सीतामढ़ी जिला के अंतर्गत पुपरी बाज़ार में CAA और NRC के विरूद्ध विशाल प्रदर्शन।

बातिल से जो, वो साहिब ए #ईमान थोड़ी है

ये शाही हुक्म है, #अल्लाह का फरमान थोड़ी है।

CAB & NRC के विरुद्ध जनकपुर रोड पुपरी में सुरसंड विधानसभा से विधायक सैयद अबू दुजाना, के अध्यक्षता में प्रदर्शन किया गया जिसमें जिला के सभी वर्ग के लोगों  ने हिस्सा लिया    

फोटो – सीतामढ़ी(पुपरी), सुरसंड विधान सभा के लोग NRC/CAB का विरोध करते हुए

मोहम्मद रजा उल्लाह उर्फ लड्डन, हसनपुर बरहरवा, अपने साथियों के साथ  पहुंचे, विधायक सैयद अबु दुजाना,ने कहां की भाजपा सरकार अपनी नाकामी छुपाने के लिए जनता को गुमराह कर रही है

आज का यह प्रदर्शन बहुत ही शांतिपूर्वक रहा किसी तरह का कोई जानि या माली नुकसान नहीं हुआ और खास बात ये रही इस प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे सभी जाति सभी धर्म हिंदू मुस्लिम सब लोगों ने साथ दिया धन्यवाद देना चाहेंगे अपने उन हिंदू भाइयों को जिन्होंने CAB & NRC जैसे काला कानून के खिलाफ आवाज उठाई मौके पर उपस्थित हजारों लोगों की एक ही आवाज थी कि हम अपनी जान दे देंगे मगर इस बिल को लागू नहीं होने देंगे। यह देश हम सबका है जितना हिंदू का है उतना मुसलमान का है मोहम्मद रजा उल्लाह उर्फ लड्डन, ने

केंद्र की भाजपा सरकार व बिहार की नीतीश सरकार पर आक्रोश जताया। कहा कि जान दे देंगे मगर , सावरकर और गोडसे वाली बिल को नहीं मानेंगे। ये देश बापू , भीम राव, अंबेडकर , का है ये देश हिंदू, मुस्लिम, सिख , ईसाई, का देश है । जितना हक हिन्दू का है उससे ज़्यादा  हक मुसलमानों का  है। ये देश किसी के बाप की जागीर नहीं जो कोई कुछ बोले और देश मान ले। और मौके पर हजारों की संख्या में लोग मौजूद रहे और मेनुरेंड्रम भी पेश किया।

1.     यह कि नागरिक संसोधन विधेयक देश के संविधान की मूलभूत भावनाओं के खिलाफ है इस कानून को किसी भी कीमत पर बरदास्त नही किया जाएगा इस कानून से धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा मिलेगा और देश के लोगों को बाँटने का काम करेगा।

2.     यह कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 में हर व्यक्ति को कानून में समानता और बराबरी दी गई है और राज्य के किसी भी व्यक्ति के प्रति उसके धर्म, जाति या पंथ के आधार पर कानून के सामने दुर्व्यहार करने से रोका गया है। ऐसा करना समानता के मूल सिद्धान्त के विरुद्ध है। संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित यह काला कानून संविधान कि भावना और इसकी मूल संरचना का उल्लंघन करता है।

3.     यह कि यह विधेयक धर्म के आधार पर नागरिकता को विभाजित करने वाला है, देश का संविधान सभी धर्म के लोगों को समान व्यवहार करने के लिए वचनवद्ध है यह विधेयक संविधान कि भावना और इसकी मूल संरचना का उल्लंघन करता है।

अतः हमलोग महामहिम राष्ट्रपति महोदय से अपील करते हैं कि इस कानून के माध्यम से लोगों के साथ अन्याय और सम्प्रदायिक्ता के लक्ष्य को रोकने के लिए अपना गरीमापूर्ण पद के प्रभाव को उपयोग करें। इसके लिए हम सब  आपका आभारी रहूँगा।