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कांग्रेस में भी सांगठनिक फेरबदल की आशंका से पुराने निष्क्रिय घाघ पार्टी पदाधिकारियों की नींद हुई हराम

बिहार प्रदेश कमिटी के नये फ़रमान से सीमांचल की कांग्रेस में खलबली

सीमांचल से अशोक / विशाल की रिपोर्ट ।

बिहार में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी के आलोक में राष्ट्रीय जनता दल ( राजद ) ने जहां अपने संगठन में आरक्षण की व्यवस्था लागू कर पूरे बिहार के जिलों में नये राजद जिलाध्यक्षों का मनोनयन किया , वहीं , कांग्रेस की बिहार प्रदेश इकाई ने भी कुम्भकर्णी निंद्रा में सोये अपने दल के निष्क्रिय नेताओं व पदाधिकारियों को दरकिनार कर नये सक्रिय व जुझारू कांग्रेस नेताओं को जिम्मेवारियां सौंपने का नया फरमान जारी कर दिया है।

कांग्रेस के इस नये फ़रमान से सीमांचल के जिलों में वर्षों से विभिन्न संगठनात्मक पदों की कुर्सी पर कुम्भकर्णी निंद्रा में अचेत पड़े कांग्रेस नेताओं की नींद हराम होने लगीं हैं तो दूसरी ओर नये कांग्रेस नेताओं में उन पदों पर काबिज़ होने की होड़ मचने लगी है।

सीमांचल और कोशी के कुल 37 विधानसभा क्षेत्रों में कभी कांग्रेस के ही पताके लहराते दीखते थे लेकिन अभी के समय में कांग्रेस सीमांचल में अपने अस्तित्व को बचाने की चिंता में डूबी हुई है।

2019 के बीते लोकसभाई चुनाव में एकमात्र इस सीमांचल के किशनगंज की सीट पर ही कांग्रेस को फ़तह हासिल हो पायी थी और इसके अलावा पूरे बिहार से कांग्रेस का सूपड़ा साफ हो गया था।

जाहिर सी बात है कि उक्त शर्मनाक हार से बिहार की कांग्रेस की देश भर में थू थू हुई थी लेकिन ताज्जुब की बात रही थी कि उक्त शर्मनाक हार से क्षतविक्षत हुई बिहार की कांग्रेस कमिटी ने संगठन की मजबूती की दिशा में कोई सांगठनिक फेरबदल करने का साहस नहीं दिखाया।

अब जब दिल्ली की विधानसभा चुनाव में भी पार्टी की फिर से जबरदस्त थू थू हो गई है तो बिहार की कांग्रेस कमिटी ने आने वाले बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी के आलोक में नये संगठन को मैदान में काबिज़ करने की ललक दिखाते हुए फरमान जारी किया है कि निष्क्रिय कांग्रेस पदाधिकारियों को हटाकर नये जुझारू नेताओं को विभिन्न सांगठनिक पदों पर काबिज़ कराया जाय।

जिस कारण सीमांचल के उन सभी पुराने घाघ कांग्रेस नेताओं की बेचैनी बढ़ने लगी है जो पार्टी में विभिन्न पदों की कुर्सियों पर वर्षों से कुंडली मार कर चुनावों के दौरान ज्यादातर दलविरोधी कार्यों को ही अंजाम दिलाने का काम करते आये थे और उसके कारण ही सीमांचल में कांग्रेस के ग्राफ़ दिनप्रतिदिन लुढ़कते चले जा रहे थे।

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