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AIMIM की टिकट की मारामारी के बीच भावी लड़ाकुओं में कहीं जदयू को सबक सिखाने की ललक तो कहीं कांग्रेस और राजद के तख्ता पलट के जुनून

  • टिकट की मारामारी में अमौर में अबू सायम और बाबर आजम एक दूसरे की काट में लगे
  • तो बायसी में एमआइएम टिकट के दावेदार पूर्णिया जिलाध्यक्ष के मार्ग में बायसी के पूर्व निर्दल विधायक रूकनुद्दीन आ खड़े हुए
  • ठाकुरगंज से जैनुल आबेदीन के लड़ने की राह बनी
  • तो कोचाधामन से कन्फर्म उम्मीदवार माने जा रहे हैं इजहार असफ़ी
  • और पूर्णिया के कसबा सीट पर भी कंचन देवी के उम्मीदवार बनने की बढ़ी पूरी उम्मीद
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फोटो – एमआइएम के भावी विधानसभा उम्मीदवारों में जीत की ललक

सीमांचल ( अशोक / विशाल ) ।

मुस्लिम बहुल क्षेत्र के रूप में राजनीति के मानचित्र पर चर्चित सीमांचल पूर्णिया प्रमंडल के चारो जिले पूर्णिया , किशनगंज  , कटिहार और अररिया में से किशनगंज जिले के चारो विधानसभा क्षेत्र किशनगंज सदर , कोचाधामन , ठाकुरगंज , बहादुरगंज में और पूर्णिया जिले के तीन विधानसभा क्षेत्र अमौर , बायसी , कसबा में  एमआइएम की उठती आंधी को भांप कर विधानसभा चुनाव लड़ने वाले नेताओं के बीच एमआइएम की टिकट के लिए जो मारामारी शुरू हुई है ,

उससे भले ही एमआइएम के आलाकमानों के सीने चौड़े हो रहे हों  , लेकिन , इसके बीच टिकट की जुगाड़ में एमआइएम के एक नेता के द्वारा दूसरे नेता को लंघी मारने की घटना में एमआइएम के अंदर जो नयी परम्परा शुरू हुई है , उससे , पार्टी की छवि पर तरह तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं।

क्योंकि आपसी लंघीबाजी का शिकार हो कर घायल हो दरकीनारी का दंश झेलने वाले एमआइएम नेताओं में ऐसे नेता भी हैं जो क्षेत्र में एमआइएम के प्रारंभिक दौर से सांगठनिक क्रियाकलापों में लीन रहे थे और ऐन चुनावी बक्त में पार्टी के पदाधिकारियों की अंदरूनी उठापटक का शिकार बनाकर पार्टी से रुख़सत करा दिये गए ।

इस क्रम में ताजा मामला किशनगंज एमआइएम की अरसे से महिला जिलाध्यक्ष रही ” मिसेज़ यूनिवर्स ” की खिताब प्राप्त डॉ तारा स्वेता आर्या का है , जिन्होंने ठाकुरगंज की विधानसभा सीट से एमआइएम की टिकट पर चुनाव लड़ने की महत्वाकांक्षा पाल कर वर्षों जनसंपर्क अभियान चलाया और ठीक चुनावी बक्त में अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निकाल बाहर हुईं ।

अब ठाकुरगंज की सीट से एमआइएम की टिकट पर एमआइएम के नवागन्तुक नेता ज़ैनुल आबेदीन के चुनाव लड़ने की सम्भावना बनी है।

ज़ैनुल आबेदीन को इस बाबत शीघ्रता में एमआइएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान (पूर्व विधायक) ने एमआइएम की सदस्यता ग्रहण कराया और संगठन की मजबूती बनाने के लिए धुंआधार जनसम्पर्क अभियान में निकलने के लिए उन्हें फूल मालाओं से लाद दिया ।

ठाकुरगंज विधानसभा क्षेत्र से एमआइएम के भावी उम्मीदवार के रूप में उभर कर सामने आए नवागन्तुक एमआइएम नेता ज़ैनुल आबेदीन के राजनैतिक व सामाजिक फीडबैक यही हैं कि उन्होंने बरबस निःस्वार्थ रूप से ठाकुरगंज के गरीब गुरबों व मजदूरों की लोकल क्षेत्र में ही नहीं वल्कि उन दूसरे प्रदेशों में भी हर तरह की मदद की है जहां वे गरीब गुरबे रोजगार के लिए ठाकुरगंज विधानसभा क्षेत्र से जाते हैं।

एनडीए गठबंधन की भाजपा जदयू सरकार की एनआरसी सी ए ए कानून की छड़ी से ठाकुरगंज की बहुसंख्यक आबादी में जो भय के वातावरण व्याप्त हैं , उसे एमआइएम के बैनर तले दूर करने के लिए ठाकुरगंज की जनता ने एमआइएम और एमआइएम के भावी उम्मीदवार ज़ैनुल आबेदीन को मील का पत्थर मानना शुरू किया है।

ठाकुरगंज में फिलबक्त सीटिंग विधायक के रूप में भाजपा एनडीए के बैनर तले जदयू से निर्वाचित नौशाद आलम हैं , जिन्हें एनआरसी की कोप की लहर से भस्म करने की तमन्ना एमआइएम से पूरी करने के लिए ठाकुरगंज की जनता बेचैन है।

सीमांचल के किशनगंज जिले की कोचाधामन विधानसभा सीट पर सीटिंग विधायक के रूप में विराजमान भाजपा एनडीए गठबंधन के जदयू विधायक मास्टर मोजाहिद आलम के ऊपर सामत बनकर एमआइएम के बैनर तले चर्चित समाजसेवी और दिग्गज राजनीतिज्ञ हाजी इज़हार असफ़ी क्षेत्र में भावी प्रतिद्वंद्वी बनकर विचरण कर रहे हैं और धुंआधार जनसंपर्क अभियान को सफलतापूर्वक संपन्न करके निश्चिंत हो गए हैं।

कोचाधामन विधानसभा क्षेत्र में हाजी इज़हार असफ़ी अति प्रतिष्ठित जनसेवक के रूप में जानें जाते हैं और इनकी एक और राजनीतिक पहचान यह भी है कि इन्होंने अपने क्षेत्र के बगल की बहादुरगंज विधानसभा सीट पर पूर्व कांग्रेस नेता के रूप में जिस सीटिंग कांग्रेस विधायक तौसीफ़ आलम को लगातार चार बार जिताने का रिकॉर्ड कायम कर रखा है , वह तौसीफ़ आलम इनके दामाद हुए हैं।

लेकिन , स्वयं इज़हार असफ़ी ने सी ए ए और एनआरसी के सवाल पर संसद को झंकझोरनें वाले एमआइएम नेता असदुद्दीन ओवैसी में दिलचस्पी लेने लगे और कांग्रेस को तिलांजलि दे दी।

अब इस प्रगाढ़ राजनीतिज्ञ की सीधी कुदृष्टि कोचाधामन के सीटिंग एनडीए जदयू विधायक मास्टर मोजाहिद पर टिकी है और उसकी इस सीट से रुख़्सती कराने के लिए स्वयं ही एमआइएम की टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।सुविज्ञ सूत्र बताते हैं कि कोचाधामन की विधानसभा सीट से एमआइएम की टिकट पर इज़हार असफ़ी साहब का चुनाव लड़ना लगभग तय है।

लेकिन , बगल के पूर्णिया जिले की अमौर विधानसभा क्षेत्र की सीट पर सीटिंग कांग्रेस विधायक सह पूर्व मंत्री ज़लील मस्तान को एमआइएम की टिकट पर चुनाव में पराजित करने की फुलप्रूफ तैयारी एमआइएम के भावी उम्मीदवारों की भीड़ में से सर्वाधिक शक्तिशाली किसकी है , इसकी परख कराने के लिए एमआइएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने क्षेत्र में एमआइएम के कई पर्यवेक्षकों को उतार दिया है जो वैसे एमआइएम उम्मीदवार को टिकट देने की अनुशंसा करेंगे जो ज़लील मस्तान को धूल चटाते हुए अगली चुनावी बाजी एमआइएम के हिस्से में मारने के दमख़म रखते हैं।

बताया जाता है कि अमौर विधानसभा की सीट पर फिलबक्त एमआइएम के सुयोग्य उम्मीदवार के रूप में दो भावी प्रत्याशियों की चर्चा है।

अमौर के लिए एमआइएम के इन दो भावी उम्मीदवारों में पूर्व से ही चर्चित एक नाम डॉ अबू सायम का है तो दूसरा भी पूर्व से ही चर्चित नाम बाबर आजम का है।

अमौर विधानसभा क्षेत्र में फिलबक्त यही दोनो हस्तियों ने एमआइएम का खौफ़ कांग्रेस के सीटिंग विधायक ज़लील मस्तान में पैदा कर दिया है और कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि बाढ़ की ताजातरीन त्रासदी के बीच हो रहे विधानसभा चुनाव की घड़ी में जनता की परेशानी जो बढ़ी है

उससे विचलित हुई अमौर विधानसभा क्षेत्र की जनता में विकल्प के रूप में एमआइएम की तरजीह बढ़ी है लेकिन , इसमें कामयाबी हासिल होगी भावी उम्मीदवार के चेहरे के आलोक में और जनता के साथ भावी उम्मीदवार की हमदर्दी के आलोक में।

क्षेत्र के सर्वेक्षण के दौरान स्पष्ट हुए हैं कि ज़लील मस्तान सहित अमौर क्षेत्र से अबतक निर्वाचित हुए अन्य कांग्रेसी , भाजपाई , राजद जनप्रतिनिधियों ने कभी भी अमौर की सबसे बड़ी समस्या पुल पुलिये , आवागमन के रास्ते व बाढ़ को लेकर संवेदनशीलता नहीं दिखाई। सारे जनप्रतिनिधियों ने विधायक काल को मौज मस्ती में व्यतीत किया।

ऊपर से अभी एनडीए की सरकारों के द्वारा नागरिकता कानून की व्यवस्था जो की गई है , उससे लड़ने के लिए भी एमआइएम के सिवा कोई और पार्टी सक्षम नहीं नजर आ रहे हैं।

लिहाजा ,एमआइएम की ओर आकर्षित हुई अमौर की जनता का फुलप्रूफ वोट पाने के लायक दोनो में से कौन भावी उम्मीदवार चुनाव के लिए उपयुक्त हैं , इसकी टोह ली जा रही है।

डॉ अबू सायम विशुद्ध एमआइएम के रूप में क्षेत्र मंथन में लगे हैं , पेशे से चिकित्सक और मिजाज पूर्णरूपेण मानवतावादी। बाहर के प्रदेशों में फ़ंसे अमौर विधानसभा क्षेत्र के गरीब गुरबे मजदूरों को बीते लॉक डाउन पीरियड में इन्होंने ही अपना सर्वस्व न्योछावर कर भूखों मरने से बचाया।

क्षेत्र में चल रही बाढ़ की विभीषिका में डूबते धंसते , कटावग्रस्त लोगों के बीच राहत की बारिश की और सरकार और स्थानीय प्रशासन से जनहित में उलझने का काम किया।  एमआइएम के दूसरे सशक्त भावी उम्मीदवार बाबर आजम के पुरानी राजनीतिक व सामाजिक पहचान रही है जो स्वर्गीय सीमांचल गांधी तस्लीमुद्दीन के जमाने से ही है।

बाबर आजम ने राजद की टिकट पर अमौर की सीट से एक बार भाग्य आजमाया था तो वह उस समय  पिछड़ गए थे। कालांतर में बाबर आजम ने अमौर विधानसभा क्षेत्र के वैसा प्रखण्ड के प्रखंड प्रमुख के रूप में भी अपने अस्तित्व बरकरार रखा था तो मुखिया पद पर भी सुशोभित रहे थे।

अमौर विधानसभा क्षेत्र से एमआइएम की टिकट की प्रबल दावेदारी पेश करते हुए बाबर आजम ने भी जनसम्पर्क अभियान चलाया है और इस बात की जानकारी देते हुए बाबर आजम ने समस्त प्रेस मीडिया को सूचित करना शुरू किया है कि वह अगस्त माह के प्रथम सप्ताह के बाद ही एक विशाल पत्रकार सम्मेलन का आयोजन अपने अमौर विधानसभा क्षेत्र में करके तमाम प्रेस मीडिया को इकठ्ठा करेंगे और क्षेत्र की समस्या सहित क्षेत्र के नक्कारा जनप्रतिनिधि की जनता विरोधी लापरवाही का खुलासा करेंगे।

अब देखना है कि अमौर की विधानसभा सीट से किसको लंगोट कसकर मैदान में उतरने की हरी झंडी एमआइएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान की ओर से दिखाई जाएगी।

वैसे अमौर विधानसभा क्षेत्र में एमआइएम की टिकट की मारामारी में लगे नेताओं की एक दूसरे की टांगे खींचने के जो जुनून बढ़ी है , उसके तहत ऐसे नेता भी प्रकाश में आये हैं जो एक नेता की बात को सुनने से सरकारी अधिकारियों को मनाही यह कहकर करते हैं कि उनके कहने पर कटावग्रस्त क्षेत्र में काम करने जाईयेगा तो उनका फील्ड जम जाएगा  इसलिए मत जाइये।अर्थात टिकट की मारामारी में जनता के हित की भी भेंट चढ़ाई जाने लगीं हैं।

बायसी की विधानसभा सीट राजद के सीटिंग विधायक हाजी अब्दुस सुब्हान के कब्जे में है जिसे छीनने की कोशिश में इस बार एमआइएम के बैनर तले एमआइएम के पूर्णिया जिलाध्यक्ष शाहनवाज पूरे दमख़म के साथ इस बार जनसमर्क अभियान में लगे।

लेकिन , जनता के अनुरोध पर एमआइएम के बैनर तले चुनाव लड़ने की ख्वाहिश में बायसी के पूर्व निर्दल विधायक रूकनुद्दीन के भी मधुर संबंध एमआइएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान से स्थापित हो गए।

लिहाजा , एक ओर जहां एमआइएम के जिलाध्यक्ष शाहनवाज ने चुनावी टिकट पाने की होड़ में जीतोड़ कोशिशें जारी कर दी है वहीं दूसरी ओर एमआइएम में रूकनुद्दीन की आहट ने एमआइएम के पूर्व के सभी भावी प्रत्याशियों की नींद हराम कर दी है।

कयास लगाये जा रहे हैं कि टिकट की मारामारी का खेल बायसी की विधानसभा सीट पर देखने लायक होगें और आखरी बेला में रूकनुद्दीन के जरिये ही बायसी से एमआइएम की नैया पार करने के लिए अख्तरूल ईमान के फैसले सार्वजनिक हो जाएंगे।

पूर्णिया जिले की कसबा विधानसभा की सीट पर भी एमआइएम के कुछ ऐसे ही दृश्य उपस्थापित नजर आ रहे हैं , जहां एमआइएम के बैनर तले विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार के रूप में कंचन देवी की सम्भावना को लगातार बल मिलता दिखाई दे रहा है।

बताया जाता है कि एमआइएम की टिकट पर कसबा की सीट से चुनाव लड़ने का हल्ला मचा कर कुछ लोग क्षेत्र में तरह तरह की भ्रांतियां फैला एमआइएम और कंचन देवी की राह में रोड़े अटकाने के प्रयास भी कर रहे हैं लेकिन कंचन अपनी ओर से इस सबकी परवाह किये विना एमआइएम की पथ पर लगातार जनसमपर्क को अंजाम देने पर उतारू हो एमआइएम के पताके लहराने की तैयारी में है।

कंचन देवी कांग्रेस से विमुख हो कर एमआइएम का झण्डा थामी है और उसके प्रण हैं कि वह कसबा की सीट पर आसीन सीटिंग कांग्रेस विधायक आफाक आलम को धूल चटायें विना पूरे चुनाव तक बतौर एमआइएम उम्मीदवार चैन से नहीं बैठेंगी।