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वर्षों की कड़ी मेहनत से सीमांचल में AIMIM की लहलहाने लगी फसल, अभी से लगने लगी टिकट पाने की होड़

वर्षों की कड़ी मेहनत से राजनीति की जमीन की सिंचाई कर सीमांचल में एमआइएम की फसलें काटने को उत्साहित प्रदेश अध्यक्ष “अख्तरूल ईमान” के इर्दगिर्द लगे टिकटार्थियों के मेले

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फोटो – अख्तरूल ईमान की नज़र किशनगंज संसदीय क्षेत्र की छह विधानसभा क्षेत्र है जहां की राजनीतिक ज़मीन की वर्षों से सिंचाई करते रहने के बाद इस बार फसलें काटने की तैयारी में हैं।
  • मुस्लिम समुदाय और दलित समाज में पार्टी के प्रति झुकाव और आकर्षण का खुलासा करेगा चुनाव
  • सीएए , एनआरसी ,पीएनआर के विरोध के कारण सीमांचल की राजनीति की मुख्य धारा में पहुंची एमआइएम

सीमांचल ( अशोक / विशाल ) ।

यूं तो असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एमआइएम के बैनर तले आगामी विधानसभा चुनाव में बिहार के कई सीटों पर उम्मीदवार उतारने की घोषणा एमआइएम के बिहार प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व विधायक अख्तरूल ईमान ने कर दी है लेकिन , जानकारों की मानें तो अख्तरूल ईमान की मुख्य लक्ष्य में किशनगंज संसदीय क्षेत्र की छह विधानसभा क्षेत्र है जहां वह एमआइएम की राजनीतिक ज़मीन की वर्षों से सिंचाई करते रहने के बाद इस बार फसलें काटने की तैयारी में हैं।

सच पूछा जाय तो यह अख्तरूल ईमान की वर्षों की लगातार मेहनत का परिणाम ही है कि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एमआइएम की किशनगंज जिले में पहचान कायम हुए और किशनगंज की जनता ने किशनगंज क्षेत्र में कांग्रेस या राजद के विकल्प के रूप में एमआइएम को मानते हुए  किशनगंज विधानसभा क्षेत्र के विगत उप चुनाव में एमआइएम को जीता कर बिहार विधानसभा के सदन में एमआइएम को उपस्थिति दर्ज कराने का मौंका दिया।

तभी से सीमांचल के किशनगंज जैसे बिहार के सर्वाधिक मुस्लिम बहुल क्षेत्र में एमआइएम के भविष्य को भी उज्ज्वल माना गया और समझा जाने लगा कि किशनगंज संसदीय क्षेत्र के छहों विधानसभा क्षेत्र में जिस तरह की राजनीतिक औक़ातें जदयू , कांग्रेस , राजद की रहीं हैं , उसके समकक्ष एमआइएम भी आ खड़ी हुई हैं।

यही कारण है कि कांग्रेस और राजद सहित जदयू के भी कई दिग्गज नेताओं ने एमआइएम की भविष्य की सम्भावनाएं महसूस करते हुए एमआइएम के झंडे-बैनर को थाम लिया और अब वे टिकट की मांग इस दावे के साथ कर रहे हैं कि वे अपनी सीटों से जदयू के साथ साथ कांग्रेस और राजद को भी खदेड़ कर विजय का पताका फहरा कर दिखा देंगे।

इस बाबत एमआइएम के इन टिकटार्थियों ने व्यापक स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलाया है और जनता की समस्याओं को उछालना प्रारंभ कर दिया है।

अभी बाढ़ और कटाव की त्रासदी भी जनता के बीच शुरू है और पूर्व से अपनी अपनी सीटों पर आसीन जदयू , कांग्रेस और राजद के विधायकों ने जनता की उक्त त्रासदी का समाधान करने में कभी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाया है तो ऐसे में जनता को एमआइएम के रूप में एक बेहतर विकल्प नजर आ रहा है।

कई मीडिया कर्मियों ने इस बाबत विभिन्न विधानसभा क्षेत्र की नब्ज़े जब टटोली तो एमआइएम के जनाधार मजबूत नजर आए।

लेकिन , यहां स्पष्ट है कि सीमांचल के किशनगंज संसदीय क्षेत्र की छहों विधानसभा क्षेत्रों की तरह सीमांचल के शेष जिलों सहित शेष बिहार के उन सभी विधानसभा क्षेत्रों में (जहां से एमआइएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने उम्मीदवार उतारने की बातें की हैं )वहां पर एमआइएम सत्तारूढ़ दल के साथ मुख्य संघर्ष में तभी नजर आएगी , जब बिहार के मुसलमानों और दलितों-महादलितों का झुकाव और भरोसा एमआइएम की ओर आकर्षित होगा।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान की विंग की इस बाबत बिहार के शेष क्षेत्रों में कैसी तैयारी है और किस हद तक संगठन की मजबूती हुई है यह बात प्रदेश अध्यक्ष को भली भांति पता होगा और यहां यह बात भी कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि बिहार में अभी तक एमआइएम की चुनावी राजनीति की जो क्षमता बनी है वह भी एकमात्र अख्तरूल ईमान की ही मेहनत का परिणाम है।

क्योंकि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी की ओर मुस्लिम समुदाय के आकर्षण का एक मात्र कारण ओबैसी के द्वारा संसद में सीएए ,एनआरसी और पीएनआर के किये गए ख़िलाफ़त हैं और एमआइएम की सभाओं में मुस्लिम समुदाय और दलित समाज के हौंसले बुलंद करने वाले भाषण हैं न कि पार्टी संगठन की मजबूती के लिए की गई कोई गतिविधि ।

बहरहाल , यहां यह बात झुठलाया नहीं जा सकता है कि सीमांचल भर में चुनावी जुनून से ओतप्रोत राजनीतिक लोगों में एमआइएम से भी चुनावी टिकट पाने की जोरदार ललक उत्पन्न हो गई है और सीमांचल के किशनगंज संसदीय क्षेत्र के छहों विधानसभा क्षेत्रों में तो एमआइएम की टिकट के लिए जोरदार मारामारी शुरू हो गई है।

विभिन्न दलों के मुस्लिम और दलित नेताओं ने कांग्रेस और राजद से मोंह भंग कर कांग्रेस और राजद की खिलाफत के सुर तानते हुए एमआइएम का दरबार सजाना शुरू कर दिया है।

अब आने वाले समय में चुनाव के बाद के परिणामों को देख कर ही पता चलेगा कि एमआइएम की टिकट पर चुनाव में पहलवानी करने की तमन्ना संजोये विभिन्न नेताओं का तिलिस्म टूटता है या संबरता है।