कसबा-विधानसभा-से-कंचनदेवी-का-जनसंपर्कडॉ-तारा-स्वेता-आर्यासुयोग्य-उम्मीदवार-की-तलाश-में-किशनगंज-कांग्रेसतीन सदस्यीय केंद्रीय टीम का खुलासा,ईद-उल-अज्हा-हाफिज़-खुर्रम-मलिकराजकुमार-चौधरी-पूर्णियाजीतेन्द्र-यादव-और-उनकी-उपमहापौर-पत्नी-विभा-कुमारीहज-से-एक-भी-कोरोना-केस-नही-आया
HARWAMONI BRIDGE

5 बार कांग्रेस विधायक एक बार मंत्री रहे ज़लील मस्तान की कुम्भकर्णी निंद्रा के कारण अमौर विधानसभा क्षेत्र अभी तक “काला पानी” के अभिशाप से मुक्त नहीं हो पाया

आजादी के 70 साल बीत गए और पूर्णिया जिले के अमौर विधानसभा क्षेत्र की पहचान पूर्व की भांति ही ” काला पानी ” के रूप में रहती आयी तो उस अमौर क्षेत्र से लगातार 5 बार कांग्रेस की टिकट पर निर्वाचित होने वाले चर्चित विधायक सह पूर्व मंत्री जलील मस्तान को धूल चटाने के लिए दूसरे राजनीतिक दलों के नेतागण अभी से ही कोई जत्न क्यों नहीं करेंगे ।

सीमांचल(अशोक कुमार)

  • आजादी के 70 साल बाद भी पुल-पुलियों के रह गए अभाव
  • कांग्रेस के विधायक रहते हुए कभी किसी कांग्रेस सांसद को भी नहीं लगाया
  • अपने गांव की आवागमन समस्या को भी करते रहे नजरअंदाज
  • आने वाले विधानसभा चुनाव में रहेंगे अपने विरोधियों के निशाने पर

किशनगंज संसदीय क्षेत्र में परिसीमन के तहत आने वाले पूर्णिया जिले के अमौर क्षेत्र की वास्तविक त्रासदी महज़ यही है कि इस क्षेत्र के लगभग 50 गांवों को पुरब से विनाशकारी महानन्दा नदी और पश्चिम दिशा से विनाशकारी कनकई नदी प्रत्येक वर्ष के मानसून के बाद दोनों ओर से चांप्ती है , डुबाती और धंसाती है । फसलें , खेत , जमीनें , सडकों और पुलों को लील जाती हैं लेकिन 5 बार विधायक निर्वाचित होने वाले कांग्रेस के विधायक ज़लील मस्तान की कुम्भकर्णी नींद नहीं टूटती है।

इसी बीतते विधायक टर्म की शुरूआत में ये विधायक इस क्षेत्र के ऐतिहासिक कैबिनेट मंत्री भी बनें लेकिन इनकी कुम्भकर्णी निंद्रा भंग नहीं हुई और क्षेत्र की हालत बद से बद्तर होती चली गईं ।
जलील मस्तान अपने क्षेत्र में एक ओर अपनी बिरादरी सुरजापुरी समुदाय पर प्रभाव रखने वाले नेता के रूप में चर्चित रहें हैं तो दूसरी ओर एक बार मंत्री पद के ऑफ़र को ठुकराने के कारण चर्चित रहें थे।

कांग्रेस पार्टी में यह मौलाना असरारुल हक कासमी को किशनगंज संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस का विरोध करने के कारण चर्चा में आये थे और चर्चा में इसलिए बने हुए आगे भी रह गए कि मौलाना के जीवित रहते मौलाना के दोनों संसदीय कार्य काल तक मौलाना का विरोध करते रहे और यह कांग्रेस के अंदर की चर्चा में अब भी इसलिए बनें हैं कि जब मौलाना की मौत के बाद कांग्रेस के किशनगंज सांसद के रूप में डॉ जावेद आज़ाद काबिज़ हुए तो इन्होंने इस सांसद से भी अपनी दूरी अब तक बना रखीं है।

ऐसी स्थिति में यह सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि कोई विधायक अपने क्षेत्र के सांसद से दूरियां बरकरार रख कर क्षेत्र के विकास की रौशनी की लौ को किस हद तक जलाये रख सकता है।

सर्वाधिक चर्चा में तो यह विधायक तब आये थे जब इस कांग्रेस विधायक ने बतौर मंत्री 2017 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तस्वीर पर अमर्यादित हरकतें करने का खुला दुःसाहस पुलिस अधिकारियों , तमाम नेताओं व मीडिया के लोगों के सामने कर दिखाया और इनका बाल भी बांका नहीं हो पाया था।

बहरहाल , यहां इनके कार्यकालों में होती आ रही क्षेत्र की उपेक्षा और अनदेखी की चर्चा की जा रही है। चर्चा में इन विधायक महोदय के गांव को ही लिए जाएं तो एक आश्चर्यजनक पहलू यही नजर आते हैं कि हरवामोनी पुल जो धुस्माल पंचायत में अनगढ़ और खाड़ी सड़क के बीच है , 2017 की बाढ़ में ध्वस्त होने के बाद से बीते चार सालों से अपनी मरम्मती को तरस रही है।

Khadi Bridge
फोटो – खाड़ी पुल

इसी साल अगस्त महीने में क्षेत्र के एमआइएम के उभरते हुए नेता ने इस पर सवाल उठाया था मगर इस क्षेत्र के विधायक के साथ साथ सांसद भी निरुत्तर रहे ।विधायक के कानों में तो लगता है कि क्षेत्र की समस्या के नाम पर कोई जूं तक नहीं रेंगती ।

हां , कुछ नेताओं के तथाकथित प्रतिनिधि सोशल मीडिया के जरिए पुल पास होने एवं जल्द काम शुरू करने का दंभ भरते जरूर नज़र आते हैं मगर , अफसोस की बात है कि लोग बरसात ख़तम होते ही परेशानी को भूल जाया करते हैं और नेता लोग शिलान्यास और जुमले बाज़ी में व्यस्त हो जाया करते हैं साल 2019 से अबतक अमौर विधानसभा क्षेत्र में सैंकड़ों सड़कों व पुलों का सिल्यान्यास किया गया है मगर काम ज़ीरो ।

असल में ये प्रतिनिधियों द्वारा लोगों को झांसा देने की नई तरकीब मात्र है। क्योंकि बनी बनाई जो पुल बाढ़ में ध्वस्त हो गये और वह 4 सालों मे नहीं बन पाये तो अब चुनाव से पूर्व के बाकी बचे छह माह में किये जाने वाले सैकड़ों शिलान्यासों को कहां तक अंजाम दिला सकते हैं ।

हारवामोनी पुल अमौर विधान सभा की लाइफ लाइन है जो बाढ़ बरसात के दिनों की एकमात्र सहायक सड़क है ।जोयहां के लगभग पचास गांव को किशनगंज एवं पूर्णिया जिला मुख्यालय से जोड़ता है ।

HARWAMONI BRIDGE
फोटो – अनगढ़ से खाड़ी के बीच धुसमल के पास हरवामोनी पुल

यह इलाका महानंदा एवं कनकई नदी से घिरा होने कि वजह से “काला पानी” की सज़ा की तरह जिंदगी गुजारने पर मजबूर है ।

इस वज़ह से ही एआईएमआईएम के इसी इलाके से उभरते नेता डॉ अबू सायम ने किशनगंज के सांसद डॉक्टर जावेद आज़ाद से भी सवाल किया है कि क्या वह इसकी खबर लेंगे या वो भी यहां की जनता को झांसे में रखेंगे ।

उन्होंने अब सीधे सांसद से ही अपील की है कि हरवामॉनी पुल के साथ साथ कनकाई नदी में तालबरी पुल जो इस क्षेत्र से अमौर रौटा को सीधा जोड़ता है और महानंदा नदी में सिल्ला घाट पर पुल बनवाकर यहां के लोगों को काला पानी की सज़ा से मुक्ति दिलाएं और अपनी ज़िम्मेदारी निभाएं वरना किशनगंज लोकसभा के निकम्मे सांसदों की फेहरिस्त में एक और नाम का इज़ाफ़ा हो जाएगा।