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जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र

सीटिंग राजद विधायक सह स्व० तस्लीमुद्दीन के छोटे पुत्र सिटिंग विधायक शाहनवाज की जगह स्व० तस्लीमुद्दीन के ही बड़े पूर्व सांसद पुत्र सरफराज़ को राजद की टिकट देकर राजद आलाकमान ने सीमांचल को चौंकाया

  • तैरने लगे हैं सीमांचल में यह सवाल, धूलधूसरित कर दी गई ऐतिहासिक भारतीय सभ्यता,
  • जिसमें छोटे भाई को प्रेम देने की रही परंपरा, दूसरे अर्थों में राजद आलाकमान की ओर से स्व० तस्लीमुद्दीन के घराने में दो सगे भाइयों के बीच डाल दी गई फूट

सीमांचल ( अशोक कुमार ) ।

जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र में राजद की उम्मीदवारी सरफराज़ को दिये जाने को लेकर राजद पर सीमांचल भर की उंगलियां उठती नजर आ रही है।

लोगबाग सवाल खड़े कर रहे हैं कि राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव ने आखिर क्यों स्वर्गीय राजनेता तस्लीमुद्दीन के घर-परिवार को फोड़ने का काम करते हुए सीटिंग विधायक के रूप में स्थापित तस्लीमुद्दीन के छोटे पुत्र शाहनवाज आलम को छांट कर वहां का उम्मीदवार तस्लीमुद्दीन के ही बड़े पुत्र सरफराज़ आलम को घोषित कर दिया।

लोगों का कहना है कि तस्लीमुद्दीन के जीते जी से ही चार बार सरफराज़ आलम जोकीहाट क्षेत्र से विधायक रहे थे और तस्लीमुद्दीन की मौंत के बाद अररिया संसदीय क्षेत्र के हुए संसदीय उप चुनाव में बतौर राजद प्रत्याशी सांसद निर्वाचित हुए थे । तब उन्होंने जोकीहाट की सीट से इस्तीफ़ा दे दिया था तो उस सीट पर स्व० तस्लीमुद्दीन की पत्नी ने अपने छोटे पुत्र शाहनवाज आलम को प्रोजेक्ट कर शाहनवाज को राजद का उम्मीदवार घोषित कराया था और तब शाहनवाज ने भी भारी मतों से जीत कर विधायक पद हांसिल किया था।

लेकिन , पिछले 2019 के संसदीय आम चुनाव में जब राजद सांसद सरफराज़ आलम भाजपा के प्रदीप सिंह से हार गए और उसके बाद अपनी राजनीतिक बेरोजगारी से ऊबने लगे तो उन्होंने अपने छोटे भाई  जोकीहाट के सीटिंग राजद विधायक शाहनवाज आलम को खिसकाने की जुगत में सारा ताकत लगा दिया कि वह इस बार स्वयं चुनाव लड़कर विधायक हो जाएंगे।

ताज्जुब की बात है कि यह सब उस ऐतिहासिक भारतीय सभ्यता के खिलाफ खुलेआम कर लिया गया , जिस भारतीय सभ्यता में बड़े भाई ( राम ) के द्वारा सबसे छोटे भाई ( लक्ष्मण ) को लाड़-प्यार देने की सभ्यता रही है। घोर ताज्जुब की बात यहां पर तो यह भी देखने को मिली कि राजद के सुप्रीमों पद पर बैठे सादगी और ऐतिहासिक सभ्यता के प्रतीक लालू प्रसाद यादव ने भी इस बात को मुहर लगा दी।

जबकि उसी लालू प्रसाद यादव ने बड़े बेटे तेज प्रताप की जगह तेजस्वी को मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में प्रोजेक्ट कर ऐतिहासिक परंपरा निभाने का ढ़ोल पीटा था।

बहरहाल , जो होना था , वह तो राजद के सुप्रीमों लालू और तेजस्वी ने कर दिखाया।

लेकिन , जोकीहाट से लेकर सम्पूर्ण सीमांचल के लोगों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।

जिस कारण राजद की साख़ पर बट्टा लगता नजर आ रहा है कि आखिर ऐसी क्या परिस्थिति उत्पन्न हो गई थी कि स्व० तस्लीमुद्दीन के घराने से अब एक ही सदस्य को राजद की राजनीति में उभरने का अवसर राजद द्वारा दिया जाएगा।

सूत्र बताते हैं कि जोकीहाट के सीटिंग राजद विधायक सह तस्लीमुद्दीन के छोटे पुत्र शाहनवाज आलम के टिकट को राजद ने कन्फर्म कर दिया था और बाद में सुनियोजित तरीके से शाहनवाज की टिकट को काटकर सरफराज़ के नाम कर दिया गया।

सूत्रों का कहना है कि इस मामले में सुनियोजित राजनैतिक खेल खेले गए हैं और पटना में हाई बोल्टेज ड्रामें भी किये गए हैं।

बहरहाल , अब देखना बांकी यह है कि राजद आलाकमानों की ओर से दो सगे भाइयों के बीच बोए गए फूट कराने वाली इस बीज की उपज कैसी फसल के रूप में जोकीहाट की जनता तस्लीमुद्दीन के घराने को और राजद के आलाकमानों को रिजल्ट के जरिये प्रदान करती है।