राहुल-गाँधी-ओवैसी-मोदीहैदराबाद में सीमांचल के विजेता एमआइएम विधायकगणBJP के विजय कुमार खेमकाओवैसी से हिगी किस पार्टी को नुक्सानप्रचार के अंतिम दिन प्रत्याशियों ने झोंकी ताकततेजस्वी-यादव-मदन-मोहन-अख्तरुल-इमानठाकुरगंज-के-राजद-विधायक-सऊद-आलम
अख्तरुल-इमान-जोकीहाट-विधायक-शाहनवाज़

सीमांचल का जोकीहाट सीट बनेगा दिलचस्प चुनावी अखाड़ा

सीटिंग विधायक शाहनवाज एमआइएम के झंडे पताके के साथ राजद के प्रत्याशी अपने भाई सरफराज़ से करेंगे मुकाबला, स्व० तस्लीमुद्दीन के इन दोनों बेटों के बीच होने वाले चुनावी घमासान का गवाह बनेगा जोकीहाट

अख्तरुल-इमान-जोकीहाट-विधायक-शाहनवाज़
फोटो – स्व० तस्लीमुद्दीन पुत्र विधायक शाहनवाज आलम जोकीहाट की विधानसभा सीट पर सीटिंग राजद विधायक हैं अब एम आई एम के बैनर तले जोकीहाट से लड़ेगे चुनाव
  • हरेक दलों और नेताओं के साथ साथ मीडिया की निगाह में टिका जोकीहाट
  • राजद ने सीटिंग विधायक रहते शाहनवाज को किया वेटिकट तो जोकीहाट की जनता हुई थी आक्रोशित
  • एमआइएम का मिला सहारा

सीमांचल / जोकीहाट ( अशोक / विशाल ) ।

आखिरकार जोकीहाट के सीटिंग विधायक और सीमांचल गांधी के नाम से राजनीति के मानचित्र पर अपने जीवनकाल में छाये रहने वाले मरहूम राजनेता तस्लीमुद्दीन के छोटे पुत्र शाहनवाज आलम को एआईएमआईएम का उम्मीदवार घोषित कर एआईएमआईएम के बिहार प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व विधायक अख्तरूल ईमान ने एक ओर स्व० तस्लीमुद्दीन की इस चुनाव के दौरान राजद की ओर से भाव विह्वल की गई

आत्मा को शान्ति प्रदान कर दिया गया तो दूसरी ओर एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने इसी बहाने अपने राजनैतिक गुरू जनाब मरहूम तस्लीमुद्दीन को गुरू दक्षिणा भी अर्पित कर दिया।

स्व० तस्लीमुद्दीन पुत्र विधायक शाहनवाज आलम जोकीहाट की विधानसभा सीट पर सीटिंग राजद विधायक हैं लेकिन इस बार राजद का टिकट ऊपर ही ऊपर स्व० तस्लीमुद्दीन के ही बड़े पुत्र और अररिया के पूर्व राजद सांसद  सरफराज़ आलम ने झटक लिया।

इस कारण स्व० तस्लीमुद्दीन के परम्परागत राजनीतिक घराने जोकीहाट में एक ओर जहां दो भाइयों के बीच छिड़ी राजनीतिक जंग के कारण दो भागों में विभक्त हो गए ,

वहीं , छोटे भाई शाहनवाज वेटिकट होने के कारण हांसिये पर धकेले जाने की स्थिति में आते दिखाई देने लगे थे लेकिन ऐनवक्त पर स्व० तस्लीमुद्दीन के ही राजनीतिक शिष्य रह चुके एआईएमआईएम के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने शाहनवाज आलम को सहारा देते हुए शाहनवाज आलम को अंतिम समय में एआईएमआईएम की चुनावी टिकट से नवाज़ने का काम करते हुए जोकीहाट की चुनावी राजनीति को ज़ोरदार उफ़ान पर ला खड़ा किया।

बताया जाता है कि जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र से शाहनवाज आलम को कोई पार्टी टिकट नहीं दे , इसके लिए जोकीहाट से इस बार राजद प्रत्याशी बनाये गए सरफराज़ आलम ने हरेक पार्टी में अपना फरियाद लगा रखा था लेकिन , उसकी उक्त फरियाद की एआईएमआईएम के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने कोई अहमियत नहीं दी और आखरी बेला में उन्होंने एआईएमआईएम के जोकीहाट उम्मीदवार के रूप में शाहनवाज आलम के नाम पर ही मुहर लगा दिया।

अब , इस बार के चुनाव में जनता को फैसला करना होगा कि वह स्व० राजनेता तस्लीमुद्दीन घराने के दोनों बेटों शाहनवाज और सरफराज़ में से किस एक को पसंद करेगी और किसे नापसंद करेगी।

इस कारण जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र का चुनाव इस बार बहुत ही दिलचस्प होने वाला है।

मीडिया से लेकर तमाम राजनीतिक दलों की भी निगाहें इस बार इसी कारण जोकीहाट की विधानसभा सीट पर जमी रहेगी ।

बताया जाता है कि बीते दिन में जोकीहाट की विधानसभा सीट से एआईएमआईएम का टिकट जोकीहाट के एक नेता मुर्शिद आलम को दे दिया गया था तो एआईएमआईएम के जोकीहाट संगठन ने भारी हल्ला-गुल्ला और बबाल मचाना शुरू कर दिया था ।

जिस कारण बीते रात में ही एआईएमआईएम के आलाकमानों के द्वारा मुर्शिद आलम को प्रदत्त वह टिकट रदद् किया गया था।

जोकीहाट की सीट पर उक्त टिकट के दावेदारों गुलशन आरा और मौलाना सालिम चतुर्वेदी ने मौंके की नज़ाकत को भांपते हुए बीते रात में ही एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष के किशनगंज कार्यालय पर धावा बोला था

और दोनों में से ही किसी एक को प्रत्याशी घोषित करने की पुरजोर मांगें की थी।लेकिन , बताया जाता है कि बीती देर रात तक इस सम्वन्ध में कोई निष्कर्ष निकल कर सामने नहीं आया तो वह दोनों दावेदार वापिस जोकीहाट लौट आए थे ।

उसके बाद सोमवार की दोपहर से पहले ही एआईएमआईएम की ओर से घोषणा कर दिया गया कि जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र से एआईएमआईएम के उम्मीदवार शाहनवाज आलम होंगे।

जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र में “शेरनी” के नाम से चर्चित रहने वाली एमआइएम नेता सह जोकीहाट की जिलापार्षद “गुलशन आरा”  के अनुसार , वह पार्टी के इस फ़ैसले पर फिलबक्त किसी भी प्रकार की कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं करेंगी ,

लेकिन,  उन्हें इस बात की काफी खुशी है कि उनकी पार्टी एमआइएम की प्रतिष्ठा धूमिल होने से उस समय बच गई जब पार्टी ने उनलोगों के विरोध के शोर को संज्ञान में लेकर मुर्शिद आलम को प्रदत्त एआईएमआईएम का टिकट रदद् कर दिया।