बायो माइनिंग पद्धति से लीगेसी वेस्ट का होगा निस्तारण

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बैरिया में मशीनों का अधिष्ठापन जारी, दो हफ्ते के भीतर शुरू होगा कार्य

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फोटो – पटना में होगा बायो माइनिंग पद्धति से लीगेसी वेस्ट का होगा निस्तारण

सनोवर खान

पटना, 16 जनवरी 2021। पटना नगर निगम द्वारा लीगेसी वेस्ट के निस्तारण के लिए बायो माइनिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

रामाचक बैरिया में पिछले 10-12 वर्षों से जमे कचरे के पहाड़ को पूरी तरह से निपटाने के लिए निगम द्वारा कुल 10 ट्रॉमेल मशीनें लगाई जा रही हैं।

साथ ही कचरे को गलाने के लिए बायो रीमीडियेशन का कार्य भी जारी है। कार्य प्रगति की समीक्षा हेतु नगर आयुक्त महोदय श्री हिमांशु शर्मा द्वारा परियोजना स्थल का निरीक्षण किया गया।

लीगेसी वेस्ट निस्तारण की आवश्यकता

विदित है कि रामाचक बैरिया में एक दशक में कुल 12 लाख मिट्रिक टन कचरा जमा हो चुका है। वर्षों पुराने कचरे से हानिकारक मिथेन गैस का उत्सर्जन एवं लीचेट का रिसाव हो रहा है।

इससे ना केवल आस पास रहने वाले लोगों को परेशानी हो रही है बल्कि पर्यावरण को भी क्षति पहुंच रही है।

रामाचक बैरिया में लगाई जा रही ट्रॉमेल मशीनें

अत: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा लीगेसी वेस्ट के निस्तारण के लिए जारी की गई गाइडलाइन का अनुपालन करते हुए पटना नगर निगम द्वारा बायो माइनिंग की पद्धति अपनाई जा रही है।

इस कार्य हेतु रामाचक बैरिया में कुल 10 ट्रॉमेल मशीनें लगाई जा रही हैं। इन मशीनों की सहायता से कचरे के ढेर से प्लास्टिक, बालू, मेटल, लकड़ी, गिट्टी ईंट-पत्थर, शीशा, कागज, मिट्टी, आदि अलग-अलग किया जाएगा।

फ्यूल के रूप में इस्तेमाल होगा कचरा

ट्रॉमेल मशीनों द्वारा कचरे से अलग किए गए मिट्टी का इस्तेमाल रोड आदि निर्माण में किया जाएगा। वहीं अन्य ज्वलनशील पदार्थ जैसे लकड़ी, कागज, प्लास्टिक इत्यादी को निटवर्ती फैक्ट्री भेजा जाएगा जहां कचरा रिफ्यूज डिराइव फ्यूल (RDF) यानी कचरे से प्राप्त होने वाले ईंधन के रूप में पुन: प्रयोग में लाया जाएगा।

एक साल में पूरी होगी परियोजना

प्रत्येक ट्रॉमेल मशीन द्वारा प्रतिदिन लगभग 600 टन कचरा अलग-अलग किया जाएगा। इस तरह लीगेसी वेस्ट के संपूर्ण निस्तारण का कार्य साल भर के भीतर पूर्ण कर लिया जाएगा।
परियोजना से शहरवासियों को होंगे फायदे

परियोजना पूर्ण होने पर कुल 30 एकड़ भूमि प्राप्त होगी जहां अन्य जनुपयोगी परियोजना पर कार्य किया जाएगा। लीगेसी वेस्ट से निकलने वाले हानिकारक ग्रीनहाउस गैस एवं लीचेट के रिसाव से भी निजात मिलेगी। कचरे से निकलने वाले मीथेन गैस से जहां पर्यावरण दूषित होता है

और आम जन की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, वहीं लीचेट रिसाव से बदबू की समस्या एवं भूमि की उर्वता भी प्रभावित होती है।

परियोजना के माध्यम से खाद तैयार होगा, मिट्टी का प्रयोग निर्माण कार्य में होगा एवं फैक्ट्री आदि में ईंधन हेतु आरडीएफ को बढ़ावा मिलेगा जिससे लंबे अंतराल में पर्यावरण पर अनुकूल प्रभाव पड़ेगा और पटना स्वच्छ और सुंदर शहर के रूप में विकसित होगा।

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