यूएन के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस कहते हैं कि नागरिकता संशोधन कानून मुस्लिमों को देश विहीन कर सकता है

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यूएन के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस
Jamil_Ibrahimi

जमील इब्राहिमी की रिपोर्ट

यूएन प्रमुख का कहना है कि वह भारत में अल्पसंख्यकों के भविष्य को लेकर व्यक्तिगत रूप से चिंतित हैं। साक्षात्कार के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या वह भारत के नए कानून को लेकर चिंतित हैं? इस सवाल के जवाब में गुटरेस ने कहा, ‘निश्चित रूप से। मैं सीएए को लेकर चिंतित हूं।

क्योंकि यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें यूएन की संबंधित इकाई अधिक सक्रिय है। शरणार्थियों के लिए वर्तमान उच्चायुक्त इस स्थिति को लेकर सक्रिय हैं। इस तरह के कानूनों से नागरिकता जाने का खतरा पैदा होता है। जब किसी नागरिकता कानून में बदलाव किया जाता है तो यह ख्याल रखना बहुत जरूरी है कि किसी की नागरिकता नहीं जाए।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि भारत का नया नागरिकता कानून बड़ी संख्या में मुस्लिमों को निष्क्रिय कर सकता है। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटरेस ने भारत के आंतरिक मामले पर टिप्पणी की है।

पाकिस्तान के तीन दिवसीय दौरे पर आए यूएन चीफ गुटरेस ने सीएए पर चिंता जताते हुए कहा कि जब भी नागरिकता कानून में बदलाव होता है तो यह सुनिश्चित होना चाहिए कि इससे किसी की नागरिकता न जाए। इसके लिए सब कुछ करना जरूरी होता है। कोई भी देश विहीन न हो।

पाकिस्तान में द डॉन अखबार को दिए एक साक्षात्कार में, उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम के बारे में चिंता व्यक्त की, और भारत को मानवीय रूप से कार्य करने का आग्रह किया।

मुस्लिम समुदाय पर कानून के प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, ”भारत में मुसलमानो को देश विहीन होने का खतरा है।

श्री गुटेरेस ने कहा कि वह नए नागरिकता कानून के लागू होने के बाद भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के भविष्य के बारे में चिंतित थे, जो बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का प्रयास करता है।

उन्होंने कहा कि नए नागरिकता कानून लागू करते समय, यह सुनिश्चित करने के लिए उपाय किए जाने चाहिए कि वे वैधानिक नागरिक न बनाएं।

श्री गुटेरेस ने चार दिनों के लिए पाकिस्तान का दौरा किया, जिसके दौरान उन्होंने यू.एन. शांति मिशन के लिए दुनिया भर में मिशन में अग्रणी योगदानकर्ता के रूप में देश की भूमिका को स्वीकार किया।

कश्मीर के संदर्भ में गुटरेस ने कहा कि कश्मीर पर यूएन के उच्चायुक्त की दो रिपोर्टों ने घाटी के घटनाक्रम के बारे में स्पष्ट रूप से बयां करने में अहम भूमिका निभाई है। यह जरूरी है कि इन रिपोर्ट को गंभीरता से लिया जाए। यूएन चीफ ने रविवार को कहा था कि वह कश्मीर के हालात को लेकर चिंतित हैं और लंबे समय से अटके मुद्दे के समाधान के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता के लिए तैयार हैं। हालांकि, भारत ने उनकी इस पेशकश को ठुकरा दिया था।