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राजद की टिकट पर एकमात्र राजकुमार चौधरी ही भाजपा को पूर्णिया की सीट पर दे सकते हैं शिकस्ती

वैश्य समाज के होने के कारण भाजपा के वैश्य वोट बैंक पर वही कर सकते हैं नया कब्जा, इसके अलावे संथालों-आदिवासियों , बंगाली , अनुसूचित जातियों , मुसलमानों व यादवों की रुख को अपनी चिरपरिचित व्यवहार कुशलता की बदौलत अपने पक्ष में करने की रखते हैं क्षमता

राजकुमार-चौधरी-पूर्णिया
फोटो – पूर्णिया से इस बार भाजपा के सीटिंग वैश्य समाज के विधायक को शिकस्ती प्रदान करने के लिए वैश्य समाज के नेता राजकुमार चौधरी पूर्णिया की सीट से राजद की जीत सुनिश्चित करा सकते है।

सीमांचल ( अशोक / विशाल ) ।

सीमांचल के अति महत्वपूर्ण पूर्णिया विधानसभा क्षेत्र पर हर हालत में कब्ज़ा करने के लिए राजद की टिकट पर वैश्य समाज के अति प्रभावशाली नेता राजकुमार चौधरी के भावी राजद प्रत्याशी के रूप में चुनाव में कूदने की संभावना की खबर के फैलने से भाजपा-जदयू गठबंधन वाले एनडीए की जमीन पैरों के नीचे से खिसकती नजर आने लगी है और इस कारण पूर्णिया सीट पर आसीन सीटिंग भाजपा विधायक परेशानियां काफी बढ़ गई है।

पूर्णिया की सदर विधानसभा सीट पर सीटिंग विधायक के रूप में भाजपा के विधायक हैं जो वैश्य समाज के ही हैं ।

इनके मुकाबले में वैश्य समाज के ही नेता राजकुमार चौधरी के राजद से उतरने की सम्भावना को लेकर फैली व्यापक चर्चा से पूर्णिया एनडीए में हड़कम्प मचने लगा है।

राजद की टिकट पर पूर्णिया विधानसभा सीट से राजकुमार चौधरी की संभावित उम्मीदवारी से विरोधी खेमें में इसलिये खलबली मची है कि एक ओर राजकुमार चौधरी में भाजपा के सबसे ताकतवर वैश्य समाज के वोट बैंक का रुख अपनी ओर मोड़ने की ठोस क्षमता है तो दूसरी ओर राजकुमार चौधरी की पकड़ वैश्य समाज के वोट बैंक के अलावे दूसरे समुदायों यथा मुस्लिम , यादव , बंगाली , अत्यंत पिछड़ी जातियां , महादलित संथालों-आदिवासियों , अनुसूचित जातियों पर भी एक पुराने समाजसेवी के रूप में वर्षों से बरकरार रहती आयी है।

आर्थिक रूप से भी काफी सम्पन्न रहने के कारण चुनावी राजनीति में इनकी आहट को प्रभावी माना जा रहा है कि वह स्थिति-परिस्थिति के आलोक में हरेक वह उपाय करने से नहीं चूकेंगे , जिनकी जरूरत वर्तमान समय की राजनीतिक , चुनावी परिवेश में चुनाव जीतने के लिए जरूरी समझी जाती है।

पूर्णिया की विधानसभा सीट पर जनता को एक अरसे से व्यवहार कुशल , मिलनसार नेता की तलाश रही है जो राजकुमार चौधरी की चर्चा के कारण जनता की उत्सुकता को बढ़ा दी है।

चर्चा है कि एक अरसे से पूर्णिया की सीट पर कुण्डलीमार कर बैठी भाजपा को रुखसत कराने में राजद की टिकट पर एकमात्र राजकुमार चौधरी को ही कामयाबी हासिल हो सकती है।

शायद यही कारण है कि सत्तापक्ष की राजनीतिक दलों के इशारे पर पूर्णिया में राजद के राजनैतिक कार्यक्रमों को स्थानीय स्तर से वाधित करने के सरकारी प्रयास शुरू किये गए हैं , जिसका खुला विरोध करने से राजकुमार चौधरी भी पीछे नहीं हट रहे हैं।

चुनाव आयोग के निर्देशानुसार सरकारी स्तर पर बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी जोर शोर से प्रारंभ हो चुकी है , और सत्तारूढ़ दल भाजपा-जदयू वाले एनडीए गठबंधन को इस चुनाव की तैयारी में किसी तरह का अड़चन नजर नहीं आ रहा है लेकिन , कोरोना महामारी का संक्रमण फैलने की आशंका का हौवा पैदा कर विपक्षी दलों की चुनावी तैयारियां पर तरह तरह के अड़चन पैदा किये जा रहे हैं।

चुनावी राजनीति के बीच इस बात का खुलासा तब हुआ जब राजद की स्थापना दिवस के अवसर पर पेट्रोल-डीजल की मूल्य वृद्धि के विरोध में आयोजित होने वाले साइकिल रैली का खुला परमिशन प्रशासन ने नहीं दिया था तो हार-पछता कर पूर्णिया की राजद के कार्यकर्ताओं-नेताओं को जो जहां थे , वहीं , टुकड़े टुकड़े में साइकिल रैली का आयोजन करना पड़ा था।

कोरोना संक्रमण से बचाव की दिशा में लागू किये गए सरकारी-प्रशासनिक प्रतिबंधो की आड़ में विपक्षी दलों की चुनावी तैयारियों पर सरकारी महकमे की ओर से अड़चनें डाली जा रही है , ऐसा यूपीए गठबंधन के दल राजद के उभरते हुए नेता राजकुमार चौधरी ने उसी दौरान सीधा आरोप भी मीडिया के माध्यम से लगाया था !

जबकि , दूसरी ओर बिहार की वर्तमान एनडीए सरकार के सरकारी तंत्रों के द्वारा ही व्हाट्सएप्प ग्रुपों के जरिये खुलेआम सरकार की अबतक की उपलब्धियों को रह रह कर लगातार गिनाया जा रहा है ।

राजद के भावी पूर्णिया प्रत्याशी राजकुमार चौधरी के समर्थकों का मानना है कि राजद आलाकमान ने अपनी उचित सूझबूझ के तहत इस बार अगर इन्हें उम्मीदवारी प्रदान किया तो पूर्णिया की सीट पर राजद के कब्जे को शतप्रतिशत कामयाबी हासिल होगा अन्यथा एनडीए की भाजपा को पूर्णिया की सीट से कोई दूसरा कभी भी भगा नहीं सकता है।