कबीरीया ट्रस्ट बड़ी गुलनी द्वारा गल्ला सामग्री ग्रामीणों में बिना भेदभाव के बांटा गया।

कबीरीया ट्रस्ट बड़ी गुलनी द्वारा गल्ला सामग्री
फोटो – कबीरीया ट्रस्ट बड़ी गुलनी द्वारा कोरोना के कर्फ्यू में खाध्य सामग्री का वितरण किया गया

नवादा जिला से मोहम्मद सुल्तान अख्तर की रिपोर्ट।

नवादा जिला के अंतर्गत पकरीबरावां प्रखंड के बड़ी गुलनी गांव के निवासी स्व हाजी यासीन साहब और स्व हाजी हकीम साहब द्वारा यह कार्य एक जमाने  से होता आ रहा है। जनता की  परेशानी उनलोगो से देखी नहीं जाती,यही  कारण वश जनता  के लिए हमेशा आगे आगे रहते  हैं।

बड़ी गुलनी  मोड़ जिसको कुटिया मोड़ भी कहते हैं। कुटिया मोड़ पर 1946 में मुसाफिरखाना बनवाना। फिर कुटिया मोड़ से गुलनी गांव तक रोड का बनवाना, गांव मोहल्ले में नाली कुआं खुदवाना, यह उनका एक सराहनीय कार्य रहा है।

जो कभी नहीं भुलाया जा सकता।  अभी भी इस नेक कार्य को करने में उनके परिवार के लोग आगे हैं। जाड़े के मौसम में गरीब बच्चों को गर्म कपड़ा और लोगों में कंबल बांटने का सिलसिला जारी है। इनका अलकबीर पॉलिटेक्निक कॉलेज जमशेदपुर में चलता है। जहां बिना भेदभाव के बच्चों का एडमिशन लिया जाता है। इनका  हर काम  बिना भेदभाव के इंसानियत के लिए होता है।

इनके पूरे परिवार में इसनियत और दया, कूट-कूट कर इनके खानदान में भरा हुआ है बगैर भेदभाव के यह सारा काम अल्लाह को राजी करने के लिए करते हैं। आज भी आपातकालीन स्थिति में गरीब मजदूरों की  मदद आगे आए हैं।

उनका का एक इदारा जामिया कबिरिया के नाम से गुलनी भी चल रहा है। दीनी संस्था है,  और उस संस्था से आज उन्हीं के पुत्र डॉक्टर सलीम साहब और स्व हाजी हकीम साहब के पोता एवं स्व हाजी फहीम साहब के पुत्र प्रोफेसर रिजवान साहब यह कार्य आज किया, लोग बहुत दुआए दे रहे हैं। और इनका साथ देने के लिए उनके चाचा मौलाना वसीम नदवी और इनके परिवार के अन्य सदस्य भी इनके साथ आगे आगे हैं।

इस आपात स्थिति में जब के रोजाना कमाने वाला मजदूर  लोग एक-एक दाने के लिए तरस रहा था, वहां यह हजरात मसीहा बन कर आगे आए हैं। रोज कमाते, रोज खाते, ऐसे लोगों का ख्याल रखते हुए उन्होंने अभिलंब राहत सामग्री बांटने का निर्णय लिया, और 55 पैकेट बड़ी गुलनी  गांव में बांटा गया।

पैकेट दूसरे गांव में भी बांटा जाएगा, आज इस पैकेज को बांटते हुए एक-एक करके बांटा गया जामिया कबीरया स्थल पर 1 मीटर की दूरी पर दायरा बना दिया गया, उसके बाद बांटा गया। यह सिलसिला चल ही रहा था। कि पूरे गांव में शोर मच गया। कि राहत सामग्री बांटा जा रहा है, लोग इतने परिशान हाल हैं कि पूरा गांव टूट पड़ा। लेकिन उन्हें मस्जिद के गेट से दूर रखा गया। और भीड़ पर कुछ ही क्षणों  कंट्रोल कर लिया  गया।

जिनका नाम पहले से मौजूद लिस्ट में था और जो ज़यादा मजबुर थे उन्हें ही गल्ला दिया गया। हमारे सवदाता स्थिती को देखते हुए बिहार सरकार से आग्रह किया है, कि अभिलंब राहत सामग्री बैगैर काला बाजारी के बांटना शुरू कर दें। वरना इस परिस्थिति में बहुत सारे लोग भूख से मर जाएंगे। मजबूर बहुत सारे लोगों को खाने-पीने की सामग्री का जुटान नहीं हो पा रहा है।

यह 55 पैकेट यहां गांव वालों के लिए कम पड़ गया। यदि पूरे गांव के लोगों को बांटा जाए तो 1000 पैकेट बांटना पड़ेगा। इससे यह साबित होता है कि लोग इस लॉक डाउन में काफी मजबूर हो चुके हैं। जबकि यह सिर्फ और सिर्फ गरीब और एक रोजा काम करने वाले लोगों के लिए राहत सामग्री थी।

लेकिन लोगों में इस कदर बेचैनी पाई गई। कि आने वाले दिनों में और भी पैकेट बांटना पड़ सकता है। केंद्र सरकार और बिहार सरकार जितना जल्द हो सके जनता परीशानी को समझें, क्योंकि लोकल एनजीओ या लोकल ट्रस्ट कितने लोगों की समस्या को दूर कर सकता है।

एंजीओ और  प्राइवेट ट्रस्ट में सलाहियत कहां। लोगों की समस्याओं को दूर नहीं कर सकता,लोगों की सम्सियाओं को जनता की आवाज़ को सरकार तक सिर्फ पहुंचा सकता है।

इसके साथ इस कार्य में सबसे आगे आगे रहे, सबको पैकेट करने में, लगाने में, जुटे मोहम्मद हारून, हाफिज कासिम साहब, मोहम्मद सिकंदर, और मोहम्मद अरमान, मोहम्मद अल्तमस, और इंजीनियर इरफान और मोहम्मद कमाल भी साथ साथ रहे, लोगों को तरतीब दिया,  और एक-एक करके लोग आते गए, लेते गए, और करुणा का पूरा ख्याल रखा गया। एक से डेढ़ मीटर की दूरी में दायरा बनाकर राहत सामग्री दिया गया। और लोग सामग्री को ले रहे थे,और जा रहे थे,  इस मौके पर हाफिज फहीम मोहम्मद दाऊद आदि मौजूद थे।