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देवेन्द्र यादव को मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में परोस कर AIMIM ने धोये कट्टरपंथी के दाग

लेकिन घोषित सीटों से कम पर ही चुनाव लड़ने की बनी नयी नीति से वर्षों से आस लगाए एमआइएम नेताओं की मंशा पर पानी फ़िरने के आसार

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फोटो – एम आई एम सुप्रीमो असदुद्दीन ओवैसी
  • गठबंधन की चुनावी राजनीति में कूदने के बाद देवेन्द्र यादव को मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में परोस कर एमआइएम ने धोये कट्टरपंथी के दाग
  • सीमांचल में भी पनपती दीख रही असमंजस की स्थिति, नेता कार्यकर्ता मानने लगे हैं एमआइएम को अबूझ पहेली

सीमांचल ( अशोक / विशाल ) ।

एमआइएम की चुनावी राजनीति के बीच एमआइएम के द्वारा रह रह कर चले जा रहे चुनावी तुरूप के पत्ते से बिहार की चुनावी राजनीति टिकट बुकिंग के पहले से ही दिलचस्प बनती जा रही है।

सीमांचल से पिछली बिहार विधानसभा के सदन में उप चुनाव की एक बाजी जीत कर उपस्थिति दर्ज करायी एमआइएम के हौंसले सीमांचल से इतने बुलन्द हुए हैं कि इसने इस बार के विधानसभा

चुनाव में बेहतर परफॉर्मेंस दर्शाने के लिए कुछ राजनीतिक दलों के साथ चुनावी गठबंधन भी कर लिए तो अचानक कट्टरपंथी के तगमे से बिहार में नवाज़ी जाने वाली एमआइएम की पहचान सेक्युलर दल में परिणत होने लगे और लगे हाथ जब टिकट के बंटबारे से पहले ही इस पार्टी ने

भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे वर्तमान समाजवादी जनता दल डी के राष्ट्रीय नेता देवेन्द्र यादव को अपनी पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री के मैटेरियल के रूप में जनता के बीच परोस दिया तो यादवों और मुसलमानों की तुष्टिकरण वाली राजनीति को चुनावों में भंजाने वाली अन्य पार्टियों राजद , कांग्रेस के भी जमीन हिल गये।

इस बीच इस संवाददाता की प्रदेश एमआइएम के प्रदेशाध्यक्ष अख्तरूल ईमान से हुई बातचीत से पता चला है कि एमआइएम इस तरह से व्यापक रूप में हाथ पैर मारने के बाबजूद घोषणा से कम सीटों पर ही बिहार विधानसभा चुनाव लड़ेगी।

अर्थात खबर के मूल सार यही बनते हैं कि बिहार में एमआइएम की चुनावी राजनीति फिलबक्त तक एक अबूझ पहेली ही नजर आ रही है।

जिस कारण सीमांचल में ही कई सीटों पर वर्षों से चुनावी तैयारी में लगे नेताओं में असमंजस की स्थिति पैदा होती जा रही है कि अगर उन्हें चुनाव नहीं लड़ने दिया गया तो उनकी वर्षों की मेहनत का क्या होगा।