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धन-दौलत की राजनीति का शिकार हुआ तस्लीमुद्दीन घराने का उगता सितारा विधायक शाहनवाज

तेजस्वी की तरह अख्तरूल भी चौंधियाये धन की चमक में, राजद के सरफराज़ ही होंगे फिर जोकीहाट की पसंद, या इसी बार से टूटेंगे तस्लीमुद्दीन घराने के राजनीतिक तिलिस्म

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फोटो – धन-दौलत की राजनीति का शिकार हुआ तस्लीमुद्दीन घराने का उगता सितारा विधायक शाहनवाज

सीमांचल ( अशोक कुमार ) ।

सीमांचल की राजनीति में जिस जोकीहाट की राजनीति के रीमोट से सीमांचल भर की चुनावी राजनीति की दशा-दिशा तय करने की कई दशकों से परम्परा रही थी , उस जोकीहाट को इस बार पहला झटका लगा कि तस्लीमुद्दीन के घराने से केवल एक सदस्य की ही राजनीति को चलने देने का राजनीतिक आगाज़ राजनीतिक दलों ने सुनियोजित तरीके से शुरू कर दिया है ।

जी हां , यह पहले जमाने की बात थी , जब , स्वयं तस्लीमुद्दीन जहां एक ओर एमपी या एम एल ए हुआ करते थे तो दूसरी ओर उनके ही एक बेटे सरफराज़ भी एमएलए हो जाने से रोके नहीं जा सकते थे।

अब जब तस्लीमुद्दीन नहीं रहे और बेटों ने ही पिता की परंपरा को जीवित रखने का प्रयास करते हुए एक भाई एमपी तो एक भाई एमएलए का खेल शुरू किया तो इस घराने से जुड़े लालू प्रसाद यादव की राजद के नये खेबनहार तेजस्वी यादव ने इस बार पहला काम यही किया कि उस घराने से उगते एक सितारे तस्लीमुद्दीन के छोटे बेटे शाहनवाज पर सीटिंग विधायक रहने के बाबजूद ग्रहण का अंधियारा छा दिया।

तस्लीमुद्दीन के पूर्व सांसद बड़े पुत्र सरफराज़ को राजद ने जोकीहाट के विधानसभा चुनाव में राजद के उम्मीदवार के रूप में घोषित कर चौंकाउं संकेत दे दिया कि अब उक्त घराने से मात्र एक को ही अवसर प्रदान किया जाएगा ।

ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि वर्ष 2017 के संसदीय उप चुनाव में स्वर्गीय पिता तस्लीमुद्दीन की जगह उनके पुत्र सरफराज़ सांसद निर्वाचित हुए थे और उसके कारण जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र में हुए उप चुनाव में स्व० तस्लीमुद्दीन के ही छोटे पुत्र शाहनवाज एमएलए निर्वाचित हो गए थे।

लेकिन , जब 2019 के संसदीय आम चुनाव में सरफराज़ की अपनी सीटिंग सीट अररिया से हार हो गई थी तो सरफराज़ ने फिर से अपने गृह विधानसभा क्षेत्र जोकीहाट पर दिमाग लगाना शुरू कर दिया और उसके परिणाम यही सामने आए कि उन्हें ही जोकीहाट से इस बार का राजद उम्मीदवार घोषित कर दिया गया और वहां के सीटिंग राजद विधायक शाहनवाज को राजद और उनके बड़े भाई ने सुनियोजित तरीके से हांसिये पर धकेल दिया।

खबर है कि राजद ने कांग्रेस की शह पर एमआइएम से मिलकर ऐसी नयी व्यवस्था का आगाज़ किया कि तस्लीमुद्दीन के घराने से एक को ही अब राजनीति करने की छूट दी जाय।

लिहाजा , यहां पर यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि एमआइएम को मेल में लाकर महागठबंधन ने स्वर्गीय तस्लीमुद्दीन घराने से सीटिंग राजद विधायक के रूप में उभरते हुए एक सितारे शाहनवाज को सुनियोजित तरीके से अंधियारे में धकेलने का घिनौना काम किया गया।

एमआइएम की इस मद में की जा रही चर्चा का कारण यह है कि राजद के सीटिंग विधायक रहते हुए जब जोकीहाट की सीट से शाहनवाज को राजद ने ही इस चुनाव में बेटिकट कर दिया तो शाहनवाज ने राजद और अपने कुर्सी लोलुप भाई को सबक सिखाने के लिए एमआइएम के बैनर तले चुनाव मैदान में उतरने की ख्वाहिश तत्क्षण दिखाई थी तो एमआइएम ने हांमी भर दी थी लेकिन , बताया जाता है कि ऐन बक्त पर शाहनवाज के टिकट एमआइएम से भी इसलिए कट गये क्योंकि सरफराज़ की मनाहीं हो गई थी और उक्त सीट पर लाकर खड़े किये गए उम्मीदवार की धन-दौलत की चमक से महागठबंधन से लेकर एमआइएम तक के नेताओं की आंखें चौंधिया गई थी।