टिकट-की-खातिर-उठापटकसिमांचल-में-राजनेताओं-की-श्रृंखलाबद्ध-मौतराजकुमार-चौधरी-रघुवंश-बाबु-को-श्रधांजली-देते
अख्तरुल इमान

सीमांचल में एमआइएम की टिकट के लिये टकटकी लगाए भावी प्रत्याशियों में ऊहापोह की स्थिति

फोटो – फाइल फोटो अख्तरुल इमान पार्टी प्रमुख असदउद्दीन ओवैसी के साथ

सीमांचल ( अशोक कुमार ) ।

बिहार विधानसभा की चुनावी राजनीति की मुख्यधारा में एकायेक पूरी तैयारी के साथ धमक पैदा करके मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले अबतक की सभी पार्टियों के लिए गले की हड्डी बनती  नजर आ रही

एमआइएम की टिकट के इंतज़ार में ऊब रहे नेताओं का एमआइएम नेतृत्व पर सवाल खड़ा होता दिखाई दे रहा है कि टिकट का खुलासा आखिर अब कब होगा।

एमआइएम ने पहले तो विना किसी से गठबंधन किये ही चुनाव में कूदने का ऐलान किया था , फिर बाद में इसने यशवंत सिन्हा की हालिया गठबंधन ” यूनाइटेड डेमोक्रेटिक अलायन्स ” यूडीए से और उसके ही एक सहयोगी  ” समाजवादी जनता दल डी ” से गठबंधन कर लिया ।

सीमांचल में उक्त गठबंधन का कोई प्रभाव एमआइएम के प्रभाव वाले सीटों पर नही दिखा और एमआइएम के भावी उम्मीदवारों ने टकटकी लगाए रखा कि अब टिकट मिलेगी लेकिन फिलहाल भी यह आस संशय में फिर से तब बदल गई जब पार्टी सूत्रों ने फिर एक नया खबर फैलाया कि 6 अक्टूबर को टिकट का ऐलान कर दिया जाएगा ।

लेकिन , 6 अक्टूबर की सुवह से ही फिर दूसरी नयी खबर फैली कि अब एमआइएम और उपेन्द्र कुशवाहा के बीच गठबंधन की बात चल रही है तो चयनित उम्मीदवारों के नामों का खुलासा अब बाद में होगा।

एमआइएम मुख्यालय के सूत्रों के अनुसार , एमआइएम के चुनावी गठबंधन शायद उपेन्द्र कुशवाहा से भी तय किये जा चुके हैं लेकिन एमआइएम सीमांचल की किन किन सीटों पर अपने किन किन चेहरे को बतौर उम्मीदवार घोषित करने जा रही है ,

इस बात की खबर पाने के लिए एमआइएम के टकटकी लगाए भावी प्रत्याशियों में ऊहापोह की स्थिति कायम नजर आ रहे हैं।

कहने के तातपर्य हैं कि इस सबके बीच उम्मीदवारों की झुंझलाहट तो यह भी रही है कि इस चुनावी सेटिंग के बीच बारम्बार सर्वे के रिपोर्ट आने के नाम पर भी लंबी टालमटोल की राजनीति एमआइएम नेतृत्व की ओर से की जाती रही थीं।

एमआइएम पार्टी के खास सूत्रों के अनुसार , एमआइएम की चुनावी लक्ष्य में सीमांचल के ही खास खास विधानसभा क्षेत्र हैं लेकिन इनमें से अररिया की अररिया और जोकीहाट विधानसभा क्षेत्र हैं तो पूर्णिया के बायसी ,कसबा , अमौर की विधानसभा सीटें हैं और किशनगंज की चारो विधानसभा क्षेत्र हैं ।

बताया जाता है कि उपरोक्त क्षेत्रों के मुस्लिम समुदाय और दलित समाज में एमआइएम के प्रति दीवानगी की इंतहा है लेकिन ज्यों ज्यों यह पार्टी उम्मीदवार के चेहरे के खुलासे में देर करती जा रही है त्यों त्यों इसके वोटरों को दूसरे राजनीतिक दलों के द्वारा भटकाने का प्रयास किया जाने लगा है ।

8 अक्टूबर को पटना आ रहे असद उद्दिन ओवैसी, कुशवाहा से गठबंधन का करेंगे एलान,50 नहीं 17 सीट पर लड़ेगी मजलिस.