एएमयू किशनगंज के पीछे केन्द्र सरकार की सुनियोजित साजिश

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जोकीहाट की जिलापार्षद गुलशन आरा के आरोप सरकार तुरंत दूसरी जगह उपलब्ध करा दे एएमयु की किशनगंज शाखा को

एएमयू किशनगंज शाखा के स्वीकृत फण्ड को रोकने के पीछे केन्द्र सरकार की सुनियोजित साजिश

जोकीहाट की जिलापार्षद गुलशन आरा के आरोप, कहा – बिहार सरकार तुरंत दूसरी जगह उपलब्ध करा दे एएमयु की किशनगंज शाखा को

सीमांचल / जोकीहाट ( अशोक कुमार ) ।

लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए रोक दी गई लेकिन 12 दिनों से लोकसभा परिसर स्थित गांधी जी की प्रतिमा की शरण में जाकर एएमयू की किशनगंज शाखा के लिए वर्षों पूर्व स्वीकृत फण्ड को रिलीज करने की मांग करनेवाले किशनगंज के कांग्रेस सांसद डॉ जावेद आज़ाद को कोई जबाब नहीं मिला।

केन्द्र सरकार के आदेश पर बिहार के किशनगंज जिला मुख्यालय में ही स्थापित किशनगंज की एएमयू की शाखा के लिए केन्द्र की सरकार ने शाखा की स्थापना के समय में ही 136 करोड़ की राशि की स्वीकृति दी थी लेकिन वर्ष 2013 से अभी तक में उक्त शाखा को उक्त स्वीकृत 136 करोड़ की राशि में से महज़ 10 करोड़ की राशि ही हांसिल हुई है।

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शेष 126 करोड़ की राशि ( फण्ड ) के लिए किशनगंज सहित सम्पूर्ण सीमांचल के नेताओं व जनप्रतिनिधियों को सड़क से संसद तक गुहार लगानी पड़ रही है लेकिन उनकी उक्त गुहार को सुनने की दिलचस्पी न तो केंद्रीय मंत्रियों में दीख रही है और न ही केंद्रीय सरकार में।

इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए जोकीहाट क्षेत्र की लोकप्रिय समाज सेविका सह जिलापार्षद गुलशन आरा ने आशंका जताई है कि बड़ी ही सुनियोजित तरीके से केन्द्र की वर्तमान सरकार ने बिहार के किशनगंज में स्थापित एएमयू की शाखा के अस्तित्व को खतरे में डालने की कोशिशें प्रारंभ कर रखीं हैं और बिहार की सरकार भी केन्द्र की सरकार की ऐसी साजिश में सहयोगी बनती दिखाई दे रही है।

उन्होंने इस क्रम में सवाल खड़े किये हैं कि अगर एनजीटी या क्लीन गंगा की ओर से किशनगंज की एएमयू शाखा के भवन निर्माण पर महानन्दा नदी के प्रदूषित होने की आशंका जता कर रोक लगाने का काम किया गया है तो बिहार की सरकार को चाहिए कि उक्त जगह के बदले दूसरी जगह एएमयू की किशनगंज शाखा को तुरंत उपलब्ध करा दे।

जिलापार्षद गुलशन आरा ने कहा है कि एएमयू के लिए स्वीकृत फण्ड को सुनियोजित राजनीतिक साजिश के तहत अब तक रिलीज़ नहीं किया जा रहा है जो सीमांचल वासियों के लिए बहुत ही चिंतनीय है।

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