम राशियों की वसूली पीएम केअर के नाम पर वसूल ली गई थी ।

लेकिन , वर्तमान कोरोना लॉक डाउन के दौरान ऑक्सीजन सिलेण्डरों और हॉस्पिटलों में बेडों के निरंतर हो रहे अभाव को देखकर सीमांचल की जनता उक्त पैसों का हिसाब मांगना अब जरूरी समझ रही है ।

इसी क्रम में सीमांचल की जनता कोरोना से बचाव की दिशा में एमआइएम के पांचों विधायकों की गतिविधियों का भी हिसाब मांगने पर आमादा है।

इन नेताओं ने कहा कि ऐसी स्थिति शायद इसलिए उत्पन्न होती दीख रही है कि कोरोना के दूसरी पारी के अटैक के दौरान एनडीए भाजपा की सरकारों ने बड़ी ही चालाकी पूर्वक जनता की जान को सांसत में डालते हुए बड़े पैमाने पर ऑक्सीजन के अभाव की राजनीति शुरू कर दी है।

लेकिन ,  एमआइएम के सदन नेता की चुप्पी बरकरार दीख रही है ।

एमआइएम के बिहार सुप्रीमो की उक्त चुप्पी को अब वही जनता आड़े हाथ ले रही है कि आखिर भविष्य की किस राजनीति को साधने के लिए एमआइएम के बिहार सिरमौर की चुप्पी बिहार में बरकरार  है।

कांग्रेस और राजद के उपरोक्त महागठबंधन नेताओं ने ताज्जुब व्यक्त किया है कि एमआइएम के विधायकों की टीम को साथ लेकर एमआइएम के प्रदेश सिरमौर ने जिस तीब्र गति से सीमांचल की बाढ़ और कटाव  की  त्रासदियों को खत्म कराने के लिए बिहार की राजधानी पटना को शुरुआती दिनों में झंकझोरने का काम किया था , उस मद मे भी फिलबक्त इन सबों की शिथिलता  ही उजागर होे रही है।

स्मरणीय है कि सीमांचल का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल क्षेत्र किशनगंज संसदीय क्षेत्र है , जिसमें किशनगंज जिले के साथ साथ पूर्णिया जिले का सम्पूर्ण पूर्वी भाग भी मुस्लिम बहुल दो विधानसभा क्षेत्रों के साथ शामिल है। इसी परिसीमन के कारण किशनगंज  संसदीय क्षेत्र का स्वरूप बिहार के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल क्षेत्र के रूप में स्थापित है।

जिसके राजनैतिक फायदे एमआइएम को हांसिल हुए हैं।लेकिन , जनता की समझ के विपरीत इस पार्टी की ओर से वर्तमान परिस्थितियों के बीच किसी तरह की कोई हलचल नहीं दीख रही है तो जनता चिंतन करने लगी है कि पिछले विधानसभा चुनाव में उनके द्वारा किए गए चुनावी राजनीति के फैसले कहीं गलत तो नहीं हो गए हैं।

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