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जोकीहाट जिला पार्षद गुलशन आरा

अररिया के जोकीहाट की जिलापार्षद गुलशन आरा के गम्भीर सवाल

सीमांचल की बदहाली व एनआरसी पर अल्पसंख्यक-दलित एकजुटता को वोट में कैश कराने की ताक में लगे कथित सेक्यूलर दलों ने इस बार कितने मुखर उम्मीदवार उतारे ?

गुलशन आरा
फाइल फोटो – गुलशन आरा
  • गुलशन ने जोकीहाट सहित सम्पूर्ण सीमांचल की जनता को किया सावधान
  • कहा सालाना त्रासदी और पेट की भूख के मद्देनजर पलायन की मजबूरी को ध्यान में रखते हुए इस बार करना होगा मतदान

सीमांचल ( अशोक / विशाल ) ।

अल्पसंख्यक बहुल सीमांचल में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर विभिन्न राजनीतिक दलों के द्वारा उम्मीदवारों के चयन में की गई घोर लापरवाही और मनमानी पर अररिया के जोकीहाट क्षेत्र की जिलापार्षद एवं एआईएमआईएम की महिला प्रकोष्ठ की जिलाध्यक्ष गुलशन आरा ने भारी दुःख और ऐतराज जताया है।

उन्होंने कहा है कि मुस्लिम बहुल सीमांचल में मुस्लिम तुष्टीकरण के मद्देनजर एनआरसी व सीएए का मुद्दा उछालकर विभिन्न राजनीतिक दलों ने दलितों-महादलितों-अल्पसंख्यकों को एक जुट किया और नागरिकता कानून के विरोध में इस बार सत्तारूढ़ दल एनडीए गठबंधन की भाजपा-जदयू के खिलाफ वोट डालने का आहवान किया , लेकिन , इसके साथ साथ सीमांचल की विधानसभा सीटों पर कमजोर , मुंह दब्बू , लापरवाह चेहरों को उम्मीदवार बनाया ।

उन्होंने कहा कि इससे साफ जाहिर होता है कि सेक्यूलर राजनीति की आड़ में कुछ राजनीतिक दलों ने अल्पसंख्यक-दलित सुरक्षा के राग अलाप कर ” मुंह में राम – बगल में छूरी ” वाली कहाबत को चरितार्थ करने वाला काम किया है ।

सीमांचल भर में एक मात्र उभरती हुई सबसे ज्यादा बेबाक वक्ता के रूप में पहचान बनाने की ओर तेजी से अग्रसर महिला नेता गुलशन आरा ने सेक्युलरिज्म पर राजनीति की रोटियां सेंकने के प्रयास में लगे सेक्यूलर राजनीतिक दलों के आलाकमानों से सवाल किया है कि वह सीमांचलवासी को जबाब दें कि उन सबों ने भविष्य में उत्पन्न होने वाले एनआरसी के कहर पर धारदार लड़ाइयां लड़ने की क्षमता रखने वाले चेहरों को कितना प्रतिशत तक इस बार के विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया और उनमें से वैसे कितने उम्मीदवार हैं जो इस सीमांचल के ऐतिहासिक अस्तित्व की रक्षा के लिए आने वाले भविष्य में अपने पदों की आहुति देने की क्षमता रखते हैं।

गुलशन आरा ने चिंता जताते हुए कहा कि सीमांचल के वासियों के लिए यह बहुत बड़े दुर्भाग्य की बात है कि मुस्लिम-दलित तुष्टिकरण की राजनीतिक रोटी सेंकने के प्रयास में लगी विभिन्न सेक्यूलर कही जाने वाली राजनीतिक दलों ने जुझारू और संघर्षशील चेहरों को दरकिनार कर मुंह दब्बू चेहरों को इस बार सीमांचल के विधानसभा क्षेत्रों से उम्मीदवार घोषित किया ।

गुलशन आरा ने सीमांचल की राजनीतिक , आर्थिक , सामाजिक , शैक्षणिक बदहाली की ओर तमाम नेताओं का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि आज़ादी के इतने सालों के बाद भी जिस क्षेत्र की भूख को मिटाने का प्रयास करने के लिए परिवार के बच्चे , बड़े से लेकर बूढ़ों तक को पलायन करने की मजबूरी उठानी पड़ती हो और जिस क्षेत्र में बाढ़ और कटाव की सालाना त्रासदी से बर्बादी नियति बनी हुई हो , उस क्षेत्र में आजादी के बाद से अभी तक विचरण करते रहने वाले मक्कार व ठग राजनीतिक दलों के चेहरे अब छुपाये नहीं छुप सकते हैं और सीमांचल की जनता को ऐसे मक्कार राजनीतिक दलों से अब सतर्क रहने की जरूरत आ पड़ी है।

गुलशन आरा ने सम्पूर्ण सीमांचल सहित जोकीहाट की जनता को खास तौर पर सावधान किया है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में सोंच समझ कर मतदान करेंगें , अन्यथा , बदहाली की जो तस्वीर अभी सामने उपस्थित है , उससे कहीं ज्यादा ही भुगतने की नौबत आने वाले समय में उत्पन्न हो सकती है।