डा0 कुरियन का जन्म दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

डा0 कुरियन का जन्म दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया

डा0 वर्गीस कुरियन को ‘‘भारत-रत्न’’ दिया जाये- श्री संजय कुमार

फुलवारीशरीफ (प्रवेज आलम)

डा0 वर्गीस कुरियन के जन्म दिन को पूरे देश में राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। पटना डेयरी प्रोजेक्ट, फुलवारीशरीफ, पटना के प्रांगण में पटना डेयरी प्रोजेक्ट के अध्यक्ष श्री संजय कुमार, प्रबंध निदेशक श्री श्रीनारायण ठाकुर, निदेशक मंडल सदस्य श्री बासुकीनाथ सिंह एवं संघ के पदाधिकारियों / कर्मचारियों द्वारा डा0 कुरियन की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके जन्म दिवस को बड़े धुम-धाम से राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के रूप में मनाया गया।

साथ ही हाजीपुर डेयरी, हाजीपुर में भी माननीय अध्यक्ष श्री संजय कुमार, निदेशक मंडल के सदस्यगण एवं दुग्ध उत्पादक किसान बन्धुओं के द्वारा डा0 कुरियन का जन्म दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इसके साथ ही संघ से संबद्ध शेखपुरा जिले में भी डा0 कुरियन का जन्मदिन दुग्ध उत्पादकों तथा पदाधिकारियों / कर्मचारियों द्वारा मनाया गया।

      संघ के अध्यक्ष श्री संजय कुमार द्वारा उपस्थित निदेशक मंडल के सदस्यों एवं पदाधिकारी / कर्मचारियों को संबोधित करते हुए बताया गया कि डा0 कुरियन के कार्यो के लिए उन्हें पद्मश्री एवं पद्मविभुषण से अलंकृत किया गया है।

इसके अतिरिक्त उन्हें कई विशवविद्यालयों द्वारा डाॅक्टरेट की उपाधि से भी सम्मानित किया गया है। उन्होंने श्वेत क्रांति की शुरूआत 1949 में गुजरात के आनंद से किया जोकि आज आनंद पद्धति के नाम से पूरे देश में जाना जाता है। कार्यक्रम में डा0 वर्गीस कुरियन को ‘‘भारत-रत्न’’ देने की मांग दुग्ध उत्पादकों द्वारा की गई।

प्रबंध निदेशक श्री श्रीनारायण ठाकुर ने अपने संबोधन में बताया कि ष्वेत क्रांति के जनक डा0 कुरियन के दुरगामी सोच के फलस्वरूप आज भारतवर्ष पूरे विष्व का सबसे ज्यादा दुग्ध उत्पादक देश के रूप में जाना जाता है। उनके दिशा-निर्देश में सहकारिता के माध्यम से ष्वेत क्रांति में जो प्रगति भारतवर्ष में हुआ है, उसके फलस्वरूप भारत दुनिया में दुग्ध उत्पादन में शीर्ष पर है।

पटना डेयरी प्रोजेक्ट से डा0 कुरियन का विशेष लगाव था एवं डा0 कुरियन पटना डेयरी प्रोजेक्ट के अध्यक्ष के रूप में वर्ष 1981 से 1987 तक कार्यरत थे। उन्ही का देन है कि उनके बताए गए कदमों पर चलकर बिहार के लाखों-लाख दुग्ध उत्पादक घर बैठे अपने दूध उत्पाद का बाजार आसानी से कर पा रहे हैं। प्रतिदिन करोड़ों रूपये का भुगतान किसानों को सहकारिता के माध्यम से किया जा रहा है।