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अमौर को बाढ़ कटाव की त्रासदी से छुटकारा नहीं

डॉ अबू सायम ने कहा कि मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के कारण इन क्षेत्रों की होती रही घोर उपेक्षा

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फोटो – मठवा टोली सिरसी के कटाव लीला
  • अमौर से कथित बुद्धिजीवी कहे जाने वाले चतुर मनहुसों का साया जब तक नहीं हटेगा तब तक अमौर को बाढ़ कटाव की त्रासदी से छुटकारा नहीं
  • सभी दलों की सरकारों ने किये विश्वासघात

सीमांचल ( अशोक / विशाल ) ।

अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र होने के कारण प्रायः सभी तरह की सरकारों में उपेक्षित रही सीमांचल के बायसी अनुमंडल के दोनों विधानसभा क्षेत्र बायसी और अमौर में बाढ़ और कटाव के विनाशलीला पर लगाम लगाने की दिलचस्पी न तो कभी लोकल जनप्रतिनिधियों ने दिखाई और नहीं सरकारी तंत्रों ने।

इस बात का दावा करते हुए एमआइएम के नेता डॉ अबू सायम ने इस संवाददाता को बताया कि तकरीबन तीन महीना पहले उन्होंने अमौर के आसजा क़ब्रिस्तान का निरीक्षण करनेे के दौरान देखा था कि उस वक्त ईद़गाह की दुरी नदी से लगभग आधे किलो मीटर की थी ।

तब उन्होंने ग्रामीणो से अपील किया थां कि सभी लोग मिलकर ब्लाॅक ऑफिस को एप्लीकेशन दें , मगर अफसोस की बात रही कि गांव वालों ने उनकी एक न सुनी और लोकल प्रतिनिधियो के बहकावे में आकर ब्लाॅक जाने से इंकार कर दिया।

लिहाजा आज नतीज़ा सबके सामने है कि सब कुछ कट कर नदी की गर्भ में समा गया ।

डॉ अबू सायम कहते हैं कि अगर वक़्त रहते सरकारी जिम्मेदारों पर दबाव बनाया जाता तो शायद ये दिन देखने नहीं पड़ते।

उन्होंने कई जगह जैसे नग्रा टोला ज्ञांदोव पंचायत, मर्चान टोला धुस्मल पंचायत , मथवाटोली सिरसी पंचायत और सूरजपुर ज्ञानडोव पंचायत ,रमनी व दिगर कई गांव का भी निरीक्षण किया था

मगर अफ़सोस कि यहां नौकर शाही पर भारी अफ़सरशाही की पैठ रही और अफसरशाही काम नहीं करने की धमकी तक दे देता है।

ना जनता की चिंता ना राजनीतिज्ञों का कोई असर! उन्होंने सवाल खड़े किये कि आख़िर कौन है ? जो इन पर लगाम कसे?

आखिर सरकारी मुलाजिम किस की सह पर काम करता है क्यों जनता की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता ?

उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि आपदा प्रबन्धन की टीम सरासर ठगी और बेइमानी कर करोडों की गबन करती जा रही है ।

उन्होंने पूछा कि जब हमेशा से विभाग अवगत रहा है कि इस क्षेत्र में हर साल नदी कटाव एक भीषण समस्या है तो सरकारी तंत्र बरसात के दिनों में बम्बू रॉल जैसे यूजलेस वर्क कर थूक मालिश क्यूं करती है ?

उन्होंने बताया कि दर्ज़नो दरखास्त एस डी ओ साहब, दोनो प्रखण्ड अमौर वैसा के बीडीओ,सी ओ को दिया गया था , मगर टाल मटोल के सिवा कोई हल नहीं निकाला गया।

डॉ अबू सायम के अनुसार , असल में अमौर की जनता ही इतनी बदनसीब और बेबस मजबूर है कि यहां आए तमाम सरकारी अमला को दिमागी लाक्वा मार देता है जिससे यहां की चीख पुकार इन नौकर शाहों को सुनाई ही नहीं देती।

रही सांसद विधायक की तो ये लोग जनता की दुखती नस को पकड़ अपनी राजनीतिक रोटियां हमेशा सैकते रहते है। अगर कोई आवाज़ उठाई जाती है तो उसपर तवज्जह देने के बजाए बहाना बाज़ी और बक्लोली करते रहते हैं ।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इस अल्पसंखयक बहुल सीमांचल को हमेशा नज़र अंदाज़ किया हैं चाहे वो किसी की भी सरकार हो कांग्रेेस बीजेपी जदयू राजद सबने बराबर से सीमांचल को बदहाल किया है ।

जबकि इस क्षेत्र की जनता भी धुव्रीकरण की राजनीति में लिप्त होकर अपने सारे गम गुस्से को हरेक बार भूलने की आदी रही है और अपनी सारी परेशानी का ज़िम्मेदार खुद भी बनकर विकास के नाम सिर्फ आंसु बहाती है ।

उन्होंने अफ़सोस जताया कि कुछ तथाकथित पढ़े लिखे धर्म गुरु एवं बुद्धिजीवियों का मानना है कि अमौर में ऐसा कोई मर्द नहीं जो यहां की जानता का दर्द को समझें ।

जबकि असल में यही लोग पूरे इलाक़े की बदहाली का असल ज़िम्मेदार है जो चंद वक़्त का खाना और चंद पैसों या ज़ाति मुफाद के खातिर पूरे अवाम को गुमराह करते फिरते हैं ।

डॉ अबू सायम ने कहा कि अब देखते है कि अमौर से इन मनहूस सायों की परछाई कब कटती है ।