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किशनगंज में AIMIM की महिला जिलाध्यक्ष डॉ तारा स्वेता आर्या के पार्टी से निष्कासन पर उपजे कई सवाल

AIMIM पर किशनगंज में उठने लगी उंगलियां

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फोटो – किशनगंज में एमआइएम की नेता महिला जिलाध्यक्ष डॉ तारा स्वेता आर्या का पार्टी से निष्कासन

सीमांचल ( विशाल /पिन्टू / विकास )।

बिहार में विधानसभा चुनाव की घड़ी में कोरोना के आतंक ने जिस तरह से बिहार के परम्परागत चुनावी राजनीति के परिदृश्य को येकायेक शंट करने का काम किया है और उसी श्रृंखला में आ गई बाढ़ की विभीषिका ने जिस तरह अपने आतंक से चुनाव के मैदान में उतरने को लालायित चुनावी पहलवानों के मार्ग को अवरूद्ध करने का काम किया है

ठीक , उसी प्रकार सीमांचल में एमआइएम की व्याप्त हुई लहर से प्रफुल्लित हो गुमान में चूर हुए एमआइएम के किशनगंज जिला संगठन के पदाधिकारी ने एमआइएम के पुराने समय से साथ चलते आ रहे एमआइएम के वैसे नेताओं को दल से निष्कासन का फरमान थमाना शुरू किया है जो एमआइएम की टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी में काफी कुछ गंवाकर एमआइएम के प्रति समर्पित रहते आये हैं।

हम बात किशनगंज जिले की कर रहे हैं ,जहां एमआइएम की महिला प्रकोष्ठ की लोकप्रिय और चर्चित जिलाध्यक्ष डॉ स्वेता आर्या को अचानक सभी पदों से बर्खास्त करते हुए एमआइएम से निष्कासित करने का फरमान एमआइएम के किशनगंज जिलाध्यक्ष इसहाक आलम के द्वारा डॉ स्वेता आर्या के हाथों में थमा दिया गया।

किशनगंज में डॉ स्वेता आर्या एमआइएम की महिला जिलाध्यक्ष के रूप में प्रारंभ से ही सक्रिय थीं और वह किशनगंज जिले के ठाकुरगंज विधानसभा क्षेत्र की सीट से एमआइएम की टिकट पर इस बार का विधानसभा चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर चुकी थी।

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ऐसे में ऐन चुनावी बक्त में उनके निष्कासन के जारी हुए फरमान ने किशनगंज में एमआइएम के महिला विरोधी मिजाज को उजागर कर दिया है। जिस कारण किशनगंज एमआइएम पर सवाल खड़े होने लगे हैं कि पार्टी की जिला कमिटी को एमआइएम की महिला नेता डॉ तारा स्वेता आर्या में जो खामियां अभी नजर आयीं हैं , वो उनमें प्रारम्भिक समय से ही थीं कि नहीं। और अगर पूर्व में भी पार्टी में रहते हुए डॉ स्वेता आर्या की दैनिक गतिविधियां इसी प्रकार की रही थीं तो ऐन चुनाव के बक्त उनके निष्कासन का रहस्य क्या है।

किशनगंज एमआइएम के जिलाध्यक्ष के द्वारा जारी निष्कासन आदेश में बताया गया है कि अनुशासनहीनता और पार्टी सिद्धांतों के विरुद्ध कार्य करने के कारण डॉ स्वेता आर्या की प्राथमिक सदस्यता को रद्द करते हुए किशनगंज जिला महिला प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष पद से पदमुक्त कर पार्टी से निष्कासित किया जाता है।

किशनगंज एमआइएम की महिला जिलाध्यक्ष डॉ स्वेता आर्या के एमआइएम से निष्कासित किये जाने वाले खबर से एमआइएम से जुड़े एक बड़े तबके में भूचाल सा उत्पन्न हो गया है और डॉ स्वेता द्वारा चुनाव के मद्देनजर एमआइएम के लिए सिंचित ठाकुरगंज की राजनीतिक भूमि में भी भूकम्प सा कम्पन महसूस किया जाने लगा है और वहां से भी लगातार सवाल दागे जा रहे हैं कि आखिर में डॉ स्वेता ने ऐसी कौन सी अनुशासनहीनता को दर्शाया जो निष्कासन का जरूरी सबब बन गया।

इस सम्बंध में डॉ स्वेता आर्या के किशनगंज स्थित समर्थकों व प्रशंसकों को भारी एतराज हुआ है।

क्योंकि डॉ स्वेता आर्या किशनगंज की न सिर्फ एक राजनीतिक हस्ती हैं , वल्कि , वह भारतीय संस्कृति और सुंदरता के लिए  ” मिसेज़ इंडिया ” का खिताब जीतने के बाद ” मिसेज़ यूनिवर्स ” के खिताब से भी नवाज़ी जा चुंकी हैं और इस क्रम में उनके रहन सहन और पोशाक की ओर उंगली उठाने की कोई आवश्यकता ही नहीं महसूस की जाती रही है। लेकिन , अब अचानक से पार्टी के जिलास्तरीय नेताओं को डॉ स्वेता में नजर आयी अनुशासनहीनता में भारी राजनीतिक रहस्य  नही तो क्या है।

उनके समर्थकों का स्पष्ट मानना है कि ठाकुरगंज विधानसभा क्षेत्र से उन्हें चुनावी टिकट से वंचित करने के लिए सोंची समझी रणनीति के तहत उनका निष्कासन पार्टी के द्वारा किया गया है जो स्पष्ट रूप में पार्टी के महिला विरोधी नीति को और जातपात की राजनीति को उजागर करता है।