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संविधान बचाओ यात्रा के अंतर्गत धमौल से पकरीबरामा पद यात्रा निकाला और रच दिया इतिहास

नवादा। पकरीबरावां प्रखंड के धमौल बाजार से पद यात्रा निकला गया यह पैदल मार्च कमरुल बारी धमौलवी राजद अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ अध्यक्ष नवादा, के आह्वान और नेतृत्व में निकला गया ।

फोट – पकरीबरावां प्रखंड में नागरिकता कानून के विरोध में ज्ञापन सौपते हुए

धमौल बाजार से संविधान बचाओ अभियान के अंतर्गत पद यात्रा निकला गया और आढा आते-आते सभा में बदल गया, और आगे चलने के बाद बेलखुंडा नहर पर महासभा में बदल गया। यह पैदल मार्च कमरुल बारी धमौल वी अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ अध्यक्ष नवादा, के नेतृत्व में निकला।

सारे लोगों ने इनका पूरा सहयोग किया, धमौल से लगभग पकरी बरामा 16 किलोमीटर है। और वहां से बुढे, बूढ़ी औरतें, महिलाएं, बच्चे, आक्रोश के साथ पकरीबरावां प्रखंड तक पहुंचे। धमौल से 9:30 बजे यह जुलूस निकला। और पकरीबरावां प्रखंड पहुंचते-पहुंचते 3:00 बज गया।

लगभग 16 किलोमीटर की दूरी 6 घंटा में पूरा किया गया। और पूरे आक्रोश के साथ काला कानून वापसी के नारे लगे, इस मौके पर धरहरा, आढा, जम्हरिया, तपसीपुर, गुलनी, आदि जगहों के लोग शामिल हुए। और महामहिम राष्ट्रपति महोदय भारत सरकार, नई दिल्ली। को प्रखंड विकास पदाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में जो लिखा वह निम्नलिखित है।

कहना यह है। कि हम लोग पकरीबरावां प्रखंड जिला नवादा बिहार के निवासी है । दिनांक 8-02- 2020 दिन शनिवार को सीएए, एनआरसी, और एनपीआर के विरोध में संविधान बचाओ, यात्रा के नाम पर सैकड़ों गांव के लोग लगभग 16 किलोमीटर पैदल चलकर पकरी बरामा प्रखंड, कार्यालय पहुंचकर संविधान की भावना और उसकी मूलभूत संरचना का उल्लंघन जो हुआ है। उसके विरोध प्रदर्शन करते हुए, कुछ मांगे की है। वह निम्नलिखित है।

1, यह है कि सीए ए देश के संविधान की मूलभूत भावनाओं के खिलाफ है। यह कानून को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस कानून से धार्मिक कठोरता का को बढ़ावा, मिलने और देश के लोगों को बांटने, का काम करता है।

2, यह है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 में हर व्यक्ति को कानून में समानता और बराबरी दी गई है। और राज्य के किसी भी व्यक्ति के प्रति उसके धर्म जाति या पंथ के आधार पर कानून के सामने दुर्व्यवहार करने से रोका गया है ऐसा करना समानता के मूल सिद्धांत के विरुद्ध है। संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित या काला कानून, संविधान की भावना और उसकी मूल संरचना का उल्लंघन करता है।

3,यह है। कि विधेयक धर्म के आधार पर नागरिकता को विभाजन करने वाला है। देश का संविधान सभी धर्म के लोगों के समान व्यवहार करने के लिए वचनबद्ध है। यह विधेयक संविधान की भावना और इसकी मूल संरचना का उल्लंघन करता है।

अतः हम लोग श्रीमान राष्ट्रपति महोदय, से अपील करते हैं। कि इस कानून के माध्यम से लोगों के साथ अन्याय और संप्रदायिकता के लक्ष्य को रोकने के लिए, अपना गरिमा पूर्ण पद के प्रभाव को उपयोग करें। इसके लिए हम सभी प्रखंड वासी आपका सदा आभारी रहेंगे। इस मौके पर जिला के तमाम जाति के लोग हिंदू, मुस्लिम, दलित समाज की महिलाएं, पुरुष, बच्चे मौजूद थे। जिस की तादाद लगभग आकलन के द्वार, 25 से 30 हजार की संख्या बताई गई है।