फिर ठगत बगुलाभगत, झांसे की राजनीति के तहत नीतीश करा रहे हैं अपने नेताओं से दिखाबटी NRC विरोध

बिहार की जनता को दिग्भ्रमित कराने के लिए एक ओर जारी है प्रशांत किशोर की एनआरसी विरोधी वाकपटुता तो दूसरी ओर सीमांचल में जदयू विधायक की एनआरसी विरोधी आंदोलन में सहभागिता

  • झांसे की राजनीति के तहत नीतीश करा रहे हैं अपने नेताओं से दिखाबटी विरोध
  • एआईएमआईएम करती आ रही है सीमांचल की जनता को आगाह तो राजद नेता एमआइएम को बता रहे हैं भाजपा की बी पार्टी
  • विरोधी दलों की आपसी उठापटक के बीच जारी हैं सीएए के विरोध

सीमांचल(अशोक/विशाल) ।

यूं तो शाहीनबाग़ से सब्जीबाग व शांतिबाग़ तक सीएए-एनआरसी-एनपीआर के विरोध में जारी शांतिपूर्ण आंदोलन लगातार सुर्खियां बटोर रही है लेकिन इस विरोध आंदोलन में बिहार के सीमांचल के किशनगंज और अररिया को उपरोक्त स्थानों की तुलना में नाममात्र भी कम नहीं आंका जा सकता है।

सीमांचल के किशनगंज में आंदोलन को हवा देने में एआईएमआईएम काफी सक्रिय है तो अररिया में राजद की सक्रियता परवान चढ़ी है ।

कांग्रेस की ओर से भी किशनगंज और अररिया में लगातार प्रदर्शन व सभाओं के सिलसिले जारी हैं। नागरिकता कानून के विरोध में जारी आंदोलन के क्रम में सीमांचल में नई बात यह देखने को मिल रही है कि यहां बिहार की सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन की घटक जदयू के विधायक भी आंदोलन की सभी गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं ।

किशनगंज क्षेत्र में जदयू के दो विधायक क्रमशः नौशाद आलम और मुजाहिद आलम हैं और दोनों ही जदयू के आलाकमान सह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अति प्रिय विधायकों की शुमार में शामिल हैं।

इन विधायकों की आंदोलन में सहभागिता को देखकर विपक्षी दलों में आश्चर्य व्याप्त है कि जिनके आलाकमान ने ही केन्द्र सरकार के नागरिकता कानून का खुलकर समर्थन किया है तो भला उनके विधायकगण नागरिकता कानून के विरोध की आग में हाथ सेंकने कैसे शामिल हो रहे हैं ?

चर्चा है कि नीतीश कुमार की नेतृत्व वाली जदयू के नेताओं ने इस सीमांचल की मुस्लिम बहुलता के मद्देनजर अपने मुस्लिम वोट बैंक को बरकरार रखने की कोशिश में झांसे की राजनीति के तहत अपनी पार्टी और पार्टी के गठबंधन दल सत्तारूढ़ भाजपा की नीतियों के खिलाफ आक्रोशित लोगों की भीड़ में शामिल होने का दिखाबटी नाटक कर रहे हैं जो सीमांचल की आम जनता भी समझ रही है।

किशनगंज जिले में इस मामले पर फिलबक्त सबसे ज्यादा किरकिरी कोचाधामन विधानसभा क्षेत्र के जदयू विधायक मास्टर मोजाहिद आलम की होती दिखाई दे रही है ,क्योंकि जदयू के इस विधायक की सीट पर अब पूरी तरह से एआईएमआईएम की गिद्ध दृष्टि अड़ गई है ।

इस क्रम में एमआइएम जनता को नीतीश कुमार की चालबाजी से आगाह करते हुए सवाल कर रही है कि अगर सचमुच में जदयू के ये विधायक नागरिकता कानून के विरोध में सामने आ कर आंदोलनकारियों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की बेताबी में हैं तो उन्हें बिहार की भावी राजनीतिक परिदृश्य के मद्देनजर जदयू को सबसे पहले तिलांजली दे देना चाहिए । न कि उस पार्टी में रहते हुए ” सांप के मुंह में भी चुम्मा और बेंग के मुंह में भी चुम्मा ” लेने वाले चरित्र को दर्शाना चाहिए ।

इस बाबत पूर्णिया जिला एमआइएम के सचिव डॉ अबू सायम ने नया रहस्य यह खोला है कि केंद्रीय सरकार की सीएए को समर्थन देने के बाद आक्रोशित बिहार की तस्बीर देख जब नीतीश कुमार एक दिन के राजनीतिक मंथन के लिए राजगीर प्रवास पर गये और दूसरे दिन राजधानी लौटे थे तो प्रशांत किशोर को बुलाकर चार घन्टे तक राजनीतिक टिप्स दिए थे।
नीतीश कुमार की उसी टिप्स का नतीजा है कि उक्त चार घन्टे की मीटिंग से निकलने के बाद से ही प्रशांत किशोर ने नागरिकता कानून के विरोध में असरदायक दिखावटी बयानबाजी शुरू कर दिया, जो अब भी जारी है।

एमआइएम नेता के अनुसार , नीतीश कुमार ने बड़ी ही चालाकी की राजनीति चाल चलते हुए प्रशांत किशोर को महागठबंधन का नेतृत्व हासिल करने के लिए लगाया है और इसी चालबाजी पूर्ण राजनीति का एक हिस्सा किशनगंज में जदयू के कोचाधामन विधायक के द्वारा निभाने की कोशिश की गई है कि अगर वहां की जनता विधायक की बात पर दिग्भ्रमित होती है तो जदयू की फिर से चांदी हो जाएगी।

उन्होंने कहा है कि किशनगंज में जनता के आक्रोशों के बीच जानबूझकर मंत्री अशोक चौधरी और एमएलसी तनवीर अख्तर का पार्टी प्रोग्राम कराया जाना यही दर्शाता है कि नीतीश कुमार अपनी पार्टी जदयू के कुछ नेताओं के जरिये सीमांचल की जनता को एकबार फिर से बेबकुफ़ बनाने के प्रयास में हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अबकी बार के आने वाले चुनाव में यह बगुला भगत बिहार की जनता को फिर ठगने की फिराक में है।

एमआइएम नेता अबू सायम हालांकि इसी क्रम में लगे हाथ किशनगंज के सांसद पर भी क्षेत्र के लोगों को गलत दिशा निर्देश देने का आरोप लगाते हैं कि उनके संसदीय क्षेत्र की एक सीएए विरोधी सभा में जब जनता ने उपाय सुझाने का आग्रह किया तो किशनगंज सांसद ने जनता को सुझाव दिया कि वे अपने कागजात यानि आधार कार्ड , वोटर आईडी , राशन कार्ड दुरुस्त कराएं।

एमआइएम नेता ने आश्चर्य किया कि सांसद ने यह जानते हुए कि ये कागजात किसी काबिल नहीं हैं , जनता को जेब कटबाने के लिए सरकारी दफ्तरों की दौड़धूप में झोंक दिया । जिससे कांग्रेस की बदनामी हो सकती है ।

बहरहाल , सीमांचल में फिलबक्त अजीबोगरीब राजनीतिक स्थिति नजर आ रही है। एक ओर सीएए एनपीआर के खिलाफ सड़कों पर उतरी जनता पूरी शिद्द्त से डंटी हुई है तो दूसरी ओर इस जनता की अगुवाई हासिल करने में लगी विपक्षी दलों में एक दूसरे के खिलाफत की होड़ मची है ।