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महानन्दा नदी की उफान से अमौर और बायसी विधानसभा की जनता पर मण्डराने लगे हैं विस्थापन के काले बादल

महानन्दा नदी की भीषण कटावलीला से बायसी अनुमंडल के अमौर और बायसी विधानसभा क्षेत्र की जनता पर इस साल भी मण्डराने लगे हैं विस्थापन के काले बादल

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फोटो – सी ओ और एसडीओ से अमौर के असजा गांव को महानन्दा के कटाव से बचाने की गुहार लगाते अमौर के भावी एमआइएम प्रत्याशी डॉ अबू सायम
  • अमौर के असजा गांव के कटाव को रोकने के लिए फ्लड कंट्रोल ने किये अजीबोगरीब बचाव कार्य
  • दूसरी ओर बायसी के नबाबगंज और हाथीबन्धा में जारी कटावलीला पर नियंत्रण की कोई पहल भी नहीं
  • बायसी के पूर्व निर्दलीय विधायक रूकनुद्दीन और अमौर के भावी एमआइएम प्रत्याशी डॉ अबू सायम ने कहा कि इस बार बाढ़ की त्रासदी के बीच ही होने जा रहे विधानसभा चुनाव में जनता साध लेगी सारा बदला

सीमांचल ( अशोक / विशाल ) ।

प्रत्येक वर्ष की बाढ़ से तबाही का दंश झेलने वाले पूर्णिया जिले के बायसी अनुमंडल के दोनों विधानसभा क्षेत्रों बायसी और अमौर में नदियों की कटावलीला से प्रभावित होने वाले गांव की जनता के घर बार – खेत -खलिहान , मस्जिदों , कब्रिस्तानों को बचाने की कोई सरकारी कवायद कभी नहीं हुई है और कागज़ पर सुरक्षा व्यवस्था को दिखाकर प्रत्येक वर्ष विभागीय सरकारी कोषों की लूट मचती रही है ।

इन क्षेत्रों में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 2005 से ही लगातार आते रहे हैं और उनके प्रत्येक आगमन के अवसर पर स्थानीय बाढ़ प्रभावित जनता की ओर से वर्तमान और पूर्व विधायकों , सांसदों की ओर से सुरक्षात्मक उपाय करने के लिए मेमोरेंडम दिये जाते रहे हैं लेकिन , बाढ़ प्रभावित बायसी अनुमंडल में कोई सुरक्षात्मक उपाय नहीं किये गए ।

बायसी अनुमंडल में महानन्दा , कनकई , परमान , पनार नामक नदियों से प्रत्येक वर्ष तबाही मचती है। बायसी अनुमंडल मुख्यालय या प्रखंड मुख्यालय के पंचायत बायसी का एक गांव हाथीबंधा हो या नबाबगंज , बनगामा हो या बैरिया , पोठिया गांव हों , प्रत्येक वर्ष की महानन्दा और कनकई की कटावलीला से इन गांवों को कटकर नदियों की गर्भ में समाना पड़ता है।

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फोटो – अमौर के असजा गाँव को महानन्दा के कटाव से बचाने के लिए विभाग ने की यह अजीबोगरीब कार्रवाई

और प्रत्येक वर्ष की बाढ़ की त्रासदी थमने के बाद इन गांवों के लोगों को नई जमीनें खरीद कर घर द्वार बनाने की मजबूरी झेलनी पड़ती है। खेत खलिहान , बगान कटते कटते ऐसी नौबत आ गई कि सम्पन्न किसान अब खेतिहर मजदूर बन गए।

यहां के पूर्व निर्दलीय विधायक रूकनुद्दीन के अनुसार , बायसी के बाढ़ प्रभावित इलाकों से न तो सरकार को कुछ लेना देना है और न ही पूर्णिया के जिला प्रशासन को इस क्षेत्र की कोई चिंता है।

वह बताते हैं कि इस बार विधानसभा चुनाव इस बार की बाढ़ की त्रासदी के बीच ही होने जा रहा है तो जनता के दिलों में बाढ़ के ताजा घाव बरकरार रहेंगे और जनता इस चुनाव में सत्तारूढ़ दल से बदला चुकाने में तनिक भी संकोच नहीं करेगी।

पूर्व विधायक रूकनुद्दीन के अनुसार , बायसी पंचायत अनुमंडल और प्रखंड मुख्यालय का पंचायत है और उसके एक गांव हाथीबन्धा में मचने वाले महानन्दा के कहर को अभी भी कोई देख सकते हैं कि किस प्रकार हाथीबन्धा गांव महानन्दा से चारो तरफ से जलप्लावित होकर टापू में तब्दील है और महानन्दा की कटावलीला से किस प्रकार उक्त गांव की मस्जिद , कब्रिस्तान तक हरेक साल विलीन होते गए।

बायसी अनुमंडल के अमौर की बात की जाय तो उसकी भयावहता बिकराल रूप में सामने आ जाती है। अमौर विधानसभा क्षेत्र के कई गांव 15 वर्षों के दरम्यान महानन्दा की कटावलीला का खुराक बन चुके हैं।

लेकिन , न तो कभी बिहार की सरकार ने कटाव पीड़ित जनता की सुधि ली और नहीं प्रशासन ने ही उन क्षेत्रों की कोई सुधि कभी ली । असजा नामक गांव और शर्मा टोला नामक गांव की खेतिहर भूमि कटने के बाद अब घर की ज़मीन व कब्रिस्तान भी कटावलीला की शिकार हुए , प्रशासन को सूचना दी गई लेकिन कोई बचाव कार्य नहीं।

विधानसभा चुनाव में अपना भाग्य आजमाने के लिए जनसम्पर्क अभियान में निकले एमआइएम के भावी अमौर प्रत्याशी डॉ अबू सायम ने महानन्दा की भीषण कटावलीला से संत्रस्त असजा गांव की जो तस्वीर वायरल किये , उस तस्वीर में ही स्थानीय प्रशासन के कामकाज की तस्वीर सामने आई है कि किस प्रकार कटाव की त्रासदी से बचाने के नाम पर सरकारी बचाव कार्य किये जा रहे हैं।

एमआइएम नेता डॉ अबू सायम ने बायसी के एसडीओ और अमौर के अंचलाधिकारी को असजा गांव में जारी महानन्दा नदी की कटावलीला से लिखित रूप में अवगत कराया और बीच सड़क पर ही उसके बाद फिर मिले एसडीओ के साथ फिर से वहां की समस्या को साझा किया तो एसडीओ ने एमआइएम नेता डॉ अबू सायम को आश्वस्त किया कि उन्हें फ्लड कंट्रोल विभाग ने सूचित किया है कि बचाव कार्य प्रारंभ है।

एसडीओ की उक्त बात पर जब दोबारा डॉ अबू सायम असजा गांव के कटाव स्थल पर देखने पहुंचे तो वहां उन्होंने देखा कि कुछ बांस और बांस की झाड़ को कटाव स्थल पर विभाग ने रख कर अपने कर्त्तव्य को सम्पन्न दिखाने का प्रयास किया है।

अर्थात , पूरी तरह से कागज़ी बचाव कार्य किया गया था ।जिसकी त्वरित शिकायत पुनः डॉ अबू सायम ने बायसी के एसडीओ को फिर से दे दी। और इसी के साथ फ्लड कंट्रोल के कागज़ी बचाव कार्य का पर्दाफाश भी हो गया कि वर्षों से इसी तरह के बचाब कार्य कर के विभाग द्वारा विभागीय कोषों की लूट खसोट की जाती होंगी।

बहरहाल , बायसी अनुमंडल के दोनों विधानसभा क्षेत्र बायसी और अमौर में शुरुआती बाढ़ से ही कटाव की जो समस्याएं उत्पन्न हुई हैं उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन क्षेत्रों की जनता किस तरह की ज़िल्लत भरी नुकसान दायक जिंदगी जीने को मजबूर है।