जमुई | हस्सान मंजिल संस्था, खानकाह धरमपुर, को झूठे अफवाह फैलाकर बदनाम करने की कोशिश

अलीगंज प्रखंड के धर्मपुर गांव की खबर जो  हिंदुस्तान अखबार में गलत प्रसारित किया गया जिसकी  पूरी पड़ताल कर बिहार मंथन ने उजागर किया।

हिंदुस्तान हिन्दी अखबार फेक न्यूज़
फोटो – हिंदुस्तान हिन्दी अख़बार द्वारा फेक न्यूज़ का प्रसारण कर अफवाह फैलाने की कोशिश

जमुई जिला से मोहम्मद सुल्तान अख्तर की रिपोर्ट।

जमुई जिला के अंतर्गत अलीगंज प्रखंड के धर्मपुर गांव में एक संस्था चलती है। जो संस्था हस्सान मंजिल के नाम से जानी जाती है, इस संस्था में गुरु द्वारा बड़ों को अमन और सद्भाव की शिक्षा दी जाती है। ईश्वर को पहचानने की शिक्षा होती है, और छोटे बच्चे भी पढ़ते हैं, छोटे बच्चे के लिए धार्मिक शिक्षण दी जाती है। यहां जनता कर्फ्यू से पहले  ही  बच्चों की  छुट्टी हो गई थी।

मगर जो शिक्षक  या बावर्ची  दरबान हैं, उन लोगों की छुट्टी नहीं हुई, और इसी बीच में जनता कर्फ्यू लग गया,जनता कर्फ्यू के बाद लॉक डाउन 31  मार्च तक हो गया, उसके बाद 14 अप्रैल और सभी के सभी  फंस गए, लेकिन हिंदुस्तान पेपर के प्रतिनिधि, संवाददाता ने इन बातों को गलत तरीके से प्रसारित किया,जो निंदनीय है।अच्छे पत्रकार की यह पहचान नहीं है।

फिर आगे लिखा यहां निजामुद्दीन से लोग आते हैं। रातों में लाइट जलाकर आते हैं, और दिल्ली से जुड़े  रहने की आशंका है, यह सारी बातें जो बिल्कुल गलत और बेबुनियाद है, जिसका बिहार मंथन के संपादक पुरजोर तरीके से खंडन करता है।

बिहार मंथन के संपादक खुद से जाकर असलियत जानने की कोशिश की। वीडियो किया फोटो लिया और यहां के सबसे पुराने लगभग 22 सालों से पढ़ा रहे शिक्षक कारी अशरफ  साहब से मिले जो वहां के पुराने शिक्षकों में है। उनसे लोगों तक सच्चाई सामने आने की खातिर  पूछा गया, वह खुद वीडियो में इन सभी बातों का खंडन किया,और उनलोगों ने कहा हमलोगों को यह सब कुछ नहीं मालूम,आप अभी बता रहे हैं।

तो मालूम भी हो रहा है। वरना मालूम भी ना होता। यह किसी की शाजीश है या राजनीतिक है। राजनीतिक तरीके से इसको कुछ संप्रदायिकता फैलाने वाले लोग  नफरत फैलाकर इसको गलत तरीके से बयान किया है। जो बिल्कुल ही गलत है।

यहां काम भी हो रहा है काम होने की बात है,  तो जब मदरसा खुला था तो खुले होने के दौरान काम हुआ, अभी जो बिल्डिंग है वह काफी नहीं, इसलिए जरूरत के तहत ऊपर बनाया जा रहा था। और जब बच्चे चले गए तो काम बंद हो गया। यह करोना महामारी का जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान निकाला था। उसके बाद से यहां बिल्कुल तौर पर बंद कर दिया गया। जबकि स्कूल मदरसा की बंदी के बाद यहां पांच छह बच्चे हैं, और 5 स्टाफ फंसे हुए हैं। वह भी काफी दूर के हैं, अरवल, गया इसी तरह से कोलकाता और पूर्णिया के लोग और उनके साथ दो-तीन बच्चे जो साथ आए हुए  हैं। वह फंसे हुए हैं, यहां के बहुत बड़े महा विद्वान गुरु हजरत हस्सान साहब रहमतुल्लाह अलैही यहां के गुरु बाबा जो अल्लाह के प्यारे हो गए। 

उनकी शिक्षा का उद्देश्य था,आपसी  भाईचारा,  आपसी मोहब्बत,  इस्लाम ने जो शिक्षा दी है। उसको पूरी तरह यहां लोग फॉलो करते हैं। यहां के उस्ताद और बच्चे काफी मिलनसार हैं, जो यहां के आम जनता  से बात सामने आती है। कुछ लोग हैं जो इस तरह से संप्रदायिकता, आपसी सदभाव को खत्म करना चाहते हैं।

जिसको खत्म नहीं करने दिया जाएगा। आज भी हर समाज में अच्छे लोगों की संख्या अधिक है। और हर समय में अच्छे लोग रहते  हैं। इस मौके पर डॉक्टर शम्स रजा साहब, मोहम्मद शाहिद, मोहम्मद सिकंदर, मोहम्मद मुर्तुजा, और इस मदरसे के संचालक मौलाना इसराक़ साहब, और मदरसे के पुराने शिक्षक कारी अशरफ साहब,मौलाना सोहैब साहब, कारी जहांगीर साहब, और कमरुद्दीन साहब  मौजूद रहे।