उर्दू दिवस के रूप में मनाई गई स्व0 गुलाम सरवर कि जयंती

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फुलवारीशरीफ (प्रवेज आलम)

बिहार विधानसभा के पुर्व अध्यक्ष स्वर्गीय गुलाम सरवर की जयंती के अवसर पर फुलवारीशरीफ के नया टोला स्थित राजद कार्यालय मंें स्व0 गुलाम सरवर के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई।

पुर्व सीएम जीतन राम मांझी ने यह घोषण कि थी बिहार में गुलाम सरवर के जन्मदिन को उर्दू दिवस के रूप में मनाया जाएगा और बिहार की द्वितीय राजभाषा उर्दू है।

उर्दू साहित्य के विकास में स्व0 गुलाम सरवर साहब के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है। राजद नेता  सलाउद्दीन मंसुरी ने कहा कि आज प्रदेश में उर्दू को दूसरी सरकारी भाषा का दर्जा दिलाने में स्व0 गुलाम सरवर कि बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई वहीं कौसर खान ने कहा कि स्व0 गुलाम सरवर ने लोगों की शिक्षा और बेहतर स्वास्थ के लिए हमेशा काम किया ।

इस मौके पर देव मुनि, अशोक यादव, इकबाल अहमद समेत अन्य लोग मौजुद थे।

कौन थे स्वर्गीय गुलाम सरवर और लोग उनहें क्यों याद करते है-

स्वर्गीय गुलाम सरवर साहब के जन्मदिन 10 जनवरी को उर्दू दिवस के नाम से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2008 से सरकारी जयंती मनाने के रूप में मनाने की शुरुआत की ।

गुलाम सरवर का जन्म 10 जनवरी 1926 को बेगूसराय जिला में हुआ था उनके पिता का नाम स्वर्गीय शेख अब्दुल हमीद था।

उन्होंने 1967 में एक नारा दिया उर्दू के विकास के लिए जो कार्य करेगा मुसलमान उसी को वोट देगा । मदरसा शिक्षा बोर्ड एवं वक्फ कमेटी की सिफारिशों पर शोषित वर्गों के मुसलमानों की शैक्षिक एवं आर्थिक स्थिति में सुधार लाना एवं इन्हें देश के मुख्यधारा में जोड़ना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

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