नेपाल की नदियों के उफ़ान से फिर उत्पन्न होंगे सीमांचल में बाढ़ की विनाशलीला

सिमांचल में एक ओर कोरोना तो दूसरी ओर बाढ़ की भयावहता की आशंका

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फोटो – जोकीहाट के राजद विधायक शाहनवाज आलम अपने क्षेत्र में चल रहे तटबन्धों की सुरक्षा कार्यों का जायजा लेते

जनता से नेता तक भयाकुल

सीमांचल से अशोक / विशाल की रिपोर्ट ।

भारतीय क्षेत्र के सीमांचल से सटे पड़ोसी देश नेपाल की भारत विरोधी गतिविधियों की चर्चा पर विराम लगाने का अवसर स्वयं नेपाल ही अपनी हठधर्मिता के कारण गंवाता रहा है।

कभी जाली भारतीय नोटों के विदेशी तस्करों के लिए सुलभ मार्ग बनकर तो कभी चीन जैसे भारत विरोधी देश को नेपाल की भूमि होकर सड़क मार्ग तैयार करने में सहयोग देकर।

भारत विरोधी आतंकी संगठनों की मददगार के रूप में तो नेपाल की चर्चाएं रही ही हैं , ऊपर से नेपाल ने हरेक वर्ष भारतीय क्षेत्र के सीमांचल में बाढ़ की त्रासदी झोंकने का सिलसिला अलग कायम कर रखा है।

नेपाल से निकली तमाम नदियां सीमांचल की राह से गुजरते हुए बिहार में गंगा नदी में मिलती हैं और इस क्रम में नेपाली नदियों की भयावह रफ़्तार और उफ़ान से सीमांचल की कोशी , महानन्दा , कनकई , डोंक , बूढ़ी नदी , परमान , बकरा , मैची , नदियों में भी विनाशकारी उग्रता धारण हो जाती है , लिहाजा , सीमांचल में गांव के गांव नदियों की कटाव लीला के शिकार हो जाते हैं , लाखो लोग बेघर हो हर वर्ष दाने दाने को मोहताज हो बाढ़ के पानी घटने के बाद दूसरे प्रदेशों में रोजगार के लिए पलायन करने के लिए विवश हो जाया करते हैं।

नेपाल की ओर से आने वाली नदियों की बाढ़ का डर इस बार सीमांचलवासियों को फिर से सताने लगा है।

एक ओर कोरोना तो दूसरी ओर बाढ़ की आशंका ।

जोकीहाट के राजद विधायक शाहनवाज आलम अपने क्षेत्र में चल रहे तटबन्धों की सुरक्षा कार्यों का जायजा लेते फिर रहे हैं तो किशनगंज के सांसद से विधायक तक बाढ़ से सुरक्षा के मद्देनजर सरकारी विभागों के साथ बैठक दर बैठक का आयोजन कर रहे हैं।

पूर्णिया के अमौर , वैसा और बायसी जैसे सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ से बचाव के लिए होने वाले अग्रिम सुरक्षा कार्यों पर बायसी के पूर्व विधायक रूकनुद्दीन निगाहें टिकाये बैठे हैं।

लेकिन , जनता को एहसास है कि एक तरफ कुआं तो दूसरी तरफ खाई वाली स्थिति के अनुरूप वह फिलबक्त एक तरफ कोरोना तो दूसरी तरफ बाढ़ की त्रासदी झेलेगी और ऊपर वाले की दुआ और रहमों करम के बूते ही वर्तमान जिंदगी की उम्र को अगले साल तक के लिए घसीट ले जाने की कोशिशें उन्हें स्वयं ही करनी है।