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नीतीश - मोदी

चुनाव में जदयू के अनमने सहयोग के दंश झेलती भाजपा की चुनावी तैयारी में कोरोना के अड़न्गे

बार बार की शिकस्ती हांसिल करने वाले की पुनः उम्मीदवारी की आशंका से भाजपाइयों में निराशा, प्रत्येक चुनाव में जदयू के अनमने सहयोग के दंश झेलती आयी भाजपा की चुनावी तैयारी में इस बार कोरोना के अड़न्गे

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फोटो – जदयू के अनमने सहयोग के दंश झेलती आयी भाजपा की चुनावी तैयारी

सीमांचल (अशोक /विशाल)। सीमांचल के किशनगंज जिले में भाजपा का अस्तित्व आने वाले विधानसभा चुनाव में भी कायम हो पायेगा कि नहीं , यह महत्वपूर्ण सवाल किशनगंज जिले के भाजपाइयों में फिर उमड़ने घुमड़ने लगा है। किशनगंज जिले में विधानसभा का चुनाव भाजपा दो सीटों पर बहादुरगंज और किशनगंज सदर में लड़ती आयी है लेकिन हर बार शिकस्ती ही मिलती आ रही है।

बहादुरगंज की सीट पर पूर्व विधायक अबध बिहारी सिंह लड़े , फिर वरुण सिंह ने जोर लगाए ,सब निरर्थक सावित हुए। किशनगंज की सदर विधानसभा सीट पर स्वीटी सिंह की कोशिशें तीनो ही बार नाकामयाब रहीं।

इस बार बहादुरगंज से जोर आजमाइश की कोशिश में लगे भाजपा नेता वरूण सिंह कोरोना संक्रमित हो लाचारी में फंस गए हैं तो पार्टी फिर अबध बिहारी सिंह पर ही इस बार के दाव आजमाने की फिराक में है।

किशनगंज की सदर विधानसभा सीट पर भाजपा आलाकमान की नजर में बार बार शिकस्ती हांसिल करने वाली भाजपा की नेता स्वीटी सिंह ही सशक्त उम्मीदवार नजर आ रही हैं।

बांकी भाजपाई नेताओं ने उम्मीदवारी प्राप्ति की आस में उम्र गंवा दी ,लेकिन स्वीटी सिंह के किशनगंज सीट पर अंगद की तरह जमे पांव को उखाड़ पाने में किसी को सफलता नहीं मिली है और कयास लगाये जा रहे हैं कि इस बार भी किशनगंज की सदर विधानसभा सीट पर भाजपा की उम्मीदवारी स्वीटी सिंह को ही मिल सकती है।

बताया जाता है कि इस कारण भाजपा के वैसे नेताओं में निराशा व्याप्त हो रहे हैं जो किशनगंज की सीट से भाजपा की टिकट पर भाग्य आजमाने की मौंके की उम्मीद में अपनी उम्र गंवानें की ओर जा पहुंचे हैं। किशनगंज में भाजपा को लेकर जो चर्चाओं का सिलसिला जारी है उसके अनुसार, एक तो भारतीय जनता पार्टी सीमांचल में लाचार रही ही है , ऊपर से आने वाली विधानसभा चुनाव की तैयारी में इस बार उसे कोरोना का अड़न्गा भी लग रहा है। सीमांचल के किशनगंज जिले में भाजपा की लाचारी जदयू है जो उसके साथ गठबंधन की चुनाव लड़ती जरूर है लेकिन जीत का मार्ग सिर्फ अपनी पार्टी जदयू के लिए ही प्रशस्त करने में लगी रहती है।

भाजपा की खातिर एक दो सीट छोड़ कर जदयू अपने गठबंधन धर्म के कर्तव्य की इतिश्री कर लेती है और भाजपा को उसके हाल पर अकेले चुनाव झेलने के लिए छोड़ कर एक अरसे से अपने दल की जीत पक्की करने में लग जाती रही है।

जिसके परिणामस्वरूप किशनगंज जिले में भाजपा को तभी से लगातार हासिये की राजनीति सहन करने पड़ रहे हैं जबसे भाजपा का राजनैतिक व चुनावी गठबंधन जदयू के साथ हुआ है। जाहिर सी बात है कि भाजपा को उसके हाल पर अकेले चुनाव के दौरान छोड़ने के पीछे का स्पष्ट कारण यही है कि बिहार के सर्वाधिक बड़े मुस्लिम बहुल जिले किशनगंज की जनता उनके उम्मीदवारों को जदयू और जदयू के नेतृत्वकर्ता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सेक्यूलरिटी के मद्देनजर किसी तरह जीत हासिल करा दे।

इस क्रम में नीतीश कुमार ने किशनगंज जिले में प्रायः चुनावों के मौंकों पर भाजपा की उपेक्षा की और ले दे कर गठबंधन प्रोटोकॉल के तहत महज़ कुछ चुनावी सभाएं मात्र ही अबतक कीं । इसलिए , यहां पर यह कहना गलत नहीं है कि सीमांचल के किशनगंज जिले में गठबंधन की चुनावी राजनीति की भंवर में फंसी भाजपा के लिए जदयू ही बड़ा अड़ंगा सावित होता आया है।

इसके अलावा अभी जो बिहार विधानसभा के आम चुनाव की तैयारी शुरू है , उसकी तैयारी किशनगंज में शुरू करने में भी किशनगंज भाजपा को कोरोना का बड़ा अड़न्गा लगता दिखाई दे रहा है। किशनगंज भाजपा के जो भी नेता भाजपा की पटना मीटिंग से लौट कर किशनगंज वापिस आये , वे कोरोना संक्रमित हो कर आये और चुनावी तैयारी की पिक टाइम में होम कोरेन्टीन का दंश झेल रहे हैं।

इससे पूर्व किशनगंज के पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष भी कोरोना संक्रमित हुए थे। तो यहां पर यह कहना भी अतिशयोक्ति नहीं होगा कि किशनगंज जिले में भाजपा की चुनावी तैयारी में न सिर्फ भाजपा की गठबंधन साथी पार्टी जदयू के ही अड़न्गे हैं वल्कि भाजपा  की चुनावी तैयारी में कोरोना के भी अड़न्गे उत्पन्न हो गए हैं तो इस हालात में कहा जा सकता है कि इस बार भी भाजपा के लिए किशनगंज जिला सुकूनदायक नहीं लग रहा है।