पत्रकारिता पर हमला महाराष्ट्र में नही कश्मीर में हुआ है

अर्नब को 8 दिन में ही बेल, कश्मीर के पत्रकार आसिफ सुल्तान के केस में 806 दिनों के बाद भी श्रीनगर सेंट्रल जेल में बंदी है।

पत्रकार-आसिफ-सुल्तान
फोटो – पत्रकार आसिफ सुल्तान

बिहार मंथन न्यूज़ डेस्क

ब्लिक टीवी के संपादक अर्नब गोस्वामी को बेल देने के मामले में सेशंस कोर्ट के फैसले का भी इंतजार नहीं किया गया। उन्हें आठ दिनों में जमानत मिल गई थी, पर जम्मू और कश्मीर के एक पत्रकार के केस में 15 महीने बाद पहली सुनवाई हुई।

अंग्रेजी अखबार ‘The Telegraph’ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला आसिफ सुल्तान से जुड़ा है, जो ‘Kashmir Narrator’ मैग्जीन के रिपोर्टर हैं। फिलहाल वह घाटी की सबसे बड़ी जेल में हैं।

आसिफ़ सुल्तान कश्मीर के पत्रकार है, 806 दिनों से जेल में बंद है, 7 दिन तक जेल में रहने वाले अर्नब गोस्वामी पर मेहरबान अदालत को इन तस्वीरों को नही भूलना चाहिए, पत्रकारिता पर हमला मुंबई में नही कश्मीर में हुआ है,

मुंबई के जिस व्यक्ति को पत्रकार मान लिया वो पत्रकार नही क्योंकि उसकी उसने आरएसएस, बीजेपी के नेताओं के पायजामे में नाड़ा डालने के लिए क़लम थामी हुई है और आसिफ़ सुल्तान व सिद्दीक़ कप्पन ने सच दिखाने के लिए क़लम थाम पत्रकारिता साबित की है,

लेकिन सुप्रीम कोर्ट को इस मुल्क़ में सिर्फ़ अर्नब ही एक ऐसा व्यक्ति दिखा जिस पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगा था लेक़िन उसके बाद भी उसे रियायत दे लोकतंत्र का हवाला देकर जमानत दे दिया गया ।

आसिफ़ सुल्तान पर आतंकवादियों की मदद करने का आरोप लगा कश्मीर पुलिस ने 27 अगस्त 2018 को गिरफ्तार कर लिया है, और आसिफ़ पर गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम (UAPA) लगा जेल में डाल दिया,

आसिफ़ के संपादक ने कहा कि पुलिस ने पूछताक़ में आसिफ़ से मुखबिर बनने के लिए कहा लेकिन आसिफ़ ने पुलिस का खबरी बनने से इनकार किया तो उसे जेल भेज दिया गया,

इन तस्वीरों को देखिए, जज साहब जल्दी चश्मा निकाले और गौर से देखे ये इस तस्वीर में आसिफ़ की बेटी अरीबा आपसे अपने बाबा (आसिफ़) को आज़ाद करने की मांग कर रही है किंतु आप इस बच्ची इस पत्रकार को न्याय न दे सके इसीलिए आसिफ़ 806 दिनों के बाद भी श्रीनगर सेंट्रल जेल में बंदी है।

हाथरस कांड को कवर करने जा रहे केरल की मलयालम वेबसाइट के पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन को यूपी पुलिस ने गिरफ्तार करके दंगे कराने की प्लांनिग का आरोप लगा UAPA व देशद्रोह लगा कप्पन समेत उसके 3 साथियों कप्पन को भी जेल में डाल दिया,

कप्पन का परिवार सुप्रीम कोर्ट गया लेकिन जज साहब उन्हें इलाहाबाद हाइकोर्ट भेज देये और कहा कि पहले वहां जाइए हम डाक के द्वारा आर्डर भेज रहे है उसकी फैमिली इलाहाबाद हाईकोर्ट में डाक ढूंढती रही लेकिन 4 सप्ताह तक डाक नही मिली,

अब कप्पन को 1 महीने से ज़्यादा जेल में हो गया है। लेकिन सरकार को इस देश की जेलों मे बंद पत्रकार, छात्र, एक्टिविस्ट नही सिर्फ़ एक गुण्डा व्यक्ति दिखा जिसको पत्रकारिता की आड़ में सरकार से संरक्षण देकर जेल से रिहा कर दिया गया है।

गोस्वामी को बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम बेल मिली थी, जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में आठ दिन बिताने पड़े थे। वहीं, आसिफ के मामले में फिलहाल वह दोषी नहीं किए गए हैं। फिर भी वह सलाखों के पीछे 800 से अधिक दिन काट चुके हैं।

टॉप कोर्ट ने अर्णब के केस की सुनवाई के दौरान निजी स्वतंत्रता की अहमियत का हवाला दिया था।
उधर, सुल्तान के मामले में पहली सुनवाई (पांच अगस्त, 2019 के बाद) पिछले सोमवार को हुई थी। यह 15 महीनों से अधिक के वक्त के बाद हुई।

यह जानकारी अंग्रेजी अखबार को आसिफ के पिता मोहम्मद सुल्तान ने दी। सोमवार को पत्नी उम्म अरीबा ने ट्वीट किया था- मेरे पति ने उसके (आजादी) लिए कीमत चुका दी। उनके परिवार ने भी कीमत अदा की। बूढ़े मां-बाप और छोटे-छोटे बच्चों ने भी। उन्हें अब तो मुक्त कर दिया जाना चाहिए।