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सिमांचल में कांग्रेस एवं जदयू पर आफत बनकर उभर रही है AIMIM

सीमांचल – कांग्रेस और जदयू की महत्वपूर्ण सीटिंग विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस और जदयू पर आफत बनकर उभर रही है एमआइएम

एमआइएम-के-धुरंधर
फोटो – कांग्रेस एवं जदयू के साथ दो दो हाथ फ़रियाने को मैदान में उतर चुके है एमआइएम के धुरंधर
  • एमआइएम के बैनर तले पूर्णिया की कसबा सीट पर कंचन देवी की है धमक
  • अमौर सीट पर डॉ अबू सायम बने हुए हैं कांग्रेस के लिए आफ़त,
  • एमआइएम की आंधी से  किशनगंज के कोचाधामन की सीट पर जदयू दीख रही है विचलित
  • सीटिंग जदयू विधायक के साथ दो दो हाथ फ़रियाने को फील्ड में उतरेंगे एमआइएम के बूढ़े शेर इजहार असफ़ी

सीमांचल ( अशोक / विशाल ) ।

2020 के होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सीमांचल में जिन राजनीतिक दलों ने चुनावी कसरतें शुरू कर रखीं हैं , उन सभी दलों के लिए एमआइएम आफ़त बन कर सामने आ खड़ी हुई है ।

ख़ासकर , महागठबंधन की सिरमौर कांग्रेस के लिए एमआइएम बड़ी आफ़त सावित होती नज़र आ रही है।

ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि सीमांचल की जिन जिन विधानसभा क्षेत्र की सीटों पर कांग्रेस के विधायक सीटिंग रूप में काबिज हैं , उन उन विधानसभा सीटों पर ही एमआइएम की मजबूत धमक शुरू हो गई है।

एमआइएम को इस क्रम में लाभ मिलने की गुंजाइश इसलिए बैठती नजर आ रही है , कि उन सीटों पर काबिज कांग्रेस विधायकों ने जनता की सुधि लेने में कभी बेहतर दिलचस्पी नहीं दिखाये और विधायक पद की रईसी का मजा लूटने में ही अपने विधायक काल की 5 साल की टर्म को व्यतीत किये।

हम बात कर रहे हैं पूर्णिया जिले के अमौर और कसबा विधानसभा सीटों की , जहां , लम्बे अन्तराल से सीटिंग विधायक के रूप में काबिज कांग्रेस के विधायकों से क्षेत्र की जनता में जो निराशा उत्पन्न हैं उसे अपनी ओर आकर्षित कर जनता के सुख दुख की लड़ाई लड़ने के लिए एमआइएम अब जनता के बीच आ खड़ी हुई है।

अमौर में कांग्रेस के सीटिंग विधायक सह पूर्व मंत्री ज़लील मस्तान के लिए आफ़त बन कर उभरी एमआइएम का प्रत्याशी बनने की तैयारी में जब से एमआइएम के नेता डॉ अबू सायम फिल्ड में उतर कर अंधाधुंध जनसंपर्क अभियान में लगे हैं , तबसे अमौर विधानसभा क्षेत्र में एक ओर कांग्रेस विधायक के पूर्व से स्थापित किले की दीबारें ढ़ह ढ़ह कर गिरने लगीं हैं तो दूसरी ओर एमआइएम के जनाधार फलने फूलने लगे हैं।

इस कारण एमआइएम के टिकट के दावेदारों के रूप में हालांकि और भी कई नेता जनता के बीच उतर आए हैं लेकिन , बाढ़ की त्रासदी के बीच क्षेत्र की बाढ़ ग्रस्त जनता की सर्वांगीण मदद करते हुए डॉ अबू सायम ने जो राजनीतिक धमक वहां स्थापित किये , उससे कांग्रेस के सीटिंग अमौर विधायक ज़लील मस्तान फिलबक्त विचलित हो गए हैं।

उसी प्रकार दो टर्म से लगातार पूर्णिया जिले के कसबा विधानसभा सीट पर काबिज सीटिंग कांग्रेस विधायक आफाक आलम की भी परेशानी कसबा विधानसभा सीट पर एमआइएम से ही बढ़ती नजर आ रही है।

कसबा में कांग्रेस की इस भारी परेशानी का कारण एमआइएम से चुनाव लड़ने की तैयारी में लगीं एमआइएम की वह महिला नेता कंचन देवी है जो कुछ समय पहले तक कांग्रेस की पूर्णिया जिला महिला विंग की पदधारी नेता के रूप में कांग्रेस की ही चुनावी कील कांटों को दुरूस्त करने में लगीं थीं और अपने कसबा विधायक के प्रति कसबा की जनता की नाराजगी को भांपकर कांग्रेस की हित में स्वयं कांग्रेस की टिकट के लिए अपनी दावेदारी कांग्रेस में करने लगी थी।

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फोटो – सिमांचल के कसबा विधान सभा से AIMIM के बैनर तले कंचन देवी का चुनावी अभियान

लेकिन , सीटिंग गेटिंग की पुरानी राजनीति से ओतप्रोत कांग्रेस को कंचन देवी के प्रस्ताव रास नहीं आये।

लिहाजा , विना कोई अवसर गंवाये कंचन देवी ने तत्काल ही कांग्रेस को अलविदा कह दिया और लगे हाथ कसबा की सीट की दावेदार बन एमआइएम का दरबाजा खटखटाया ।

कहते हैं कि होनहार बिरबान के होत चिकनेपात के अनुकूल उम्मीद की लौ जलाने वाली कंचन देवी की आहट मात्र से ही एमआइएम के दरबार प्रफुल्लित हो उठे और एमआइएम की दरबार से न सिर्फ कंचन देवी को एमआइएम की सदस्यता ग्रहण कराये गए , बल्कि , कंचन देवी की इच्छाओं का कद्र करते हुए दरबार से कंचन देवी को चुनावी तैयारी में लग जाने की हरी झंडी भी मिल गई।

बताया जाता है कि उसी दिन से कंचन देवी ने एमआइएम के जनाधार की मजबूती के लिए सम्पूर्ण कसबा विधानसभा क्षेत्र के तीनों प्रखण्डों के सभी 33 ग्राम पंचायतों का भ्रमण करना शुरू कर दिया था जो अब पूर्ण हो चुका है और इस क्रम में उन्होंने रिकॉर्ड तोड़ सदस्यता अभियान को भी कामयाब किया है।

एमआइएम के बैनर तले कंचन देवी ने कसबा विधानसभा क्षेत्र के हरेक वैसी जगहों पर एमआइएम का पताका फहराया , जहां की जनता में अगला रहनुमा की तलाश को लेकर असमंजस की स्थिति थी ।

कहा जाता है कि एमआइएम की क्षेत्र में बढ़ी सक्रियता से कसबा विधानसभा क्षेत्र की मुस्लिम , दलित , आदिवासी और महादलित जनता ने सिर्फ इसलिए सुकुन महसूस किया कि एमआइएम के ही जिस राष्ट्रीय नेता असदुद्दीन ओवैसी ने अकेले संसद भवन में सी ए ए और एनआरसी को संविधान विरोधी बताते हुए कागजों को फाड़ा था , उसकी पार्टी ने उनके यहां भी उनके सुख दुख का साथी बनने के लिए दस्तक दी है।

बहरहाल , इस कारण ही कहा जा रहा है कि सीमांचल में कांग्रेस की धरोहर बनी विधानसभा सीटों पर हुई एमआइएम की  जोरदार धमक कांग्रेस के लिए आफ़त सावित हो रहे हैं ।

इस क्रम में यह भी विदित है कि कुछ विधानसभा क्षेत्र में एमआइएम ने जदयू के लिए भी भारी बखेड़ा खड़ा कर दिया है।

जदयू की ऐसी सीटों में यूं तो कोचाधामन और ठाकुरगंज की विधानसभा सीटें मुख्य रूप से निशाने पर बताये जा रहे हैं लेकिन , सबसे पहले हम फिलबक्त किशनगंज जिले के कोचाधामन की विधानसभा सीट की ही चर्चा करते हैं , जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रियपात्र कहे जाने वाले जदयू के सीटिंग विधायक मास्टर मोजाहिद आलम के कब्जे में है।

एमआइएम ने कोचाधामन की सीट से चुनावी तैयारी करने के लिए कोचाधामन के जिस दिग्गज समाजसेवी व एमआइएम नेता इज़हार असफ़ी को लगाया है , वह कोचाधामन की भविष्य को तय करने वाले नेता के रूप में एक अरसे से सर्वमान्य रहे हैं और उस पर तुर्रा यह कि एमआइएम की वह हस्ती बग़ल के बहादुर गंज विधानसभा क्षेत्र में लगातार चार बार से कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीतते आ रहे कांग्रेस के सीटिंग बहादुरगंज विधायक तौसीफ़ आलम के ससुर हैं।

इस तरह यह कहना जरा भी अतिशयोक्ति नहीं होगा कि सीमांचल में कांग्रेस और जदयू की महत्वपूर्ण सीटिंग विधानसभा सीटों पर एमआइएम आफत बनकर उतर आयी है तो जाहिर सी बात है कि कांग्रेस और जदयू की उन सीटों पर सिट्टी पिट्टी गुम होती नजर आ रही है।