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असदुद्दीन-ओवैसी-शाहनवाज़ -अमौर -में

एमआइएम की चुनावी सभा में मरहूम सीमांचल गांधी तस्लीमुद्दीन की स्तुतिगान

सीमांचल में जदयू ,राजद ,कांग्रेस की राहों में अटकाये रोड़े, एमआइएम की चुनावी सभा में मरहूम सीमांचल गांधी तस्लीमुद्दीन की स्तुतिगान कर ओबैसी ने सीमांचल कब्जाने की नीतियों का किया खुलासा

फोटो – अमौर की जनसभा में ओवैसी के साथ शाहनवाज़ ने बिताये कुछ छन

सीमांचल (विशाल/पिन्टू/विकास)

बिहार विधानसभा चुनाव के आलोक में एमआइएम की चुनावी राजनीति का आखेट स्थल बनें सीमांचल की धरती पर कदम रखते ही एआईएमआईएम के राष्ट्रीय सुप्रीमो की पहली सिंह गर्जना सीमांचल के गांधी के रूप में चर्चित नेता व पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वर्गीय तस्लीमुद्दीन के परिवार में राजनीतिक फूट डालने वाले बिहार की पार्टी राजद के खिलाफ हुई

और उन्होंने सीधा सवाल खड़े किया कि यह राजद की कैसी राजनीति है कि एक ही परिवार के जिस बेटे को सांसद रहते हुए जनता ने 2019 के संसदीय आम चुनाव में नकार दिया , उसी के लिए उसी परिवार के सीटिंग राजद विधायक बेटे का टिकट काट दिया गया और स्व० तस्लीमुद्दीन के परिवार को राजनीतिक रूप से दो फाड़ कर दिया ।

उन्होंने कहा कि वह उस महान परिवार के छोटे सीटिंग विधायक बेटे की राजद द्वारा की गई उपेक्षा को राजद का घोर राजनीतिक अपराध मानते हैं और इसलिए उन्होंने उस छोटे भाई शाहनवाज को गले लगा कर अपना उम्मीदवार घोषित किया , ताकि , राजनीति का चुनावी मापदंड बदनाम न हो , और शख्स को बाजिब हक मिल सके।

एमआइएम के राष्ट्रीय नेता असदुद्दीन ओवैसी ने इस क्रम में स्व० तस्लीमुद्दीन के पुत्र एवं जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र के एमआइएम प्रत्याशी शाहनवाज आलम को नसीहत देते हुए कहा कि वह भी अपने बाप की तरह ही पार्टी सुप्रीमो से बेबाक रहें

और किसी के समक्ष झुककर नहीं रहें । बहरहाल , असदुद्दीन ओवैसी इस सीमांचल में अपना कैम्प गाड़ दिये हैं और सीमांचल में ज्यादा से ज़्यादा सीटों पर एमआइएम के उम्मीदवारों की जीत के लिए धुंआधार चुनावी अभियान में लग गए हैं।

असदुद्दीन ओवैसी की ठोस चाहत है कि वर्ष 2018 के किशनगंज विधानसभा क्षेत्र के उप चुनाव में एमआइएम को हांसिल हुई किशनगंज सीट पर इस बार भी कब्जा बरकरार रह जाये और अमौर विधानसभा क्षेत्र में पार्टी के उम्मीदवार बने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान जीत दर्ज कर

बिहार विधानसभा के सदन में पार्टी की शंख ध्वनि बन जाएं और जोकीहाट से शाहनवाज की जीत का तमाचा राजद की अपरिपक्व राजनीति के गाल पर लग जाये।

ओबैसी की इस क्रम में जोरदार चाहत बायसी विधानसभा क्षेत्र के एमआइएम प्रत्याशी रूकनुद्दीन की जीत की भी इसलिए है कि इस बहाने ही मुस्लिम बहुल किशनगंज संसदीय क्षेत्र से राजद का पूरा सुपड़ा ही साफ हो जाये।

किशनगंज संसदीय क्षेत्र के छहों विधानसभा क्षेत्र में ओबैसी की पार्टी एमआइएम ने राजद और कांग्रेस की कब्जे वाली सीटों पर चुनिंदा उम्मीदवारों को उतारा है और इसी क्रम में इस पार्टी ने अररिया जिले के चर्चित विधानसभा क्षेत्र जोकीहाट से भी राजद के खिलाफ अपने उम्मीदवार के रूप में राजद उम्मीदवार के सीटिंग विधायक भाई को ही उतार दिया है ।

हालांकि , जोकीहाट की सीट पर एमआइएम की जिस शख्सियत को उतारा गया है वह क्षेत्र में प्रशंसनीय माना जा रहा है।

लेकिन , इस विधानसभा चुनाव में ओबैसी की एमआइएम की ओर से चुनावी शतरंज के पीच पर जो भी मोहरे विछाये गए हैं उससे यही अंदाजा लगाया जा रहा है कि या तो यह दल इस बार कई सीटों पर कब्ज़ा कर सीमांचल की राजनीति का नेतृत्वकर्ता बन जायेगा या यह दल खुद भी डूबेगा और दूसरे को भी ले डूबेगा

अर्थात , कांग्रेस , राजद और जदयू को ऐसा ले डूबेगा कि लंबे समय तक के लिए इन पार्टियों की सीमांचल की ओर ताक-झांक करने की हिम्मत नहीं होगी।

महान कवि की रचना थी कि , ” सोना-सज्जन-साधुजन , टूटे जुड़े सौ बार ; दुर्जन कम्भ कुम्हार के , एकै धक्का में दरार ” ।

जी हां , यह बात उस जोकीहाट के एमआइएम के उस टिकटार्थी पर फिट बैठती है , जिसने चुनावी टिकट के कटने के साथ ही एमआइएम पर टिकट की हेराफेरी करने का आरोप लगाते हुए टिकट के चक्कर में अपने लाखो रूपये खर्च होने का रोना रोते हुए ऑडियो-वीडियो जारी कर एमआइएम की लूट-खसोट वाली चुनावी राजनीति का पर्दाफाश किया अथवा एमआइएम के भयादोहन के लिए साजिशतन सुनियोजित तरीके से ऐसे सवाल का ऑडियो-वीडियो जारी किया।

एक और कहाबत है कि ” हम्माम में सभी नंगे ही होते हैं ” ।

जी हां , आरोप लगाने वाले से ही यह अत्यावश्यक सवाल किया जाय कि इस बार के विधानसभा चुनाव के दौरान क्या जदयू , राजद , कांग्रेस ने उपरोक्त भांति के क्रियाकलाप से स्वयं को अक्षुण्ण रखा है ?

आरोप वाले वीडियो में जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र के एमआइएम के जिस टिकटार्थी के नाम की बारम्बार चर्चा की गई , वह टिकटार्थी दूसरे नम्बर पर थे और पहले नम्बर पर टिकटार्थी रही गुलशन आरा की उक्त वीडियो में कहीं कोई चर्चा इसलिए नहीं रही , क्योंकि , इस महिला एमआइएम नेता गुलशन से पार्टी ने किसी तरह के किसी डील की आकांक्षा व्यक्त नहीं की थी।

जबकि , दूसरी ओर उसी जोकीहाट के एमआइएम टिकटार्थी अब्दुल्ला की चर्चा टिकट को लेकर लाखो में की गई।

जाहिर सी बात है कि एमआइएम की बदनामी के लिए एमआइएम के नेताओं का ही एक ऐसा वर्ग है जो टिकट मिलने पर एमआइएम के प्रति कसीदे पढ़ते और नहीं मिलने पर एमआइएम के सारे पदाधिकारियों को घूसखोर बना दिया

जानकार बताते हैं कि चुनावी भाषण के क्रम में खुले मंच से ओबैसी के द्वारा किये जा रहे स्व० तस्लीमुद्दीन के स्तुतिगान का सीधा मतलब भी यही है कि जिस परिस्थिति के कारण स्व० तस्लीमुद्दीन घराने के राजनीतिक परिजनों ने उनके साथ सम्वन्ध स्थापित किया है

उसके असर के फलस्वरूप स्व० तस्लीमुद्दीन के मानने वाले लोगों का जुड़ाव अंततः अब उनकी एमआइएम से ही होगा और फिर इस सीमांचल में एम आई एम के सामने कोई नहीं रहेगा।