पूर्व जदयू विधायक नौशाद आलम, श्री प्रसाद महतों बने जदयू के जिलाध्यक्ष

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किशनगंज जदयू के जिलाध्यक्ष पद से नवाजे गए पूर्व मंत्री सह ठाकुरगंज के पूर्व जदयू विधायक नौशाद आलम

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फोटो – पूर्णिया जिला जदयू के जिलाध्यक्ष श्री प्रसाद महतों एवं किशनगंज जदयू के जिलाध्यक्ष पद से नवाजे गए पूर्व जदयू विधायक नौशाद आलम

लेकिन , उठ रहे हैं सवाल कि एमआइएम की गिरफ्त से किशनगंज को मुक्त कराने की क्षमता अब किसमे है, सुरजापुरी विरादरी की राजनीति करने के लिए जदयू ने सुरजापुरी के हाथ सौंपा संगठन का नेतृत्व, पच्छमाहा को कर दिया निराश, लेकिन अब किशनगंज का बहुसंख्यक समुदाय जदयू से तभी सटेगा जब जदयू भाजपा से हटेगा

सीमांचल ( अशोक कुमार )।

जदयू की प्रदेश कमिटी ने किशनगंज जिला जदयू के जिलाध्यक्ष पद पर बिहार सरकार के पूर्व मंत्री सह ठाकुरगंज के पूर्व जदयू विधायक नौशाद आलम को मनोनीत किया है।

नौशाद आलम किशनगंज जिले की बहुसंख्यक आबादी  सुरजापुरी मुस्लिम बिरादरी से आते हैं ।

इससे पूर्व जदयू की बागडोर किशनगंज जिले में जदयू संगठन के भीष्म पितामह कहे जाने वाले बुलंद अख्तर हाशमी के हाथों में थी जो किशनगंज जिले में बसे पच्छमाहा समाज से आते हैं।

किशनगंज जिले की बहुतायत सुरजापुरी मुस्लिम आबादी के मद्देनजर किसी भी गैर सुरजापुरी बिरादरी के नेता की उम्मीदवारी किसी कीमत पर उचित नहीं मानी जाती है ,

इसलिए , किशनगंज जिले के संगठन का नेतृत्व पच्छमाहा समाज के नेता के हाथों में पहले से सौंपा जाता रहा था लेकिन इस बार जदयू ने संगठन का नेतृत्व भी किशनगंज जिले में सुरजापुरी मुस्लिम बिरादरी के नेता के हाथ में ही सौंप कर पच्छमाहा को राजद और कांग्रेस की तरह ही साइड कर दिया।

पच्छमाहा समाज के लगभग 60–70 हजार लोग किशनगंज में बसे हुए हैं जो वोटर के रूप में भले ही ताकतवर नहीं हैं लेकिन राजनीतिक क्रियाकलापों में महारथ हांसिल रखते हैं और वाक्पटुता व नेतृत्व की  बेबाक क्षमता से परिपूर्ण माने जाते रहे हैं।लेकिन इस बार वे साइड कर दिये गए हैं।

बहरहाल , 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के एक दिन पहले 25 जनवरी को बिहार प्रदेश जनता दल यू के नवमनोनीत प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने बिहार के 41 जिलों के जिलाध्यक्षों का मनोनयन किया ।

जिसमें अधिकांश जिलों की कमान बतौर जिलाध्यक्ष पूर्व मंत्री व पूर्व विधायक को सौंपी गई है।

मुस्लिम बहुल सीमांचल के अररिया में आशिष कुमार पटेल को दोबारा अध्यक्ष पद पर मनोनीत किया गया है तो कटिहार जिलाध्यक्ष के रूप में शमिश इकबाल को मनोनीत किया गया।

लेकिन , पूर्णिया जिला जदयू के जिलाध्यक्ष के पद पर श्री प्रसाद महतों को और किशनगंज जिला जदयू के जिलाध्यक्ष पद पर पूर्व मंत्री नौशाद आलम का मनोनयन किया गया है।

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फोटो – पूर्णिया जिला जदयू के जिलाध्यक्ष श्री प्रसाद महतों जिलाध्यक्ष पद से नवाजे गए पूर्व जदयू विधायक नौशाद आलम

जाहिर सी बात है कि गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर जदयू के जिलाध्यक्षों के पद पर हुए इस ताजातरीन मनोनयन ने सीमांचल की जदयू की राजनीति में एक ओर गणतंत्र दिवस के उत्साह को बढ़ा दिया ।

तो , दूसरी ओर , बताया जाता है कि पूर्णिया और खासकर किशनगंज के लिए हुए इस तरह के नये मनोनयन ने विरोधी दलों को चिंतित करने का काम भी कर दिया है।

पूर्णिया में इससे पूर्व ग्रामीण क्षेत्र के जिलाध्यक्ष शम्भु मंडल थे , जो धमदाहा विधानसभा क्षेत्र की जदयू विधायक लेशी सिंह के खासमखास कहे जाते थे। लेकिन , उनके उक्त पद पर रहते हुए शहर में जदयू की चकाचौंध वाधित नजर आती थी।

इसलिए इस बार शहर से ही जिलाध्यक्ष पद की भरपाई करके जदयू की रौनक लौटाने का काम किया गया है ।

नवमनोनीत जदयू जिलाध्यक्ष श्री प्रसाद महतों पूर्णिया नगर निगम के 2002 से अबतक लगातार वार्ड पार्षद निर्वाचित होते आ रहे हैं और पूर्व में वह जदयू के जिला किसान प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष रहे हैं , फिर , बाद में वह जदयू के महानगर अध्यक्ष पद पर भी शुशोभित रह चुके हैं।लेकिन ,   वह रूपौली विधानसभा क्षेत्र की जदयू विधायक बीमा भारती के खासमखास बताये जाते हैं।

नये संगठनात्मक प्रक्रिया के तहत प्रदेश जदयू ने जिले में स्थापित जदयू के विभिन्न प्रकोष्ठों को समाप्त कर एक जिलाध्यक्ष के नेतृत्व के अंतर्गत ही सबको पुरानी परंपरा के तहत समाहित कर दिया  है , ताकि , संगठन  सम्पूर्ण मजबूती से एक ही धारा में प्रवाहित हो सके और कहीं से किसी किंतु परन्तु की गुंजाइश नहीं रह सके।

वैसे , बिता विधानसभा चुनाव भी इस बात का गवाह है कि पूर्णिया जिले में जदयू अपनी जगहों पर पूर्व की भांति ही आजतक मजबूत बनी हुई है। जिले में इस दल के दो विधायक आज भी स्थापित हैं ।

लेकिन , इस संदर्भ में किशनगंज जिले की चर्चा यहां पर इसलिए अहम हो जाती है क्योंकि एक अरसे बाद बीते विधानसभा चुनाव में किशनगंज जिले से जदयू का अस्तित्व समाप्त हुआ है।

जिले की दो सीटों पर लगातार वर्चस्व कायम रखती आयी जदयू को बीते विधानसभा चुनाव में दोनों ही सीटों से हाथ धोने पड़े हैं।

जिसका दंश सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ही झेलना पड़ रहा है , इस बात को कदापि झुठलाया नहीं जा सकता है।

पूर्व जदयू जिलाध्यक्ष बुलंद अख्तर हाशमी को हटाकर सीधे पूर्व मंत्री नौशाद आलम की किशनगंज जदयू जिलाध्यक्ष पद पर की गई ताजपोशी अर्थात मनोनयन से कुछ ऐसा ही एहसास दिलाती जदयू की प्रदेश कमिटी ने किशनगंज जिला जदयू के जिलाध्यक्ष पद पर बिहार सरकार के पूर्व मंत्री सह ठाकुरगंज के पूर्व जदयू विधायक नौशाद आलम को मनोनीत किया है।

नौशाद आलम किशनगंज जिले की बहुसंख्यक आबादी सुरजापुरी मुस्लिम बिरादरी से आते हैं ।

इससे पूर्व जदयू की बागडोर किशनगंज जिले में जदयू संगठन के भीष्म पितामह कहे जाने वाले  बुलंद अख्तर हाशमी के हाथों में थी जो किशनगंज जिले में बसे पच्छमाहा समाज से आते हैं।

किशनगंज जिले की सुरजापुरी मुस्लिम आबादी के मद्देनजर किसी भी गैर सुरजापुरी बिरादरी के नेता की उम्मीदवारी किसी कीमत पर उचित नहीं मानी जाती है , इसलिए , किशनगंज जिले के संगठन का नेतृत्व पच्छमाहा समाज के नेता के हाथों में पहले से सौंपा जाता रहा था लेकिन इस बार जदयू ने संगठन का नेतृत्व भी किशनगंज जिले में सुरजापुरी मुस्लिम बिरादरी के नेता के हाथ में ही सौंप कर पच्छमाहा को राजद और कांग्रेस की तरह ही साइड कर दिया।

बहरहाल , 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के एक दिन पहले 25 जनवरी को बिहार प्रदेश जनता दल यू के नवमनोनीत प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने बिहार के 41 जिलों के जिलाध्यक्षों का मनोनयन किया ।

इस क्रम में सीमांचल के अररिया में आशिष कुमार पटेल को दोबारा अध्यक्ष पद पर मनोनीत किया गया है तो कटिहार जिलाध्यक्ष के रूप में शमिश इकबाल को मनोनीत किया गया।

लेकिन , पूर्णिया जिला जदयू के जिलाध्यक्ष के पद पर श्री प्रसाद महतों को और किशनगंज जिला जदयू के जिलाध्यक्ष पद पर पूर्व मंत्री नौशाद आलम का मनोनयन किया गया है।

किशनगंज जिले की दो सीटों पर लगातार वर्चस्व कायम रखती आयी जदयू को बीते विधानसभा चुनाव में दोनों ही सीटों से हाथ धोने पड़े हैं

जिसका दंश सीधे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ही झेलना पड़ रहा है , इस बात को कदापि झुठलाया नहीं जा सकता है।

पूर्व जदयू जिलाध्यक्ष बुलंद अख्तर हाशमी को हटाकर सीधे पूर्व मंत्री नौशाद आलम की किशनगंज जदयू जिलाध्यक्ष पद पर की गई ताजपोशी अर्थात मनोनयन से कुछ ऐसा ही एहसास होता नजर आता है। नजर आता है।

जदयू की प्रदेश कमिटी के द्वारा राज्य के अधिकांश जिले में पूर्व  एमएलए और पूर्व मंत्री के ही हाथों में जदयू के संगठन की कमान सौंपी गयी है और इसके सबसे बड़े कारण शायद यही हैं कि इन जिलाध्यक्षों के द्वारा किसी आयोजन के लिये प्रदेश कमिटी के समक्ष होने वाले खर्च का रोना नहीं रोया जा सकेगा।जो पहले से होता आ रहा था।

पूर्व विधायकों और पूर्व मंत्री पेंशन धारी हैं और वह बख्त जरूरत पर खर्च कर सकते हैं , इसलिए , बड़ी ही चालाकी पूर्वक इस बार अधिकांश जिलों की संगठनात्मक कमान उन्हें सौंपीं गयी है।जिसमे से एक किशनगंज जिला भी है।

लेकिन , किशनगंज जिले को नवनियुक्त जदयू जिलाध्यक्ष नौशाद आलम जदयू को जिले के बड़े जनाधार से जोड़ने में कामयाब हो जाएंगे , इसमें संदेह नजर आता है।

किशनगंज जिले में 60 से 70 हजार की आबादी पच्छमाहा की है। जिसमें से छनकर नेताओं के रूप में सामने आए पच्छमाहा की राजनीतिक तीरंदाजी और बेबाक़ी का किशनगंज में कोई जोड़ा नहीं माना जा सका है।

सुरजापुरी बिरादरी भले ही लाखों की तायदाद में हैं लेकिन राजनैतिक कौशल की उनमें कमीं रही है और उनके वोट बैंक को धार देने का काम पच्छमाहा नेतागण ही सदैव करते आये हैं।

जदयू के पूर्व किशनगंज जिलाध्यक्ष बुलन्द अख्तर हांसमी ऐसे ही पच्छमाहा नेता थे।

लेकिन , अब तो किशनगंज जिले में जदयू के जिला संगठन का नेतृत्व सुरजापुरी बिरादरी पर ही केंद्रित कर दिया गया है तो आनेवाले समय में खुलासा हो सकेगा कि जदयू के इस कारण कितने जनाधार किशनगंज जिले मे बढ़े।

जानकारों के अनुसार , मुस्लिम बहुल सीमांचल के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल जिले किशनगंज में नीतीश कुमार को वर्तमान बख्त की राजनीति में सबसे बड़ा मुस्लिम हितैषी नेता के रूप में कुछ वर्षों से माना जाता रहा है लेकिन , इस जिले के वोट नीतीश कुमार के पक्ष में नहीं मिल पा रहे हैं।

ऐसा इसलिए हो रहा है कि नीतीश कुमार के राजनैतिक गठबंधन भाजपा के साथ हैं और मुस्लिम बहुल किशनगंज की आबादी इस कारण नीतीश को मानते हुए भी नीतीश की पार्टी जदयू को वोट देने से कतरा जाती है।

कहने का सीधा तात्पर्य यह है कि जबतक नीतीश कुमार के राजनैतिक गठबंधन भाजपा के साथ बरकरार रहेंगे ,तबतक मुस्लिम समाज उन्हें चाहते हुए भी वोटों से वंचित रखेंगे।

ऐसी स्थिति में नौशाद के जिलाध्यक्ष बनने का लाभ जदयू को कितना मिल सकता है , इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

लेकिन , नौशाद के जिलाध्यक्ष बनने के कारण किशनगंज जिले के भाजपाई काफी खुश हो गए हैं।

चर्चा है कि किशनगंज स्थित अररिया , पूर्णिया और किशनगंज के स्थानीय प्राधिकार क्षेत्र के त्रिस्तरीय भाजपा विधानपार्षद डॉ दिलीप जायसवाल को जदयू के नवमनोनीत किशनगंज जिलाध्यक्ष नौशाद आलम का सीधा सहयोग मिलेगा।

चर्चा तो यह भी है कि नौशाद की अबतक की सारी राजनीति का खाका भाजपा विधानपार्षद के द्वारा ही निर्धारित होता रहा है और अब तो और जमकर  होगा।

वैसे , किशनगंज जिले में अब यह चर्चा है कि किशनगंज जिले में जदयू के पैर को अब जमा पाना टेढ़ी खीर बन गया है।

क्योंकि ,  असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एमआइएम ने जिस तरह से किशनगंज जिले के वासियों में नीतीश कुमार सहित कांग्रेस और राजद के नाम पर पूरी तरह से राजनैतिक जहर घोल दिया है , उस जहर के असर से किशनगंज जिले की जनता को उबार पाना मुश्किल ही नहीं वल्कि अब असम्भव हो चुका है।

किशनगंज जिले में फिलबक्त जिस भी दल के जिलाध्यक्ष हैं , वे एमआइएम के नाम की माला जंपने से किशनगंज जिले की जनता को रोक पाने में बुरी तरह से अक्षम और मजबूर हैं , इस बात को झुठलाने की कोई भी कोशिश राजनीति की बेईमानी होगी ।

बताया जाता है कि एमआइएम ने किशनगंज जिले में अपने पाँव को जमाने के लिए किशनगंज जिले के बहुसंख्यक आबादी के युवाओं पर गहन जादू कायम कर दिया है जो अब एमआइएम की सिवा दूसरे दल की नाम तक सुनने को तैयार नहीं हैं।

बताया तो यह भी जाता है कि आने वाले 2024 के लोकसभा चुनाव की फ़तह हांसिल करने के लिए एमआइएम ने ऐसे जादू बिखेरा है और महत्वपूर्ण बात यह भी है कि आने वाले लोकसभा चुनाव की जीत को पक्की करने की तैयारी में अभी से ही एमआइएम लग गई है।

क्योंकि , किशनगंज संसदीय क्षेत्र के 6 विधानसभा क्षेत्रों में से 4 विधानसभा क्षेत्र पर एमआइएम का कब्ज़ा बरकरार हुआ है।

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