सीमांचल में AIMIM की कट्टरपंथी राजनीति उखाड़ फेकने को सक्रिय हुए युवा राजद

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सीमांचल में एमआइएम की जातिवादी कट्टरपंथी राजनीति की जड़ें कुरेदने के लिए सक्रिय हुआ युवा राजद

युवा राजद के प्रदेश महासचिव शाहनवाज ने कहा कि सीमांचल की परम्परागत गंगा जमुनी तहजीब की धज्जियां उड़ा कर एमआइएम ने उठाया चुनावी फायदा

राजद कांग्रेस के प्रभाव वाले सीमांचल में कट्टरपंथी राजनीति राजद को बर्दाश्त नहीं

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फोटो – राजद कांग्रेस के प्रभाव वाले सीमांचल में कट्टरपंथी राजनीति राजद को बर्दाश्त नहीं

सीमांचल ( अशोक कुमार ) ।

सीमांचल की पांच विधानसभा सीटों पर काबिज हुई एमआइएम को सांगठनिक रूप से कमजोर करने के लिए युवा राजद का सांगठनिक टीम पुरजोर तरीके से सीमांचल में सक्रिय हो गया है

और दावा किया जा रहा है कि मुस्लिम कट्टरपंथी राजनीतिक दल का स्वरूप धारण कर सीमांचल के युवाओं में जातीय भावनाओं को भड़काकर स्थापित हुई  एमआइएम की सांगठनिक क्षमता को चूर चूर करके राजद का व्यापक एवं ठोस जनाधार सीमांचल में बहुत जल्द ही नये सिरे से स्थापित कर लिया जायेगा।

बिहार प्रदेश युवा राजद के नवमनोनीत प्रदेश महासचिव एवं बायसी विधानसभा क्षेत्र के उभरते हुए युवा राजद के नेता शाहनवाज आलम ने उपरोक्त जानकारी इस संवाददाता को दी है।

युवा राजद के प्रदेश महासचिव शाहनवाज ने कहा कि सीमांचल की ऐतिहासिक गंगा जमुनी तहजीब की धज्जियां उड़ाते हुए एमआइएम ने चुनावी फायदे उठाने के लिए सीमांचल के सर्वाधिक बड़े मुस्लिम बहुल क्षेत्र किशनगंज संसदीय क्षेत्र में मुस्लिम वर्ग के युवाओं में इस कदर कट्टरपंथ की दुषित हवा का संचार कर दिया है

कि सीमांचल की परम्परागत गंगा जमुनी तहजीब का बंटाधार हो गया है और यहां के बहुसंख्यक आबादी के युवा एमआइएम के बहकावे में पड़कर अब माय समीकरण की परंपरागत राजनीति की धज्जियां उड़ाने पर आमादा होते नजर आ रहे हैं। जिसके कारण सीमांचल के इस राजद और कांग्रेस के परम्परागत प्रभाव वाले क्षेत्र में एनडीए गठबंधन की भाजपा , जदयू की सहयोगी आरएसएस , विद्यार्थी परिषद व विश्वहिंदू परिषद के सांगठनिक उत्साह बलबती होने लगे हैं।

युवा राजद के प्रदेश नेता शाहनवाज आलम ने इस संवाददाता से बातचीत के क्रम में भारी आश्चर्य व्यक्त किया कि एमआइएम हैदराबाद से लेकर बिहार के सीमांचल तक मे सेक्युलर दलों से चुनावी गठबंधन के लिए घूम घूम कर हल्ला हसरातें चुनावों के दौरान मचाती आयी है लेकिन आज तक उसके कहीं कोई गठबंधन नजर नहीं आये ।

उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी ताज्जुब की बात तो यह है कि एमआइएम अबतक महज़ हैदराबाद लोकसभा क्षेत्र तक की ही चुनावी राजनीति करती रही है लेकिन वह वहां भी हैदराबाद लोकसभा क्षेत्र की 7 विधानसभा क्षेत्र में से एक सीट को भाजपा के लिए ही छोड़कर सिर्फ 6 सीटों पर ही अपने उम्मीदवारों को उतारने का काम करती आयी है।

उन्होंने बताया कि वह एक सीट गौशमहल से बीजेपी के एमएलए टी राजा सिंह को चुनाव लड़ने के लिए एमआइएम छोड़ती आयी है जो एमआइएम की रहस्यमयी चुनावी राजनीति की परतें खोलने के लिए पुख्ता सबूत है।

युवा राजद के प्रदेश महासचिव सह बायसी विधानसभा क्षेत्र के राजद नेता शाहनवाज के अनुसार ,  119 सीटों वाले तेलंगाना राज्य के विधानसभा में सिर्फ 7 सीटें ही जीतती आनेवाली एमआइएम पर सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है

कि आखिर किस राजनीतिक सोंच के तहत तेलंगाना में के सी आर की टी आर एस के साथ प्रत्येक चुनाव में एमआइएम दोस्ताना संघर्ष करती आ रही है लेकिन उससे चुनावी गठबंधन नहीं करती है।

लेकिन , ताज्जुब की बात है कि बिहार में चुनाव के बक्त तेजस्वी यादव से गठबंधन का हल्ला मचाया था लेकिन किया नहीं था और वही एमआइएम अब पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव को लेकर ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी से गठबंधन का गुलाबा उड़ाती फिर रही है

और संदेह व्यक्त किया जा रहा है कि शायद बंगाल में भी वह इसी प्रकार से कुछ मुस्लिम बहुल विधानसभा क्षेत्र में युवाओं को जात पात की गोलबंदी में फंसाकर अपने एकाध सीट का अस्तित्व कायम कर ले।

हालांकि , एमआइएम की ऐसी नीति को उत्तरप्रदेश और झारखंड में पूर्व में ही जोरदार तरीके का झटका लग चुका है।

राजद के युवा नेता शाहनवाज ने बताया कि एमआइएम की ऐसी राजनीति के कारण ही बिहार में राजद कांग्रेस वाली महागठबंधन की सरकार नहीं बन पायी , लिहाजा , राजद और युवा राजद की सक्रिय टीमों ने सीमांचल से एमआइएम को खदेड़ भगाने के लिए अभी से ही जोरदार अभियान चलाना शुरू कर दिया है।

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