लंबी लॉक डॉउन अवधि में सबसे अधिक प्रभावित है समाज के बुद्धिजीवी

उर्दू के कलमकारों  को यथाशीघ्र आर्थिक सहायता प्रदान करें सरकार – अशरफ अस्थानवी

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फोटो – ऑल बिहार उर्दू जर्नलिस्ट फोरम के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार अशरफ अस्थानवी

लंबी अवधि से चल रहे लॉक डॉउन के कारण जो लोग सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं उनमें गरीब साहित्यकार, कवि तथा पत्रकार सम्मलित हैं। समाज का ये बुद्धिजीवी वर्ग है जिनका आत्म सम्मान इस बात की इजाज़त नहीं देता की अपनी कठिनाइयों को अपनी ज़बान पर लाकर किसी के आगे हाथ फैला सके। ऐसे लोगों की सहायता करना राज्य सरकार की प्रमुख जिम्मेवारी है।

इन्ही जिम्मेवारी की ओर ध्यान दिलाते हुए ऑल बिहार उर्दू जर्नलिस्ट फोरम ने बिहार के मुख्यमंत्री से अपील की है कि ऐसे लोगों को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित करके यथाशीघ्र सहायता की जाए..

ऑल बिहार उर्दू जर्नलिस्ट फोरम के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार अशरफ अस्थानवी ने आज पत्र भेजकर मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि दो महीने के लॉक डॉउन के कारण जंहा समाज का हर वर्ग प्रभावित हुआ है वहीं कलमकार वर्ग अर्थात पत्रकार साहित्यकार और कवि भी अत्यधिक प्रभावित हुए हैं विशेष रूप से उर्दू के पत्रकार कवि और साहित्यकार तो बहुत ही कष्ट में है।

सभी राजनीतिक, सामाजिक, साहित्यकार, और पत्रकारिता से सम्बन्धित सारी गतिविधियां ठप हो जाने के कारण उनकी आमदनी के तमाम श्रोत बंद हो गए हैं जिसके कारण उन्हें जबरदस्त आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। कई घरों में भूखों मरने तक की नौबत है लेकिन ये वर्ग चूंकि सफ़ेदपोश है इसलिए सवाली बनकर सामने नहीं आ सकता है और न ही भीख मांग सकता है ।

ये वो वर्ग है जो कोरोना के कहर में भी अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में जागृति पैदा करके कोरोना वॉरियर्स के कर्तव्य खामोशी के साथ अंजाम दे रहे है,  अगर इस संकट की घड़ी में सरकार की ओर से इन्हें संरक्षण प्रदान नहीं किया गया तो समाज उनकी बहुमूल्य सेवाओं से सदा के लिए महरूम हो जाएगा।

मुख्यमंत्री के नाम पत्र में आगे कहा गया है कि इस विकट प्रस्तुति में उर्दू के कलमकारों की आर्थिक सहायता करके उन्हें जीने का हौसला प्रदान करें और ईद पर्व से पूर्व उन्हें आर्थिक सहायता पहुंचाई जाने की दिशा में सार्थक पहल करें।

सरकार इस संबंध में बिहार उर्दू अकादमी और उर्दू निर्देशालय को भी निर्देश जारी कर सकती है और उनके माध्यम से भी उर्दू के कलमकारों को ईद का तोहफा पेश कर सकती है। पत्र में अशरफ अस्थानवी ने ये भी कहा है कि बिहार उर्दू अकादमी विगत दो वर्षों में उर्दू के साहित्यकारों की कोई सहायता नहीं कर सकी है।

मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग अंतर्गत उर्दू निर्देशालय हर वर्ष जश्न ए उर्दू का आयोजन करता है इसपर हर वर्ष चालीस लाख रुपए खर्च होते है लेकिन इस वर्ष सम्पूर्ण लॉक डॉउन के कारण जश्न ए उर्दू का कार्यक्रम लंबित है, वैसे भी जश्न ए उर्दू में 90 प्रतिशत गैर बिहारी उर्दू कलमकारों को ही आमंत्रित किया जाता है और बिहार से मात्र 10 प्रतिशत ही लोगों को जश्न का हिस्सा बन पाते हैं चालीस लाख रुपए की राशि को इस बार बिहार के जरूरतमंद उर्दू साहित्यकारों के दरम्यान पड़ी राशि सहायता के रूप में प्रदान कि जाए ताकि उर्दू के कलमकार को हौसला मिल सकें।