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कोरोना से हुई मौत, 24 घंटे के कठिन परिश्रम के बाद मो० इमरान को किया गया सुपुर्द ए खाक

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फोटो – कोरोना से मौत के 24 घंटे के कठिन परिश्रम के बाद बंगाल के मो० इमरान विशवास को किया गया सुपुर्द ए खाक।

इंसानियत हुई शर्मसार सूफी की नगरी से लेकर बाबा मनीराम अखाड़ा के द्वारी तक किसी ने नहीं दिया दो गज जमीन 24 घंटे के कठिन परिश्रम के बाद मो० इमरान को किया गया सुपुर्द ए खाक।उलझनों और विवादों के साथ कोरोना मृतक मो० इमरान विस्वास को एसडीपीआई नालंदा ने किया दफनाने का काम।

बिहाशरीफ (फ़ैज़ अशरफ) बिहारशरीफ विद्युत विभाग के ठेकेदार मो० इमरान विस्वास जो नादिया बेस्ट बंगाल के रहने वाले थे कल शाम को पावापुरी मेडिकल_कॉलेज में कोरोना के कारण मृर्त्यु हो गयी,

मित्यूपश्चात जब अंतिम संस्कार करने के लिये स्तानीय समाज सेवी  सूफी-संतों की नगरी बिहारशरीफ के बड़ीदरगाह पहुंचे तब वहां के स्थानीय लोगो ने विरोध करना शुरू कर दिया विरोध इतना जबरदस्त था कि कबर खुदने के बाद भी लोगो ने मुहम्मद इमरान को दफन करने नही दिया

फिर एसडीपीआई की टीम ने मृत शरीर को एम्बुलेंस पर लेकर वापिस हो गयी, जिसकी सूचना एसडीपीआई नालंदा के जिला उपाध्यक्ष मुहम्मद मुजाहिद इस्लाम ने बिहार थाना प्रभारी दीपक कुमार तथा SDPO इमरान परवेज को दी और कहा कि अब कल सुबह किसी दूसरे कब्रिस्तान में दफन करने की वयवस्था की जाएगी,

फिर अगले दिन बाबा मणिराम अखाड़ा के समीप भुसट्टा कब्रिस्तान में जब मृतक के साथ पूरी टीम पहुंची तब वहां के कुछ हिन्दू भाइयों ने भी विरोध किया और कबर खुदने के बाद भी जनाजे को दफन नहीं करने दिया

फिर जिला प्रसाशन ने किसी तीसरे जगह की तलाश कर पावापुरी गांव के समीप हरगांमा में अंतिम संस्कार करवाई, जब कुछ समाजसेवी एवं SDPI की टीम वहाँ दफनाने को पहुंची तब गांव के सैकड़ों बजरंगदल एवं आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने कब्रिस्तान को घेर लिया और विरोध करने लगे

खैर किसी तरह से वहां के स्थानी लोगों ने कहा कि मेरा कब्रिस्तान है कोई रोक नही सकता इसमें हमारा अधिकार है तुम्हारा गांव यहाँ से 500 मीटर दूर है तुमलोग को हमारे निजी मामले में हसतक्षेप नहीं करना चाहिए हमलोग के सहमति से हो रहा है आपलोग चले जाओ

तब जाकर वहां किसी तरह मुहम्मद इमरान को दफन किया गया, सबसे बड़ा सवाल ये है कि इनसब के बीच जिला प्रसाशन की इतनी बड़ी लापरवाही क्यूं ?

अगर जिला प्रसाशन एक्टिव रहती तो दो-दो जगह कब्र खोदने के बाद लौटना नहीं पड़ता आपको बता दें कि दोनों जगह कोई भी पुलिसकर्मी नही थी जबकि SDPI एवं स्थानीय समाज सेवियों ने बार-बार कहा की बिना प्रसाशनिक सहयोग के दफन करना मुश्किलों से भरा है और जान को खतरा है।

आज जो घटना हरगांमा में या बड़ी दरगाह एवं मनीराम अखाड़ा में घटा अगर कोई हादसा हो जाता तो इसका जिम्मेदार कौन होता? आज हर कोई कोरोना के नाम से डर रहे है अगर किसी को डरना चाहिेए तो SDPI के योद्धाओं को डरना चाहिए जो अपनी जान की बाजी लगाकर दूसरों को कफ़नाने-दफनाने से लेकर उनके चिता को आग लगाने तक का काम अपनी जान जोखिम में डालकर कर रही है

हमारे समाज के लोगो को कोरोना महामारी से मिलकर लड़ना होगा और एक दूसरे का साथ देना होगा। इस पुरे घटना क्रम पर बिहारशरीफ के स्थानीय समाजसेवी श्री रूमी खान ने कड़ी भ्रत्सना की है एवं लोगों से अपील भी की इस तरह की प्रकरण से पूरी मानव जाती को शर्मसार होना पड़ता है।