जमुई में फरोग-ए-उर्दू सेमिनार एवं मुशायरा का आयोजन

0
cyz
फरोग-ए-उर्दू-सेमिनार-मुशायरा
फोटो – फरोग-ए-उर्दू सेमिनार एवं मुशायरा में आढ़ा से भावी जिला परिषद् उमीदवार शाहनवाज़ , चन्द्रदीप से मो शमीम की भागीदारी

ये हिन्दी तो बचपन से उर्दू की सहेली है…..

आओ हम भी पढ़े, तुम भी पढ़ो, अब अंगूठा लगाना गवारा नहीं …

●             उर्दू जवान को सीखना हम सभी का दायित्व है

●             फरोग-एक-उर्दू सेमिनार एवं मुशायरा का हुआ आयोजन

●             जिला उर्दू नामा किताब का भी हुआा विमोचन

-बिहार मंथन डेस्क-

जमुई।शहर के झाझा बस स्टैंड के समीप मौजूद शुक्रदास भवन के सभागार में फरोग-ए-उर्दू सेमिनार एवं मुशायरा का आयोजन किया गया।सेमिनार का उदघाटन डीएम अवनीश कुमार सिंह, डीडीसी आरिफ अहसन, एसडीओ प्रतिभा रानी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

वहीं सेमिनार एवं मुशायर कार्यक्रम की अध्यक्षता वरीय अधिवक्ता मासूम अहमद ने की जबकि मंच का संचालन इरशाद जखरवी के द्वारा किया गया। इस अवसर पर डीएम श्री सिंह ने कहा कि उर्दू इस देश की मिट्टी में पैदा हुई है।

इस मुल्क के गंगा-जमनी तहजीव का इतिहास पेश करती है।उर्दू मोहब्बत की जवान है।वहीं डीडीसी आरिफ अहसन ने कहा कि उर्दू का अमीर खुशरू से लेकर अब तक के इतिहास के जंग-ए-आजादी में उर्दू की ही देन है।

उर्दू को तकनीक में किया जाए। वहीं भाषा जिन्दा रहती है जो रोजगार की भाषा रहती है। उन्होंने कहा कि सरकार के द्वारा उर्दू शिक्षक की बहाली की गयी है इसलिए शिक्षकों को भी उर्दू पर ध्यान देना चाहिए।

मो.जाफर इमाम मलिक ने कहा कि उर्दू अवाम की जुबान है। जमुई उर्दू का हब है।हर जिले की अपेक्षा जमुई में उर्दू बोलने की काफी तदाद है।

वहीं सदर बीडीओ पुरूषोत्तम त्रिवेदी ने कहा कि उर्दू जवान को सीखना हम सभी का दायित्व है। उर्दू-हिन्दी की सगी बहन है।उर्दू इस देश की मिट्टी में पैदा हुई है।

इस मुल्क के गंगा-जमनी तहजीब का इतिहास पेश करती है।वहीं डीटीओ कुमार अनुज ने कहा कि ये मोहब्बत की जवान है।

ये मुल्क के आंदोलन की जवान है।वहीं अधिकारियों ने कहा कि आम लोग अब उर्दू में भी अपना आवेदन जिले के किसी भी कार्यालय में दे सकते है।दिए गए आवेदन का जबाव भी उर्दू में ही दिया जाएगा।

उन्होंने लोगों से अपील किया कि उर्दू के प्रचार-प्रसार करें ताकि उर्दू हर घर में पहुंच सके। वहीं सेमिनार में डीएम, डीडीसी, एसडीएम, बीडीओ सहित अन्य अधिकारियों द्वारा जिला उर्दू नामा किताब का भी विमोचन किया गया। 

जमुई-में -फरोग-ए-उर्दू-गुलाम-सरवर
फोटो – जमुई में फरोग-ए-उर्दू सेमिनार में जमुई के वरिष्ट सहाफी गुलाम सरवर को सम्मान मिलते हुए

कई राज्य के शायरों ने कार्यक्रम में की शिरकत :

फरोग-ए-उर्दू सेमिनार एवं मुशायरा में कई राज्य के शायरों ने शिरकत करते हुए अपनी-अपनी प्रस्तुति पेश की। शायर मो.इरशाद खान ने आओ हम भी पढ़े, आओ तुम भी पढ़ो, अब अंगूठा लगाना गवारा नहीं… ने प्रस्तुत कर खूब ताली बटोरी।

वहीं धनबाद के सैय्यद इसराफी ने कहा कि वहीं नगमा रहेगा,नगमा साजी को बदल देंगे,मुसल्ला रहने देंगे,बस नमाजी को बदल देंगे,रानीगंज के हसमत अली हसमत ने कहा कि तंग दस्ती को छुपाने में खल्ल पड़ता है,सामने घर के मेरे ताज महल पड़ता है।

सिकंदरा के मो.फिरोज खान ने कहा कि खुशबू अगर चाहिए तो गुलाब हमें बोना होगा,खुद बन जाएं पारस तो हर लोहा सोना होगा।कवयित्री प्रियंका तिवारी ने भारत के गौरवशाली इतिहास तथा पुरातन संस्कारों में आ रहे बदलाव  को रेखांकित करते हुए सिसक रही मां भारती, सिसक रही मां भारती”  शीर्षक से काव्य पाठ किया।

जो थी जन-जन की भाषा,  सियासत की भाषा बना दिया।और बदले तो  कौम से जोड़ा।सहम गई अभिव्यक्ति।सिसक रही मां भारती,सिसक रही मां भारती।

इस मुशायरा के सबसे कम उम्र के बाल कलाकार वेदांत राज जो अभी मात्र 12 वर्ष का है उसने अपनी छोटी सी कविता से पूरे महफिल को मंत्रमुग्ध कर दिया।

उसने बताया कि मैं उर्दू नहीं जानता हूं किंतु मेरे पापा ने हिंदी उर्दू डिक्शनरी लाया और उसमें जो मैंने शब्द देखें वह शब्द हम लोग प्रतिदिन अपने बोलचाल की भाषा में प्रयोग करते हैं।

उर्दू के कुछ शब्दों को आम बोलचाल की भाषा में या कविता के रूप में प्रयोग किया जाए तो सही अभिव्यक्ति होती है। कभी फूलों की तरह मत जीना जिस दिन खिलोगे,टूट कर बिखर जाओगे।

जीना है तो पत्थर की तरह जियो,अगर तराशे गए तो खुदा बन जाओगे।धनबाद के बसंत जोशी ने कहा कि सारी जवा से अच्छी उर्दू मेरी जवा है,उर्दू मेरा जहां है,उर्दू ही मेरी जान है।

नशा, दहेज और हाकिम की खामोशी की सबब, जेलों में रो रही है ये मासूम जिंदगी। उर्दू से दोस्ती का मजा पा रहा हूं मैं, मंजिल की तरक्की पर चढ़ा जा रहा हूं आदि शायरी को लोगों ने खूब सराहा।

वहीं अर्चना दिव्या,अमान जखीरवी,अनीसा साबरी, आलम अंजुम, मंजू कुमारी इशरत, यासीन साकिब, शकील अहमद शकील आदि ने भी अपनी-अपनी शायरी सुनाकर लोगों को कार्यक्रम में जमे रहने पर मजबूर कर दिया।

शायरों ने कहा कि ये गालिब व तुलसी की आगोश में खेली है,ये हिन्दी तो बचपन से उर्दू की सहेली है ने लोगों को झुमने को विवश कर दिया।

इन लोगों ने सेमिनार को किया संबोधित :

सेमिनार को मौलाना जियाउल रसूल गफ्फारी, डा.एसएन झा, हकीम गजाली अनवर हेलाल, मास्टर आयुब अंसारी सहित कई लोगों ने अपने-अपने विचार रखे। वहीं सेमिनार में भारी संख्या में उर्दूदान मौजूद थे।

Leave A Reply

Your email address will not be published.