नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन में बिहार के आमिर हंजला हो गए शहीद

पटना | फुलवारी शरीफ स्थानीय लोगो ने बिहार मंथन दैनिक समाचार को पुष्टि की है कि आमिर हंजला 21 दिसम्बर को राजद के आह्वान पर नागरिकता कानून के खिलाफ शांति पूर्ण प्रदर्शन में शामिल थे, जब नागरिकता कानून के समर्थकों के द्वारा पटना के फुलवारी शरीफ में शांतिपूर्ण जुलुस पर गोलीबारी और पत्थरबजी  की गई, उस समय “शहीद आमिर हंज़ला” भगदड़ में सांगत वाली गली में ही घुस गए थे, जहाँ से अराजक तत्व लोग आये थे और आज उनकी लाश बरामद हुई है .

फोटो – 21 वर्षीय शहीद आमिर हंजला

21 वर्षीय आमिर हंजला की लाश को पुलिस ने रिकवर किया और पोस्टमार्टम भी करवाया. हंजाला को आज ही पुलिस की देख रेख में सुपुर्दे खाक कर दिया गया.

फुलवारी शरीफ़ दस दिनों से लापता बीस वर्षीय मुस्लिम युवक अमीर हंजला की लाश कल रात में एक झाड़ी से मिली. पीएमसीएच में भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच पोस्टमार्टम के बाद चितकोहरा क़ब्रिस्तान में दफ़न की रस्म अदा की जा रही है. लाश इतनी छत-विछत हालत में थी कि जनाज़े को नहलाया-धुलाया नहीं जा सका. बिहार राज्य मदरसा बोर्ड के कर्मचारी सुहैल अहमद के पुत्र हंजला 21 दिसंबर को बिहार बंद के दिन पुलवारी शरीफ़ में सांप्रदायिक हिंसा के दौरान लापता हो गया था. बताया जाता है कि हंजला संगत मुहल्ला की तरफ़ गया था. उसके बाद मोबाईल का स्विच ऑफ हो गया. काफ़ी तलाश करने के बाद भी अता पता नहीं लग पा रहा था. कल लाश मिलने के बाद इलाक़े में सनसनी फैल गयी है. परिवार में मातम पसर गया है.

खबर के अनुसार इस मामले में चार एफआईआर दर्ज किये गये हैं और अब तक कुल 60 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता जौहर आजाद  ने इस हादसे पर गहरी संवेदना जताई और कहा है कि आमिर हंजला की शहादत नाकाम नहीं जायेगी. उन्होंने कहा कि हम नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ अपना लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रखेंगे. जौहर आजाद ने कहा कि आमिर हंजाला को देश विरोधी ताकतों ने मार डाला.

उन्होंने अपील की है कि सरकार हंजला के परिवार को कम्पनसेशन दे. काशिफ हंज़ला की शहादत पर इमारत शरिया के मौलाना सुहैल अख्तर ने कहा कि इस मासूम की आखिर गलती क्या थी जो उन पर गोली चलाई गयी.

एक साधारण परिवार से आने वाले आमिर हंजला फुलवारी शरीफ के हारून नगर स्थित सेक्टर 3 के रहने वाले थे. वह  बैग बनाने वाले कारोबारी के यहां काम कर रहे थे और 21 दिसम्बर को नागिरकता कानून के खिलाफ बंद के दौरान प्रदर्शन में शरीक हुए थे.