अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी किशनगंज कैंपस
बिहार मुख्य खबर राजनीती राज्य राष्ट्रिय

किशनगंज AMU की शाखा को लेकर सवालों के घेरे में केन्द्र सरकार कहीं मुस्लिम बहुल क्षेत्र में स्थापित होने के कारण तो नहीं हो रही है उपेक्षा की शिकार

अगर यह ऐतिहासिक सच्चाई है कि भारत के अधिकांश खास स्थल और शैक्षणिक संस्थान विभिन्न नदियों के किनारे पर ही अवस्थित हैं तो महज़ छह साल पहले बिहार के सीमांचल के किशनगंज में स्थापित किये गये अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की शाखा को नदी के किनारे का बहाना दिखाकर वाधित करने का सरकारी प्रयास सीमांचलवासियों के लिए आश्चर्यजनक नहीं तो क्या है ?

अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी किशनगंज कैंपस
फोटो – अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी किशनगंज कैंपस के बंजर पड़े ज़मीन पर झंडोतोलन करते वाईसचांसलर

सीमांचल से अशोक/विशाल की रिपोर्ट

  • AMU की भवन विहीन परती पड़ी जमीन: बीते गणतंत्र दिवस पर यहां भी किये गए थे झंडोत्तोलन ।
  • जिस किशनगंज में महानंदा नदी की कछार पर स्थापित डॉ कलाम कृषि कॉलेज में कोई वाधा नहीं , उस किशनगंज की एएमयू की शाखा में महानंदा नदी की आड़ में निर्माण कार्य पर एन एम सी जी (दिल्ली) की ओर से रोक क्यों ?
  • जबकि अमु AMU की शाखा के लिए प्राप्त जमीन है महानन्दा से काफ़ी दूर ।
  • सिर्फ़ मुस्लिम ही नहीं बल्कि हिंदू छात्रों के लिए भी है शिक्षा का यह केन्द्र एएमयू देश की ऐसी शिक्षण संस्थान है जहां हिंदू और मुस्लिम छात्रों की पढ़ाई समान रूप से होने की व्यवस्था चलती आ रही है।

बीते गणतंत्र दिवस पर दीखे एएमयू कर्मियों के हृदय विदारक दृश्य : जब निदेशक ने परती पड़ी एएमयू की जमीन पर झंडोत्तोलन उसी उत्साह के साथ किया ,जिस उत्साह के साथ अल्पसंख्यक छात्रावास स्थित एएमयू की शाखा कार्यालय प्रांगण में किये ।

इस सवाल का जबाब पाने के लिए सीमांचलवासियों का हरेक महकमा बेचैन है ।
क्योंकि केंद्रीय सरकार की स्वीकृति से वर्ष 2013 से प्रारंभ हुए एएमयू की किशनगंज शाखा के लिए बिहार की सरकार से जमीन प्राप्त होने के बाद किशनगंज की एएमयू शाखा की विधिवत स्थापना वर्ष 2014 में पूरे तामझाम के साथ की गई थी ।

इस शाखा के लिए बिहार की नीतीश कुमार की सरकार ने अपनी बिहार सरकार की ही 224 एकड़ जमीन हस्तांतरित किये और तत्कालीन केंद्रीय सरकार की ओर से 136 करोड़ की राशि इस शाखा के लिए स्वीकृत की गई थी । इस तरह एएमयू की किशनगंज शाखा की स्थापना के 6 वर्ष बीत गए ।

लेकिन , ताज्जुब की बात है कि इन छह वर्षों के अंतराल में महज़ 10 करोड़ रुपये ही इस शाखा को नसीब कराये जा सके और उस पर तुर्रा यह कि इस शाखा पर महानन्दा नदी के किनारे स्थापित होने का झूठा आरोप लगा कर इसके निर्माण कार्य को भी सरकारी स्तर से रोकने का काम कर दिया गया ।

झूठा आरोप इसलिए कहा जा सकता है कि एएमयू की किशनगंज शाखा को बिहार की सरकार से प्राप्त भूमि महानन्दा नदी से काफी दूरी पर अवस्थित है और एएमयू की शाखा के किसी भी निर्माण कार्य से नदी की धारा को खतरा उत्पन्न होने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है।

लेकिन , आश्चर्य की बात है कि भारत सरकार की क्लीन गंगा से सम्बंधित दिल्ली की एन एम सी जी ने एनजीटी की अनुशंसा पर यह कह कर एएमयू के किसी भी निर्माण कार्य पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दिया कि निर्माण कार्य से नदी की धारा पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। एन एम सी जी का यह भी सवाल रहा है कि उक्त नदी किनारे की भूमि को एएमयू ने सरकार से प्राप्त करने के पहले एन ओ सी क्यों नहीं लिया था ।

इस संदर्भ में यहां चौंकाउं बात यह है कि कुछ ही दूरी पर अर्राबाड़ी में नवनिर्मित उस डॉ कलाम एग्रीकल्चर कॉलेज की ओर भारत सरकार की इन संस्थाओं का ध्यान क्यों नहीं गया जो वास्तविक तौर पर महानन्दा नदी की ही कछार पर स्थापित की गई हैं और वहां भी बिहार की सरकार से ही कॉलेज के लिए 350 एकड़ सरकारी भूमि प्रदत्त हैं ।

दूसरे सवाल यह भी खड़े हैं कि एएमयू की किशनगंज शाखा के लिए बिहार की सरकार से मिली जमीन से जब महानन्दा नदी के अस्तित्व पर खतरे उत्पन्न होने की सम्भावना थी तो एएमयू की किशनगंज की शाखा के लिए सरकार ने वैसी जमीन क्यों हस्तांतरित किये ।

भारत भर में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की किशनगंज को लगाकर मात्र तीन शाखाएं अब तक स्थापित हुई हैं।

एक शाखा पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में और दूसरी शाखा केरल के मल्लापुरम में पूर्व से स्थापित रहने के बाद बिहार के सीमांचल(पूर्णिया प्रमण्डल) के किशनगंज में एएमयू की तीसरी शाखा के स्थापना की पहल केन्द्र की सरकार ने तब की जब सीमांचल एवं आसपास के इलाकों में गहरायी अशिक्षा को दूर कराने के प्रयास के तहत सभी राजनैतिक दलों ने उक्त शाखा की स्थापना की मांग करते हुए लगातार आंदोलन किया था।

आंदोलन सफलीभूत हुए और विधिवत इस शाखा के स्थापना कर दिये गए ।

लेकिन , आगे के सारे कामकाज एन एम सी जी की आड़ में रोक भी दिये गए।

चर्चा है कि सीमांचल जैसे बिहार के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल इलाकों में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की शाखा की स्थापना के मद्देनजर केंद्रीय सरकार नाममात्र की भी दिलचस्पी रखने को तैयार नहीं है और तरह तरह के बहाने बना कर इसके निर्माण कार्य में बाधाएं उत्पन्न करने के लिए इस शाखा को राजनीति की पटल पर छेड़छाड़ करने का विषय बना कर मजे ले रही है ।

चर्चा में ऐसी बातें इसलिए आ रही हैं कि 6 साल पहले से इस शाखा के लिए सरकार से स्वीकृत 136 करोड़ की राशि अब तक क्यों नहीं भुगतान किये गए और महज़ 10 करोड़ की राशि मात्र देकर चुप्पी क्यों साध ली गई है।

यही नहीं , इस मामले में सर्वाधिक महत्वपूर्ण ज्वलंत सवाल यह भी हैं कि महज़ एक शाखा डायरेक्टर के अलावे किशनगंज की एएमयू की शाखा के लिए अभी तक एक भी पद के सृजन क्यों नहीं किये जा सके हैं।

एएमयू की इस शाखा के लिए टीचिंग स्टॉफ के रुप में कुल 25 पद की स्वीकृति की जरूरत है और गेस्ट टीचर के पदस्थापना से भी यहां बेहतर शिक्षा प्रदान की जा सकती है।वहीं इस शाखा के लिए 20 नन टीचिंग स्टाफ़ के पद की स्वीकृति की भी सख्त जरूरत है ।

अर्थात , इतनी व्यवस्था के बाद इस सेंटर से एमबीए – बीएड – बीए एलएलबी के कोर्स भलीभांति चलाये जा सकते हैं।

इस शाखा के भलीभांति संचालन होने से छात्रों को बाहर जाने की नौबत नहीं आएगी।

लेकिन , आश्चर्यजनक बात है कि केन्द्र की सरकार इस बिंदू पर लगातार चुप्पी साधे बैठी है।

तुर्रा यह कि अपना भवन के अभाव में अपनी स्थापना काल से ही बिहार की सरकार के आदेश पर इस शाखा में पठन-पाठन का काम किशनगंज जिले के अल्पसंख्यक छात्रावास में ही चलाया जा रहा है ।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के भी सी प्रोफेसर तारिक़ मंसूर ने किशनगंज की एएमयू की शाखा की कामयाबी के लिए भरपूर सहयोग देना शुरू किया है। जिसके प्रमाण हैं कि किशनगंज की एएमयू की शाखा को भारतीय शिक्षा जगत में शुमार कराते हुए भी सी ने यहां 11 वीं की टेक्स्ट परीक्षा का सेंटर दे दिया और 22 फरबरी से ही 21 विषयों के डिस्टेन्स लर्निंग कोर्स भी शुरू करने का आदेश दिया ।

लेकिन , जर्जर अल्पसंख्यक छात्रावास में चल रहे किशनगंज एएमयू शाखा अपने भवन के अभाव का रोना लगातार रो रहा है।

इस सम्बंध में एएमयू के स्थानीय कर्मियों के हृदयविदारक दृश्य बीते दिनों गणतंत्र दिवस के अवसर पर उस समय देखने को मिले , जब निर्माण कार्य के अभाव में लगातार छह वर्षों से परती अवस्था में पड़ी एएमयू किशनगंज शाखा की जमीन पर शाखा निदेशक एवं शिक्षकों ने उसी उत्साह के साथ झंडोत्तोलन किया , जिस उत्साह के साथ अल्पसंख्यक छात्रावास में चलने वाले एएमयू की शाखा कार्यालय प्रांगण में गणतंत्र दिवस पर झंडोत्तोलन किये गए।कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि फ़िल्बक्त किशनगंज में एएमयू की शाखा होने के एहसास मीडिया जगत से ही हो पा रहे हैं। न कि किसी ख़ास शैक्षणिक संस्थान भवन को देखकर ।

यह अलग बात है कि वहीं दूसरी ओर बिहार की सरकार द्वारा नवनिर्मित कृषि कॉलेज के विशालकाय खूबसूरत भवन अट्टहास करते हुए आने जाने वाले राहगीरों को पल पल एहसास कराते हैं कि वहां कोई शैक्षणिक संस्थान मौजूद हैं।

शाखा निदेशक डॉ हसन इमाम को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से है भरोसा एवं जायेंगे गुहार लगाने, बड़े पिकनिक स्पॉट हरियाली का भी करेंगे निर्माण

किशनगंज की एएमयू शाखा का फ़िल्बक्त बड़ा सौभाग्य यह नजर आ रहा है कि यहां पदस्थापित नवागन्तुक डायरेक्टर डॉ हसन ईमाम ने भी अपने संस्थान के अस्तित्व को स्थापित कराने के लिए ताबड़तोड़ दौड़धूप प्रारंभ कर दी है।

हाल में भी उन्होंने पटना जाकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से संस्थान में सरकारी स्तर से खड़े किए जा रहे बाधाओं को दूर कराने का आग्रह किया है।जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी सकारात्मक पहल करने का भरोसा दिलाते हुए केंद्रीय मानव संसाधन विभाग को तत्काल पत्र लिखा

शाखा डायरेक्टर ने इच्छा जताई है कि शाखा के लिए सरकार के पास स्वीकृत धनराशि ज्यों ही रिलीज हो कर शाखा के हाथ पहुंचेंगी , त्यों ही शाखा के एक ब्लॉक के निर्माण कार्य का शिलान्यास बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों कराया जाएगा और एक दूसरे ब्लॉक के निर्माण कार्य का शिलान्यास प्रधानमंत्री के हाथों कराये जायेंगे। इस बाबत शाखा निदेशक डॉ हसन इमाम मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के दरवाजे पर गुहार लगाने की तैयारी में हैं ।

इस बीच एक ओर शाखा निदेशक डिस्टेंस लर्निंग कोर्स के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू करने में लगे हैं तो दूसरी ओर जिस अल्पसंख्यक छात्रावास में एएमयू शाखा की पढ़ाई चालू हैं उस पूरे भवन की डेंटिंग पेंटिंग का कार्य भी करा रहे हैं ।शाखा सूत्रों के अनुसार , फ़िल्बक्त सारे रखरखाव कार्य वी सी के हेड से किये जा रहे हैं।

इस संवाददाता से एक अनौपचारिक बातचीत के दौरान शाखा निदेशक ने बताया कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की इच्छाओं के अनुरूप एएमयू की किशनगंज शाखा की भूमि पर सीमांचल का सबसे बड़ा हरियाली पिकनिक स्पॉट खड़ा करने की योजना है जिसमें सैलानियों के पिकनिक के समस्त संसाधन उपलब्ध होंगे।

सिर्फ़ मुस्लिम ही नहीं बल्कि हिंदू छात्रों के लिए भी है शिक्षा का यह केन्द्र एएमयू देश की ऐसी शिक्षण संस्थान है जहां हिंदू और मुस्लिम छात्रों की पढ़ाई समान रूप से होने की व्यवस्था चलती आ रही है। किशनगंज एएमयू सेंटर में भी ऐसी ही व्यवस्था है और बराबर संख्या में हिंदू और मुस्लिम छात्रों को यहां शिक्षा दी जा रही है।