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कोरोना के चलते अंतरराष्ट्रीय-अंतरप्रांतीय सीमाओं पर अवस्थित ” चिकेन नेक ” सीमांचल में जान का चौतरफा खतरा

भारत नेपाल के सीमा पर भी लॉक डाउन
फोटो – भारत नेपाल के सीमा पर भी लॉक डाउन

हमलावर कोरोना के चलते नेपाल, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय-अंतरप्रांतीय सीमाओं पर अवस्थित ” चिकेन नेक ” सीमांचल में जान का चौतरफा खतरा

  • पुलिस की लाठी प्रक्रिया से अभी तक बनी है जनता की सुरक्षा
  • नेपाल के लॉक डाउन व बॉर्डर सील से भारत में वायरस के प्रवेश के खतरे हुए कम
  • लेकिन , नेपाल में ही मिल चुके हैं कई कोरोना पॉजिटिव : तीन का चल रहा है इलाज
  • सीमांचल में वोट की राजनीति करने वाली पार्टियां भूमिगत
  • जनता को बचाव के तरीके बताते भी कहीं नहीं आ रहे हैं नजर
  • पुलिस की लाठियां जीने के मार्ग को कर रही है प्रशस्त

सीमांचल से अशोक/विशाल की रिपोर्ट ।

यूं तो कोरोना को लेकर “जनता कर्फ़्यू” के एक दिवसीय ” ठहराव ” से ही सीमांचल की अति पिछड़ी अशिक्षित जनता की शिट्टी पिट्टी गुम हो गई थी लेकिन उसी की कड़ी में जारी हुए 14 दिवसीय “लॉक डाउन” की धमक से सीमांचल की जनता की रही-सही सांसें भी विल्कुल थम सी गई है।

बाबजूद इस स्थिति के , सीमांचल की जनता को सरकारी आदेश के तहत जारी “कर्फ़्यू नुमा” “लॉक डाउन” को तहे दिल से बर्दाश्त करने की जहमत सिर्फ इसलिए उठानी पड़ रही है कि इस उपाय से ही “जानलेवा छूत की बीमारी” के स्रोत ” कोरोना वायरस ” से बचाव की उम्मीदें हैं।

कोई घर से बाहर नहीं निकले और बेबजह सड़कों , हाट-बाजारों , में भीड़ न लगाये इसके लिए पुलिस को लाठियां भांजने की मजबूरियां झेलनी पड़ रही है लेकिन , सीमांचल के नासमझ युवाओं और रोज कमा कर घर-परिवार के पेट भरने वाले मजदूरों को सरकार की ऐसी सुरक्षात्मक कार्रवाई रुचती-पचती दिखाई नहीं दे रही है।

सरकार की ओर से जनता के जीवन की रक्षा करने के लिए उठाये जा रहे “लॉक डाउन” जैसे कदम पर सीमांचल की जनता “नाक भौं” सिकोड़ रही है तो इसके लिए सीधी तौर पर सीमांचल की वे “राजनीतिक पार्टियां” जिम्मेवार हैं जो आज तक सीमांचलवासियों के बीच ” तुष्टिकरण ” की रणनीति अपनाकर सिर्फ़ “वोट हड़पने” की राजनीति करती रही लेकिन सीमांचलवासियों को कभी सचेत रहने की सलाह कभी नहीं दी ।

सीमांचल(पूर्णिया प्रमंडल) पूर्वोत्तर भारत में प्रवेश का ऐसा “मार्ग” है जो भारतीय राजनीति के मानचित्र में ” चिकेन-नेक ” के नाम से अतिसंवेदनशील बताया जाता रहा है। इसके एक ओर विल्कुल सटा पड़ोसी देश ” नेपाल ” है तो दूसरी ओर से सटे पड़ोसी राज्य “पश्चिम बंगाल” से होकर काफी निकट में ही ” बांग्लादेश ” की सीमा है।

जाहिर सी बात है कि ” अंतरराष्ट्रीय और अंतरप्रांतीय सीमाओं ” से जुड़े इस सीमांचल में किसी ओर से अवैध घुसपैठियों के प्रवेश के खतरे मंडराते रहे तो किसी ओर से तस्करों व भारत विरोधी विदेशी तत्वों की गतिविधियों के खतरे उत्पन्न रहते आये।

तेन और बस सर्विस भी पूरी तरह बंद
फोटो – ट्रेन और बस सर्विस पूरी तरह लॉक डाउन

इसी क्रम में फ़िल्बक्त सीमा पार से ” चीन की पैदावार महामारी कोरोना वायरस ” के खतरे भी इस सीमांचल में उत्पन्न हो गए हैं ।

लिहाजा , इस सीमांचल की नाजुकता पर सरकार और सरकारी तंत्रों की खास नजरें जा टिकी हैं , ताकि , पड़ोसी देश या पड़ोसी राज्य की मार्गों से होकर उक्त जानलेवा वायरस का प्रवेश सीमांचल की राह शेष भारत की बर्बादी का कारण न बन जाये।

यही कारण है कि ” राष्ट्रीय लॉक डाउन ” की सफलता के लिए सम्पूर्ण शासन-प्रशासन-तंत्र पूरी शिद्दत से भिड़ गया है। सख्त सख्ती बरती जा रही है, पुलिस लाठियां लहराई जा रही है , ताकि कोरोना का संक्रमण न फैले और भारतीय जनता की जान बच जाय ।

ऐसा इसलिए कि भारत के ” कम्युनिटी ट्रांसमिशन ” ( थर्ड स्टेप ) में  प्रवेश का खतरा बढ़ गया है ।

ताज़ातरीन खबरों के अनुसार , सीमांचल से सटे पड़ोसी देश नेपाल में अभी तक कोरोना संक्रमित तीन नेपाली नागरिकों की पहचान की जा चुकी है ,जिनके इलाज नेपाल के टेकु स्थित शुक्रराज ट्रॉपिकल एवं सुरूवा रोग अस्पताल में कराये जा रहे हैं ।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार , अपने लॉक डाउन के प्रथम सप्ताह में ही अगर भरतीय जनता की सबल भागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी तो थर्ड स्टेज़ का शिकार होकर भारतीय क्षेत्र को बेशुमार मौतों का सामना करना पड़ सकता है।

वैसे , सीमांचल के लिए सुकूनदायक खबर है कि स्वयं नेपाल भी लॉक डाउन की एहतियात से गुजर रहा है और भारत की ओर हरतरह की आवाजाही को रोक दिया है।

इस बीच केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से भी सभी धार्मिक स्थलों के नुमाइंदों को सख्त चेतावनी दी गई है कि आम जनता की जानमाल की सुरक्षा के मद्देनजर हरेक सामुहिक धार्मिक गतिविधियों को रोक दिया जाय ।

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